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गठबंधन ने चुनावी जंग को बनाया रोचक

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का गढ़ माने जाने वाली बुलंदशहर लोकसभा सीट पर सपा-बसपा व रालोद के गठबंधन की वजह से मुकाबला दिलचस्प है। यहां सीधा मुकाबला भाजपा व गठबंधन उम्मीदवार के बीच है। भाजपा ने सांसद भोला सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि गठबंधन ने योगेश वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक बंसी पहाड़िया पर दांव खेला है।

Author बुलंदशहर | April 17, 2019 1:00 AM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

सैफ सलीम
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का गढ़ माने जाने वाली बुलंदशहर लोकसभा सीट पर सपा-बसपा व रालोद के गठबंधन की वजह से मुकाबला दिलचस्प है। यहां सीधा मुकाबला भाजपा व गठबंधन उम्मीदवार के बीच है। भाजपा ने सांसद भोला सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि गठबंधन ने योगेश वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक बंसी पहाड़िया पर दांव खेला है। जिले में इस बार कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 18 लाख है। इसमें पुरुष मतदाता लगभग 9.5 लाख व महिला मतदाता लगभग 8.5 लाख हैं। बुलंदशहर लोकसभा सीट पर दूसरे चरण के तहत 18 अप्रैल को मतदान होना है।पिछले लोकसभा चुनाव में मौजूदा भाजपा सांसद भोला सिंह ने बसपा उम्मीदवार प्रदीप जाटव को लगभग सवा चार लाख मतों से हराया था। इस बार पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। इस लोकसभा सीट में पड़ने वाली पांच विधानसभा सीटों-बुलंदशहर सदर, शिकारपुर, स्याना, डिबाई और अनूपशहर के कुल मतदाताओं में 77 फीसद हिंदू मतदाता हैं जबकि 23 फीसद मुसलिम मतदाता हैं।

इन सभी सीटों पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी। बुलंदशहर लोकसभा सीट को कल्याण सिंह का गढ़ माना जाता है। अयोध्या प्रकरण के बाद वह इस सीट के किंगमेकर बनकर उभरे। उनके आशीर्वाद की बदौलत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में काबिना मंत्री रहे डा. छत्रपाल सिंह साल 1991 से लेकर 2004 तक भाजपा के टिकट पर चार बार सांसद चुने गए। कल्याण सिंह साल 2004 में खुद इस सीट से सांसद चुने गए लेकिन अपने ही गढ़ में वह सपा-रालोद के संयुक्त उम्मीदवार बदरुल इस्लाम से महज 16651 मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। 2009 में परिसीमन के बाद यह सीट आरक्षित हो गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा आलाकमान ने कल्याण सिंह की मर्जी के खिलाफ पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान को टिकट दे दिया था,जिससे नाराज होकर कल्याण सिंह ने भाजपा से नाता तोड़ सपा का दामन थाम लिया था और अपने करीबी कमलेश वाल्मीकि को सपा के टिकट पर चुनाव जिताकर 1991 से 2009 तक लगातार भाजपा की झोली में जाने वाली यह सीट छीन ली थी।

इसके बाद साल 2014 के चुनाव से पहले कल्याण सिंह ने भाजपा का दामन थामने के बाद इस सीट पर दोबारा से भाजपा का परचम लहरवा दिया था। भाजपा उम्मीदवार डॉ. भोला सिंह ने एतिहासिक जीत हासिल की थी। उन्होंने बसपा के प्रदीप जाटव को 421973 मतों से हराया था। इससे पहले साल 1977 में भारतीय लोकदल के टिकट पर महमूद हसन खान ने कांग्रेस (आइ) के सुरेंद्रपाल सिंह को 211013 मतों से हराया था। जातिगत आंकड़ों पर नज़र डाली जाए तो जिले के प्रमुख मतदाताओं में मुसलिम लगभग 2.20 लाख, जाटव 2.50 लाख, लोध 2.40 लाख,जाट 1.60 लाख, ब्राह्मण 1.20 लाख, वैश्य व ठाकुर लगभग 65-65 हजार,वाल्मीकि व पाल दोनों लगभग 40-40 हजार, सैनी व प्रजापति दोनों लगभग 30-30 हजार हैं।

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