नुसरत फतेह अली खान को कव्वाली का बेताज बादशाह कहा जाता है। अपनी शानदार आवाज के दम पर उन्होंने भारतीय संगीत को एक अलग पहचान दिलाई। उनके कई गाने आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इन्हीं में से एक है मशहूर गाना ‘आफरीन आफरीन’, जिसे आज भी सुनने पर पुराना नहीं लगता। कमाल बात ये है कि इस गाने के बोल जावेद अख्तर ने कोलकाता की एक सड़क पर बैठकर लिखे थे। ये एक बेहतरीन और दिलचस्प किस्सा है।
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जेन-जी की भी पसंद है ये गाना
‘आफरीन आफरीन’ एक बेहद मशहूर, सदाबहार सूफी रोमांटिक गाना है। इस गाने के अब के समय में कई वर्जन रिलीज हो चुके हैं लेकिन इसका ओरिजनल वर्जन उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने गाया है। इस गाने की धुन भी नुसरत फतेह अली खान ने ही बनाई है।
इस गाने की शानदार बात ये है कि इसे हर जेनरेशन के लोग सुनना पसंद करते हैं। 1996 में ‘संगम’ एल्बम का हिस्सा बनकर सामने आया ये गाना उस दौर से लेकर आज के जेन-जी की भी पसंद बना हुआ है।
सड़क पर बैठकर जावेद साहब ने लिखे बोल
जावेद अख्तर और नुसरत साहब ने संगम एल्बम में कई गाने बनाए लेकिन ‘आफरीन आफरीन’ उनसे से सबसे ज्यादा चर्चित गाना बना। जावेद अख्तर ने इस गाने पर बात करते हुए बताया कि उन्होंने इस गाने के मुखड़े का आइडिया कोलकाता के चौरंगी इलाके में आया था।
जावेद साहब अपनी कार में थे और चौरंगी इलाके को क्रॉस कर रहे थे। उस तरफ मुड़ते हुए अचानक इस गाने का ख्याल उनके मन में आया। बाद में उन्होंने ये नुसरत साहब को सुनाया, उन्हें ये काफी पसंद आया। इसके बाद जाकर बना ये बेहतरीन गाना।
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समय के साथ बन गया कल्ट गीत
‘आफरीन आफरीन’ की लोकप्रियता समय के साथ और बढ़ती गई। साल 2003 में राहत फतेह अली खान ने इसका स्टूडियो वर्जन रिकॉर्ड किया, जिसे ‘बेस्ट ऑफ खान 3’ में शामिल किया गया। इसके बाद 2016 में राहत ने मोमिना मुस्तहसन के साथ ‘कोक स्टूडियो पाकिस्तान’ में इसे नए पॉप-सूफी अंदाज में पेश किया।
यह वर्जन भी काफी हिट रहा और नई पीढ़ी के बीच गाने को फिर से लोकप्रिय बना दिया। इस गाने को मशहूर, लोकप्रिय कहने से बेहतर कल्ट सॉन्ग बोलना गलत नहीं होगा। यही वजह है कि 30 साल बाद भी जब सूफी गानों की बात होती है तो ये गाना लोगों की जुबान पर आ ही जाता है।
