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Lok Sabha Election 2019: क्या ममता का करिश्मा दोहरा सकेंगी मिमी!

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): वर्ष 2014 में तृणमूल कांग्रेस के डॉ सुगत बोस ने माकपा के सुजन चक्रवर्ती को लगभग सवा लाख वोटों पराजित किया था, लेकिन इस बार हावर्ड विश्वविद्यालय से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलने पर ममता ने उनकी जगह मिमी को उतार कर राजनीतिक पंडितों को हैरत में डाल दिया।

प.बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। (फाइल फोटोः fb/MamataBanerjeeOfficial)

Lok Sabha Election 2019: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बांग्ला फिल्मों की शीर्ष अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती में महज दो समानताएं हैं। पहली यह है कि दोनों के नाम म से शुरू होते हैं और दूसरी यह है कि कोलकाता की जिस प्रतिष्ठित जादवपुर सीट पर तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर मिमी मैदान में हैं वहां कोई 35 साल पहले ममता बनर्जी भी अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़ी थीं। लेकिन ममता जहां अपने पहले ही चुनाव में माकपा के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को धूल चटा कर संसद में पहुंची थीं, वहीं अबकी सवाल पूछा जा रहा है कि क्या ममता का करिश्मा मिमी दोहरा पाएंगी? हालांकि 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या की वजह से कांग्रेस के प्रति देश में जबरदस्त लहर थी और ममता छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय थी। दूसरी ओर, मिमी बांग्ला फिल्मों में अभिनय करती रही हैं और राजनीति का ककहरा तक नहीं जानतीं।

वर्ष 2014 में तृणमूल कांग्रेस के डॉ सुगत बोस ने माकपा के सुजन चक्रवर्ती को लगभग सवा लाख वोटों पराजित किया था, लेकिन इस बार हावर्ड विश्वविद्यालय से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलने पर ममता ने उनकी जगह मिमी को उतार कर राजनीतिक पंडितों को हैरत में डाल दिया। वैसे, ममता हर बार फिल्मी सितारों और उनके ग्लैमर पर भरोसा जताती रही हैं और उनका भरोसा सही साबित होता रहा है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तक ने इस अहम सीट पर मिमी को मैदान में उतारने की कल्पना तक नहीं की थी। अबकी यहां मिमी का मुकाबला माकपा के वरिष्ठ नेता विकास रंजन भट्टाचार्य से है।

भाजपा ने इस सीट पर डॉ अनुपम हाजरा को उतारा है। हाजरा पिछली बार बीरभूम से तृणमूल के टिकट पर जीते थे। लेकिन बीते दिनों पार्टी-विरोधी गतिविधियों के अांरोप में तृणमूल कांग्रेस से निकाले जाने के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। एक वाक्य में कहें तो इस सीट पर अनुभव का मुकाबला ग्लैमर से है। मिमी चक्रवर्ती मानती हैं कि राजनीति में उनका अनुभव शून्य है और इस सीट पर उनका मुकाबला दिग्गज राजनेताओं से है। लेकिन उनको उम्मीद है कि लोग दीदी के नाम पर वोट देंगे। अपनी तमाम रैलियों में वे कहती भी हैं कि आप मुझे नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के नाम पर वोट दें। मिमी कहती हैं कि वे सांसद बनने के बाद इलाके की समस्याओं पर ध्यान देने का भरसक प्रयास करेंगी।

ममता बनर्जी मिमी के समर्थन में कई रैलियां कर चुकी हैं। उन रैलियों में खासकर मिमी को देखने और उनके साथ सेल्फी खिंचाने के शौकीनों की भारी भीड़ तो जुटती है। लेकिन साथ ही सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या यह भीड़ वोटों में बदल सकेगी? दूसरी ओर, माकपा अबकी यहां जीत के प्रति आश्वस्त हैं। पार्टी के उम्मीदवार विकास रंजन भट्टाचार्य कोलकाता नगर निगम के मेयर भी रह चुके हैं। वे कहते हैं कि मेयर रहने के नाते उनको इस इलाके की तमाम समस्याओं की जानकारी है। भट्टाचार्य मिमी को हवाई नेता बताते हुए कहते हैं कि उनको जमीनी हकीकत की कोई जानकारी नहीं है। उनकी दलील है कि बंगाल में लोग पहले भी फिल्मी सितारों पर भरोसा कर धोखा खाते रहे हैं। लेकिन जादवपुर इलाके के मतदाता राजनीतिक रूप से काफी सचेत हैं और वे ऐसी गलती नहीं करेंगे।

उधर, भाजपा भी इस सीट पर जीत के दावे कर रही है। पार्टी के उम्मीदवार अनुपम हाजरा दावा करते हैं कि लोग माकपा से पहले ही आजिज आ चुके हैं और तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार को राजनीति की एबीसीडी भी नहीं आती। ऐसे में भाजपा ही उनके लिए एकमात्रत्र विकल्प है। वर्ष 2009 में इस सीट पर भाजपा को महज 1.90 फीसद वोट मिले थे जो वर्ष 2014 में बढ़ कर 12.22 फीसद तक पहुंच गए।

पार्टी का दावा है कि अबकी बदलाव की लहर में लोग भाजपा पर ही भरोसा जताएंगे। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि इस सीट पर पहली बार फिल्मी सितारे को जमीन पर उतार कर ममता ने चुनावी लड़ाई में ग्लैमर का तड़का लगा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यहां ग्लैमर जीतता है या अनुभव उस पर भारी पड़ता है।

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