ताज़ा खबर
 

जब एनटीआर न्याय मांगने जनता के पास गए

सन 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति की लहर के दम पर कांग्रेस ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 541 में से 404 सीटें जीती थीं। विरोधी दलों की ऐसी कमर टूटी थी कि कोई भी राष्ट्रीय पार्टी संसद में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने लायक नहीं बची।

एनटीआर अस्पताल में ही थे कि उन्हें खबर मिली कि राज्यपाल रामलाल ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा कर भास्कर राव को मुख्यमंत्री बना दिया है। एनटीआर तुरंत लौटे। कुरसी वापस पाने की संवैधानिक कोशिशें की। विफल होने पर एनटीआर न्याय पाने के लिए जनता के पास गए।

सन 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति की लहर के दम पर कांग्रेस ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 541 में से 404 सीटें जीती थीं। विरोधी दलों की ऐसी कमर टूटी थी कि कोई भी राष्ट्रीय पार्टी संसद में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने लायक नहीं बची। तब आंध्र प्रदेश में 30 सीटें जीती एनटीआर की तेलुगु देशम पार्टी मुख्य विपक्षी दल बनी। सिनेमा की दुनिया का कोई भी सितारा आज तक इतनी ऊंची छलांग नहीं लगा सका। 29 मार्च, 1982 को तेलुगू अस्मिता के नाम पर टीडीपी बनी। एनटीआर के कांग्रेसी मित्र नादेंदला भास्कर राव भी इससे जुड़ गए। 1983 में टीडीपी की सरकार बनी तो एनटीआर मुख्यमंत्री बने और भास्कर राव वित्त मंत्री। अगस्त 1984 में दिल का ऑपरेशन करवाने एनटीआर अमेरिका गए तो राजकाज भास्कर राव को सौंपा था।

एनटीआर अस्पताल में ही थे कि उन्हें खबर मिली कि राज्यपाल रामलाल ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा कर भास्कर राव को मुख्यमंत्री बना दिया है। एनटीआर तुरंत लौटे। कुरसी वापस पाने की संवैधानिक कोशिशें की। विफल होने पर एनटीआर न्याय पाने के लिए जनता के पास गए। एनटीआर की लोकप्रिय छवि और उनके साथ हुए अन्याय के कारण जनता उनके साथ थी। मीडिया उनके हक की आवाज उठा रहा था। 17 विरोधी दल एनटीआर के साथ थे। एनटीआर ने पूर्व कांग्रेसी नेता भास्कर राव के कृत्य को पीठ में खंजर भोंकना बता तेलुगु अस्मिता की दुहाई दी। केंद्र की कांग्रेस सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया। अभिनय में प्रवीण एनटीआर की भावुक तकरीरों ने जनता में कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा भर दिया था।

आखिर केंद्र सरकार झुकी। राज्यपाल रामलाल वापस बुलाए गए। शंकरदयाल शर्मा उनकी जगह आए और सितंबर 1984 में एनटीआर को वापस मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इसके तीन महीने बाद इंदिरा गांधी की हत्या के कारण चुनाव हुए मगर तब तक आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ पैदा रोष कम नहीं हुआ इसके कारण देश भर को अपने आगोश में लेने वाली सहानुभूति की लहर आंध्र में बेअसर रही।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App