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Uttar Pradesh By poll Results 2018: यूपी उपचुनाव: फिर हुई योगी की फजीहत, कैराना में रालोद को निर्णायक बढ़त, नूरपुर में सपा जीती

Lok Sabha Bypoll Results 2018, Lok Sabha Bye-Election Results 2018: कैराना संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या करीब 17 लाख है। इनमें अल्पसंख्यक वोटरों की तादाद करीब साढ़े तीन लाख है। इनके अलावा जाट, सैनी, प्रजापति, कश्यप आदि पिछड़े मतदाता करीब चार लाख हैं। दलित मतादाताओं की संख्या भी करीब डेढ़ लाख है।

Kairana up Chunav Result 2018: कैराना की लड़ाई बीजेपी और विपक्ष के गठबंधन के बीच है।

उत्तर प्रदेश की कैराना संसदीय और नूरपुर विधान सभा सीट पर 28 मई को हुए उप चुनाव के रुझानों और नतीजों ने फिर से राज्य की सत्ताधारी बीजेपी और सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ की किरकिरी कराई है। दोनों सीटें बीजेपी की झोली से छिटककर विपक्षी रालोद और सपा की झोली में जाती दिख रही है। कैराना संसदीय सीट पर राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) की उम्मीदवार तबस्सुम हसन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार मृगांका सिंह से निर्णायक बढ़त बनाए हुई हैं नूरपुर विधान सभा सीट पर सपा के नईम उल हसन ने बीजेपी उम्मीदवार अवनि सिंह को हरा दिया है। बता दें कि इन दोनों सीटों पर पहली बीजेपी का कब्जा था। बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह के निधन से कैराना सीट खाली हुई थी जबकि लोकेन्द्र सिंह के निधन से नूरपुर विधान सभा सीट खाली हुई थी। गौर करने वाली बात है कि तबस्सुम हसन पहले भी कैराना से सांसद रह चुकी हैं।

इससे पहले गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीटों पर हुए उप चुनाव में भी बीजेपी को मुंह करी खानी पड़ी थी। इससे सीथ लेते हुए पार्टी ने सभी दिग्गजों को मैदान में उतारा था। जाट बहुल क्षेत्र होने की वजह से कैराना में बीजेपी ने अपनी पार्टी के करीब डेढ़ दर्जन जाट विधायकों को भी वोटरों को लामबंद करने के लिए उतारा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद जाकर वहां गन्ना और जिन्ना की बात कहकर ध्रुवीकरण की कोशिश की थी। वोटिंग से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किसानों, गरीबों को लुभाते हुए जातीय-धार्मिक गोलबंदी की जगह विकास का चुनावी पासा फेंका था लेकिन उसका असर नहीं दिख रहा।

बता दें कि कैराना संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या करीब 17 लाख है। इनमें अल्पसंख्यक वोटरों की तादाद करीब साढ़े तीन लाख है। इनके अलावा जाट, सैनी, प्रजापति, कश्यप आदि पिछड़े मतदाता करीब चार लाख हैं। दलित मतादाताओं की संख्या भी करीब डेढ़ लाख है। इस लिहाज से विपक्षी एकता (सपा, बसपा, रालोद और कांग्रेस के गठजोड़) के सियासी समीकरण और इन वोटरों के ध्रुवीकरण से पहले ही इस बात के संकेत मिल चुके थे कि कैराना से संसद पहुंचना मृगांका सिंह के लिए आसान नहीं होगा।

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