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उत्तराखंड: कांग्रेस को नहीं मिल रहे उम्मीदवार, अंतिम समय में रद्द करनी पड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस

गुरुवार को पार्टी को उम्मीदवारों की सूची का एेलान करना था, लेकिन सही फॉर्म्युले पर नहीं पहुंच पाने के कारण उसे अपनी तय प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करनी पड़ी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत। (पीटीआई फाइल फोटो)

उत्तराखंड में अपने कई बागियों को बीजेपी से टिकट मिलने के बाद कांग्रेस के लिए संकट पैदा हो गया है। उसे अगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति के बारे में फिर से सोचना पड़ रहा है। अपने पुराने नेताओं से मुकाबला करने के लिए सही उम्मीदवार न मिलने के कारण पार्टी उम्मीदवारों का एेलान करने में भी देरी कर रही है। मुख्यमंत्री हरीश रावत बीजेपी के विद्रोहियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को साथ मिलाने की जुगत में जी जान से लगे हुए हैं। बता दें कि गुरुवार को पार्टी को उम्मीदवारों की सूची का एेलान करना था, लेकिन सही फॉर्म्युले पर नहीं पहुंच पाने के कारण उसे अपनी तय प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करनी पड़ी। कहा जा रहा है कि यह घोषणा आज हो सकती है। राज्य में आगामी 15 फरवरी को विधानसभा चुनाव होना है।

आपको बता दें कि 16 जनवरी को कांग्रेस के दिग्गज नेता यशपाल आर्या बीजेपी में शामिल हो गए थे। यशपाल बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए थे। यशपाल आर्य उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें नैनीताल विधानसा सीट से चुनाव लड़वाया जा सकता है। वहीं आर्य के साथ उनके बेटे संजीव आर्य भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। बीजेपी में शामिल होने के बाद यशपाल ने कहा था, “बहुत भारी मन से 41 साल बाद कांग्रेस छोड़ रहा हूं।” उन्होंने कहा था कि वे बीजेपी के कार्यकर्ता हैं और पार्टी जो बोलेगी वहीं करेंगे।

इसके अलावा कयास यह भी हैं कि एक और कांग्रेसी नेता केदार सिंह रावत बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। उनके यमुनोत्री से ‌चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। केदार सिंह रावत के काफी पहले से ही बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। गौरतलब है उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर में आगामी विधानसभा चुनाव फरवरी महीने से शुरू हो जाएंगे।

इससे पहले बीजेपी द्वारा जारी की गई पहली सूची को ‘दल-बदलुओं और भाजपा द्वारा ही पूर्व में भ्रष्टाचार के लिए आरोपित किए गए नेताओं एवं परिवारवाद से भरी हुई’ बताते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 17 जनवरी को कहा था कि इसमें प्रदेश के लिए कुछ भी नहीं है। पार्टी मुख्यालय पर रावत ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्वजनिक रूप से चुनावों में परिवारवाद से दूर रहने की सलाह को उनकी अपनी ही पार्टी द्वारा न माने जाने पर भी अचरज जताया था।

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