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अमीरों पर टैक्‍स लगाकर गरीबों को 6 हजार रुपये महीना दे सकती है कांग्रेस : रिसर्च

खबर है कि पेरिस के संस्थान वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब के अनुसार कांग्रेस अमीरों पर टैक्स लगाकर गरीबों को मदद पहुंचा सकती है। ऐसा करने पर बीजेपी की 10 प्रतिशत आर्थिक कोटे की स्कीम भी चुनावी हथकंडा साबित होगी।

इस संस्थान ने एनडीए- कांग्रेस दोनों की गरीबों को मदद देने वाले स्कीम पर अध्ययन किया है।(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बड़ा ऐलान करते हुए न्यूनतम आय योजना (न्याय) की घोषणा की। इस घोषणा के तहत देश के 20 प्रतिशत सबसे गरीब परीवारों को 6000 रुपए मासिक आर्थिक मदद देने का ऐलान किया। खबर है कि पेरिस की एक संस्था वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब के अनुसार कांग्रेस अमीरों पर टैक्स लगाकर गरीबों को मदद पहुंचा सकती है। ऐसा करने पर बीजेपी की 10 प्रतिशत आर्थिक कोटे की स्कीम भी चुनावी हथकंडा साबित होगी।

संस्था ने एक तुलनात्मक अध्ययन जारी किया है जिसमें गरीबों को लुभाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों द्वारा 2019 को लेकर वादों का जिक्र है। हालांकि कांग्रेस द्वारा इस प्लान को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। वहीं, पेरिस की संस्था द्वारा कुछ आर्थिक उपाय सुझाए गए हैं। 72000 की वार्षिक आय की गांरटी का खर्च लगभग 2.9 ट्रिलियन(जीडीपी का 1.3%) के बराबर होगा।इस स्कीम को लेकर पेपर में कहा गया है कि अगर 2.5 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति रखने वाले लोगों(टॉप 0.1% परिवार) पर  2 प्रतिशत का टैक्स लगा दिया जाए तो प्राप्त हुई कुल धन राशि 2.3 ट्रिलियन या जीडीपी का 1.1% होगी।

सह निदेशक लुकास चैनसेल और रिसर्च फेलो नितिन भारती ने इस पेपर को लिखा है। फ्रेंच अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी के साथ चैनसेल संस्था के कार्यकारी समिति के हिस्सा हैं। बता दें कि असमनाता को लेकर थॉमस पिकेटी द्वारा किए गए कामों को लेकर काफी बहस छिड़ी हुई है।यह पूछने पर कि क्या कांग्रेस उनके इस प्लान को अपनाएगी? चैनसेल का कहना है कि हम कांग्रेस के साथ सीधे संपर्क में नहीं हैं। हमने अपने स्कीम और रिजल्ट अभिजीत बनर्जी (प्रोफेसर एमआईटी और पॉवर्टी एक्शन लैब के निदेशक) से साझा किए हैं जो कांग्रेस से बात कर रहे हैं। हम उनके साथ सीधे संपर्क में नहीं हैं।

1980 के बाद से बढ़ रही है आर्थिक असमानता:

भारती और चैनसेल ने पाया है कि भारत में आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है और यह 1980 के बाद से लगातार बढ़ती ही जा रही है। इंडिय एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान चैनसेल ने कहा कि भारत में प्रोग्रेसिव टैक्स( वो इनकम टैक्स जिसमें टैक्स रेट इनकम के बढ़ने के साथ बढ़ते है)  1980 के बाद से लगतार गिर रहा है। सभी आर्थिक कर को बढ़ा देने से निचले स्तर पर वृद्धि नहीं होती है। भारत में शीर्ष पर तेजी से आय बढ़ी है और आर्थिक असमानता बढ़ रही है। ऐसे में कहा जा सकता है कि शीर्ष के अमीर लोगों पर टैक्स के जरिए भारत में अति आर्थिक असमानता को रोका जा सकता है।

भारती का कहना है कि, प्रोग्रेसिव टैक्सेशन फिलहाल में एक व्यावहारिक तरीका है।प्रोग्रेसिव टैक्सेशन से हाल के दिनों में बढ़ी आर्थिक असमानता जो पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ी है उसे रोका जा सकता है। इतना ही नहीं प्रोग्रेसिव टैक्सेशन से भारतीय लोगों द्वारा रिएल स्टेट बिजनसे में लगातार किए जा रहे निवेश में भी कमी आएगी और लोग अन्य सेक्टर में भी निवेश करेंगे। भारत में संपत्ति के तौर पर 90 प्रतिशत जमीन और इमरातें हैं।उनका कहना है कि भारत में आय और संपत्ति के लिए एक पहचान सूचक की कामी है।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी हो खर्च:
लेखक ने तीन स्लैब में 20 प्रतिशत गरीबों को सहायता राशी मुहैया कराई जा सकती है। 72 हजार की सलाना आय की स्कीम को इन लोगों ने अपने ‘बी सेनेरियो’ में रखा है। इत्तेफाक से राहुल गांधी ने हाल ही में इस स्कीम की घोषणा की थी। वहीं, एनडीए के 10 प्रतिशत कोटा देने की स्कीम को इन लोगों ने गलत ठहराया है। उनका कहना है कि यह महज चुनावी हथकंडा है। इससे आर्थिक असमानता दूर नहीं की जा सकती। एनीडए की इस स्कीम पर आय सीमा के हिसाब से 93 प्रतिशत से अधिक परिवार इसके पात्र हैं। वहीं वर्तमान कृषि भूमि पर मेट्रिक के आधार पर 95 प्रतिशत परिवार इसके पात्र हैं। आवास और अन्य संपत्ति के आधार पर 80 प्रतिशत परिवार इसक पात्र हैं। चैनसेल- भारती की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक सहायता के साथ-साथ इन लोगों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी लगातार खर्च किया जाना चाहिए। अन्यथा इन स्कीमों का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जैसा अन्य देशों में भी देखा गया है।

कयास लगाए जा रहे थे कि पेकेटी ने ही कांग्रेस को यह सुझाव दिया था। लेकिन पेकेटी ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने बीबीसी से कहा कि मैं हर उस कदम का समर्थन करता हूं जो भारत में आर्थिक असमानता को कम करने में कारगार हो और राजनीतिक मुद्दों को जाति से हटाकर वर्ग और आय पर लेकर आने वाला हो।

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