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योगी आदित्यनाथ: जानिए एक मैथ्स ग्रेजुएट से संन्यासी बनने तक की पूरी कहानी

योगी आदित्यनाथ 12वीं लोकसभा में सबसे कम उम्र के सांसद थे। उस समय उनकी उम्र महज 26 वर्ष थी।

योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का नया मुख्यमंत्री चुन लिया गया है।

योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का नया मुख्यमंत्री चुन लिया गया है। 19 मार्च को उनका शपथ ग्रहण समारोह है। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद हैं। वहां कहा जाता है कि चुनाव जीतने के लिए योगी आदित्यनाथ को बीजेपी के भी सपोर्ट की जरूरत नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि योगी को बीजेपी की नहीं बल्कि बीजेपी को योगी की जरूरत है। योगी को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ के नाम से भी जाना जाता है। योगी का असल नाम अजय सिंह बिष्ट है। उनके अधिकांश भाषण उत्तेजक होते हैं और उनके विरोधी उन पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हैं।

योगी का जन्म गड़वाल जिले में पांच जून 1972 को हुआ था। उत्तराखंड में जन्मे वह यूपी के चौथे सीएम हैं। इससे पहले जीबी पंत, एचएन बहुगुणा और एनडी तिवारी का जन्म वहां हुआ था। योगी 12वीं लोकसभा में सबसे कम उम्र के सांसद थे। उस समय उनकी उम्र महज 26 वर्ष थी। इसके बाद वह गोरखपुर से 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लोकसभा सांसद बने। 2014 में जब योगी ने सांसद का चुनाव लड़ा तो उन्होंने अपने पिता के नाम वाले कॉलम में महंत अविद्यनाथ का नाम लिखा था।

ऐसे पहुंचे राजनीति में: योगी के पुराने दिनों के बारे में ज्यादा किसी को नहीं पता। बस जो जानकारी है वह यही है कि योगी ने मैथ्स में BSc की डिग्री ली हुई है। उन्होंने 21 साल की उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया था और फिर वह महंत अविद्यनाथ के साथ हो लिए। वह गोरखनाथ मंदिर के प्रमुख संत थे। उसके बाद योगी पूर्ण रूप से सन्यासी हो गए। पांच साल के अंदर ही वह अपने गुरु के सबसे पसंदीदा शिष्य बन गए थे। अविद्यनाथ के बाद योगी मंदिर के प्रमुख संत बने। अब मंदिर के साथ-साथ उनकी तरफ से स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल भी संचालित किए जा रहे हैं।

योगी ने 1996 में राजनीति शुरू की थी। तब वह महंत अविद्यनाथ के लिए चुनाव प्रचार में लगे थे। 1998 में अविद्यनाथ राजनीति से रिटायर हो गए। उन्होंने ही योगी को अपनी तरफ से आगे बढ़ाकर अगले लोकसभा चुनाव के लिए खड़ा किया।

योगी ने दक्षिणपंथी संगठन हिन्दू युवा वाहिनी का 2002 में गठन किया। योगी 2015 में असहिष्णुता को लेकर छिड़ी बहस के दौरान बालीवुड अभिनेता शाहरूख खान की तुलना पाकिस्तानी आतंकवादी हाफिज सईद से कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग सूर्य नमस्कार नहीं कर सकते, उन्हें हिन्दुस्तान छोड़ देना चाहिए। गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ के समर्थक अपने वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं लगाते। उनके पीछे सिर्फ योगी सेवक लिखा होता है। यह काफी वक्त से चल रहा है।

संसद में रोने वाला किस्सा: योगी 2007 में संसद में फूट-फूटकर रोए थे। गोरखपुर में उनकी गिरफ्तारी वाली घटना का जिक्र करते हुए योगी ने उसको अपने खिलाफ राजनीतिक साजिश करार किया था। योगी ने अपने जान को खतरा होने की भी बात कही थी। तब उनको निषेधाज्ञा के आदेश का उल्लंघन करने के लिए 11 दिन हिरासत में रखा गया था।

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