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यूपी-उत्‍तराखंड को जीत नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने प्रशांत किशोर से लिया बिहार की हार का बदला

उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल कर सबको हैरान कर दिया।

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उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल कर सबको हैरान कर दिया। यूपी में तो भाजपा ने जीत के कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। लगभग 40 साल पहले किसी पार्टी को यहां पर 300 से ज्‍यादा सीटें मिली थी। वहीं उत्‍तराखंड में भी भाजपा ने 70 प्रतिशत सीटों पर विजयी पताका फहराई है। इस जीत में खास बात यह भी है कि कांग्रेस को चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी नहीं बचा पाए। भाजपा ने यूपी की जीत से बिहार में डेढ़ साल पहले मिली हार का बदला भी चुकता कर दिया। किशोर साल 2014 के लोकसभा चुनाव और 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों के चलते राजनीतिक पार्टियों की ओर से डिमांड में थे।

2014 में वे भाजपा के साथ थे और उन्‍होंने ‘चाय पे चर्चा’ जैसे कई अनूठे प्रचार के तरीके शुरू किए थे। इन चुनावों में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल रही थी। हालांकि इन चुनावों के बाद भाजपा की प्रशांत किशोर से दूरियां हो गई थी। नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को बिहार चुनावों के लिए अपने साथ जोड़ लिया था। किशोर ने जेडीयू और राजद को साथ लाकर महागठबंधन बना दिया। इसके बाद चुनाव की पूरी रणनीति अपने हाथ में ले ली। उनके तीर निशाने पर लगे और महागठबंधन ने भारी बहुमत के साथ बिहार में सरकार बना ली।

बिहार की जीत भाजपा के लिए बड़ा झटका था। नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों ने बिहार जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन किशोर की रणनीति के आगे वे फेल रहे। बताया जाता है कि अमित शाह से झगड़े के बाद ही प्रशांत किशोर ने भाजपा से नाता तोड़ा था। बिहार की जीत के बाद कांग्रेस ने उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखंड के लिए किशोर को जोड़ा था। खुद कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को किशोर रिपोर्ट किया करते थे। यूपी में कांग्रेस की खाट सभा, शीला दीक्षित को सीएम पद का उम्‍मीदवार बनाना, जातिगत समीकरणों को ध्‍यान में रखकर यूपी कांग्रेस में बदलाव प्रशांत किशोर के कहने पर ही किए गए थे। बाद में सपा और कांग्रेस के गठबंधन के पीछे भी किशोर के दिमाग की ही उपज है।

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