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रामनगर में गुरु-चेले में संघर्ष के आसार

उत्तराखंड में इस बार विधानसभा चुनाव में गुरु और चेले आमने-सामने होंगे।

Uttrakhand election
हरीश राव, रणजीत सिंह रावत। फाइल फोटो।

उत्तराखंड में इस बार विधानसभा चुनाव में गुरु और चेले आमने-सामने होंगे। कुमाऊं मंडल की रामनगर विधानसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के मुख्य संयोजक हरीश रावत ने अपने चेले कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत सिंह रावत की उम्मीदें ध्वस्त कर दी हैं। हरीश रावत के चेले रहे रणजीत सिंह रामनगर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। वे 2017 में इस सीट से हार गए थे परंतु पांच साल क्षेत्र की जनता के बीच डटे रहे।

लेकिन गुरु हरीश रावत ने रामनगर सीट पर अपना दावा ठोक दिया और पार्टी आलाकमान ने दबाव में आकर यह सीट रणजीत सिंह रावत को नहीं दी। परंतु रणजीत सिंह रावत ने हार नहीं मानी है और उन्होंने रामनगर विधानसभा क्षेत्र में हरीश रावत के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ने का ऐलान कर दिया है। माना जा रहा है कि गुरु चेले की लड़ाई में भाजपा को फायदा मिल सकता है और कहीं 2017 की तरह हरीश रावत को फिर कहीं हार का सामना ना देखना पड़े।

रावत का आकलन है कि वे रामनगर से चुनाव लड़ कर कुमाऊं के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में अपनी पकड़ बना सकते हैं। कुमाऊं मंडल की 29 विधानसभा सीटों में से अधिक से अधिक कांग्रेस की झोली में डाल सकते हैं, परंतु जिस तरह से उन्होंने रामनगर सीट पर अपने चेले के खिलाफ दांव खेला, उससे लगता है कि कांग्रेस की फूट और खुलकर सामने आ गई। इसी के साथ कुमाऊं में हरीश रावत ने जिस तरह से अपने समर्थकों को टिकट दिलवाए हैं, उससे कुमाऊं में कांग्रेस में बगावत हो गई है। दुगार्पाल जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी पूर्व विधायक रहे नेताओं ने खुली बगावत कर दी है।

2014 में जब हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने थे तब उनके सिपहसालार रणजीत सिंह रावत थे और वही असली मायनों में रावत की सरकार चला रहे थे परंतु 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों में मनमुटाव हो गया। हरीश रावत ने रणजीत सिंह के समर्थकों को फोन करके उनके समर्थन में चुनाव मैदान में उतरने का आमंत्रण दिया। जिस पर उन्हें जवाब मिला कि वे तो रणजीत सिंह के लिए काम करेंगे। पार्टी आलाकमान ने रणजीत सिंह पर उनके पुराने विधानसभा क्षेत्र सल्ट से चुनाव लड़ने को कहा है। सल्ट से दो बार वे विधायक रहे हैं। रणजीत को मनाने का जिम्मा नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह को सौंपा गया है।

रणजीत का कहना है कि उन्होंने सल्ट से चुनाव लड़ने का मन नहीं बनाया। अब वे क्यों उस विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ने जाएं? यदि ऐसे गुरु चेले में रामनगर सीट पर आमना सामना हो जाता है तो कुमाऊं में कांग्रेस को जबरदस्त नुकसान होगा और भाजपा फायदे में रहेगी। रणजीत सिंह समर्थकों का कहना है कि जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को श्रीनगर, कार्यकारी अध्यक्ष तिलकराज बेहड़ को किच्छा और भुवन कापड़ी को खटीमा से उनकी इच्छा के अनुसार टिकट दिए गए हैं तो उनके साथ पार्टी आलाकमान ने हरीश रावत के दबाव में यह सौतेला बर्ताव क्यों किया?

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