हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की बात हो और अभिनेता रहमान का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। 23 जून 1921 को जन्मे रहमान का पूरा नाम सैयद रहमान खान था। वो उन चुनिंदा कलाकारों में से थे जिन्होंने हीरो, विलेन और चरित्र अभिनेता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी शालीन अदाकारी, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और नफासत भरे अंदाज के लिए मशहूर रहमान ने कई ऐसी फिल्में दीं, जिनके किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं।

उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया था। आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर आइए जानते हैं उनके 10 सबसे यादगार किरदारों के बारे में।

  1. प्यासा (1957) – मिस्टर घोष

गुरु दत्त की कालजयी फिल्म प्यासा में रहमान ने प्रकाशक मिस्टर घोष का किरदार निभाया था। यह एक ऐसे व्यवसायी का चरित्र था जो साहित्य को कला नहीं, बल्कि मुनाफे के नजरिए से देखता है। फिल्म के नायक विजय (गुरु दत्त) की कविताओं को वह तब महत्व देता है जब उसे उनमें आर्थिक लाभ नजर आता है। रहमान ने इस किरदार में उस समाज का चेहरा दिखाया जो इंसान की प्रतिभा की नहीं, उसकी सफलता की कद्र करता है। भले ही स्क्रीन टाइम सीमित था, लेकिन उनका किरदार फिल्म के सामाजिक संदेश को मजबूत बनाता है।

  1. चौदहवीं का चांद (1960) – नवाब प्यारे मिर्जा

इस फिल्म में रहमान ने नवाब प्यारे मिर्जा की भूमिका निभाई, जो दोस्ती, प्रेम और त्याग के बीच फंसा एक संवेदनशील इंसान है। फिल्म में उनके साथ गुरु दत्त और वहीदा रहमान भी थे। नवाब प्यारे मिर्जा का किरदार शालीनता, भावुकता और दोस्ती के लिए कुर्बानी देने की मिसाल माना जाता है। रहमान ने अपने संयमित अभिनय से इस किरदार को बेहद यादगार बना दिया था।

  1. साहिब बीबी और गुलाम (1962) – छोटे सरकार

साहिब बीबी और गुलाम में रहमान ने छोटे सरकार का किरदार निभाया था। वह एक जमींदार परिवार का सदस्य होता है, जिसकी ऐयाशी और गैर-जिम्मेदाराना रवैया उसकी पत्नी के जीवन को बर्बाद कर देता है। मीना कुमारी द्वारा निभाई गई छोटी बहू के दुखों के पीछे छोटे सरकार का व्यवहार एक बड़ा कारण था। रहमान ने इस किरदार में सामंती मानसिकता और पुरुष अहंकार को बड़ी प्रभावशीलता से पर्दे पर उतारा।

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  1. दिल ने फिर याद किया (1966) – अशोक

इस रोमांटिक ड्रामा में रहमान ने अशोक की भूमिका निभाई थी। यह किरदार भावनाओं, रिश्तों और प्रेम के जटिल पहलुओं से गुजरता है। रहमान ने अपने शांत और परिपक्व अभिनय से किरदार में गहराई पैदा की। फिल्म की भावनात्मक कहानी में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है और यही वजह है कि यह भूमिका आज भी याद की जाती है।

  1. वक्त (1965) – चिनॉय सेठ

रहमान के करियर की सबसे चर्चित भूमिकाओं में से एक थी चिनॉय सेठ। बी.आर. चोपड़ा की सुपरहिट फिल्म वक्त में उन्होंने एक अमीर, चालाक और प्रभावशाली कारोबारी का किरदार निभाया था। उनका अंदाज, संवाद अदायगी और व्यक्तित्व दर्शकों को बेहद पसंद आया। “चिनॉय सेठ” का नाम आज भी हिंदी सिनेमा के क्लासिक किरदारों में गिना जाता है। इस भूमिका ने साबित किया कि रहमान सिर्फ सहायक अभिनेता नहीं, बल्कि एक दमदार स्क्रीन प्रेजेंस वाले कलाकार थे।

  1. बहारों की मंजिल (1968) – पुलिस अधिकारी

इस सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म में रहमान ने एक पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया। उनका किरदार कहानी में रहस्य सुलझाने और घटनाओं को दिशा देने का काम करता है। उन्होंने एक जिम्मेदार और गंभीर अधिकारी की भूमिका को विश्वसनीय तरीके से निभाया, जिससे फिल्म की कहानी और प्रभावशाली बन गई।

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  1. धरम करम (1975) – ठाकुर

राज कपूर की फिल्म धरम करम में रहमान ने ठाकुर की भूमिका निभाई थी। यह एक सम्मानित और प्रभावशाली व्यक्ति का किरदार था, जो कहानी के सामाजिक और नैतिक पक्ष को मजबूत करता है। उस दौर तक रहमान चरित्र अभिनेता के रूप में स्थापित हो चुके थे और उन्होंने इस भूमिका में भी अपनी गरिमामयी छवि बरकरार रखी।

  1. दाग (1973) – सेठ धर्मदास

यश चोपड़ा निर्देशित दाग में रहमान ने सेठ धर्मदास का किरदार निभाया। यह एक प्रभावशाली और संपन्न व्यक्ति का चरित्र था, जिसकी मौजूदगी कहानी के कई अहम मोड़ों को प्रभावित करती है। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर जैसे सितारों के बीच भी रहमान अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे।

  1. प्रेम नगर (1974) – राजा साहब

प्रेम नगर में रहमान ने राजा साहब का किरदार निभाया था। उनका शाही व्यक्तित्व, नपी-तुली संवाद अदायगी और गरिमामय अंदाज इस भूमिका की सबसे बड़ी खासियत थे। राजेश खन्ना और हेमा मालिनी स्टारर इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे कुलीन व्यक्ति की भूमिका निभाई जो अपनी मौजूदगी मात्र से प्रभाव छोड़ता है।

  1. खानदान (1965) – पारिवारिक मुखिया

पारिवारिक मूल्यों पर आधारित फिल्म खानदान में रहमान ने एक महत्वपूर्ण पारिवारिक किरदार निभाया था। उन्होंने परिवार, रिश्तों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने वाले व्यक्ति को बड़ी सहजता से पर्दे पर उतारा। इस फिल्म ने साबित किया कि रहमान सिर्फ नकारात्मक या शाही किरदारों तक सीमित नहीं थे, बल्कि पारिवारिक भूमिकाओं में भी उतने ही प्रभावशाली थे।

रहमान उन अभिनेताओं में थे जिन्होंने विलेन के किरदारों को भी गरिमा और क्लास के साथ निभाया। वे कभी ऊंची आवाज या अतिनाटकीय अंदाज के मोहताज नहीं रहे। उनकी आंखों के भाव और संवाद अदायगी ही उनके किरदारों को यादगार बना देती थी।

आज भी जिंदा है रहमान की विरासत

1984 में दुनिया को अलविदा कहने वाले रहमान भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन प्यासा, चौदहवीं का चांद, साहिब बीबी और गुलाम और वक्त जैसी फिल्मों में उनके निभाए किरदार उन्हें हमेशा अमर बनाए रखेंगे। उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर हिंदी सिनेमा के इस शानदार कलाकार को याद करना, भारतीय फिल्म इतिहास के एक सुनहरे अध्याय को याद करने जैसा है।