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उत्तर प्रदेश चुनाव: सपा को महंगा पड़ सकता है ऐन वक्त पर टिकट काटना

वर्ष 1996 में सदर विधानसभा सीट से सपा की साइकिल पर सवार होकर हाजी अफजाल अहमद ने चुनाव लड़ा था और जीतने के बाद विधानसभा पहुंचे थे।

Author जौनपुर | February 28, 2017 5:12 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। (पीटीआई फाइल फोटो)

इफ्तेखार हुसैनी आरिफ 

केराकत सुरक्षित विधानसभा सीट से निवर्तमान विधायक गुलाब सरोज का टिकट काटकर संजय सरोज को दिए जाने से जहां कार्यकर्ताओं ने गुस्से का इजहार किया है तो वहीं केराकत विधानसभा प्रभारी सहित कई कार्यकर्ताओं ने अपना इस्तीफा पार्टी जिलाध्यक्ष को भेज दिया है। जिससे 2017 के विधानसभा चुनाव में काफी असर पड़ सकता है।  इतिहास की अगर बात की जाए तो समाजवादी पार्टी ने जब भी अपने निवर्तमान विधायक का टिकट काटकर किसी अन्य को दिया तो उसका खमियाजा उसे अपनी सीट गंवाकर करना पड़ा है। वर्ष 1996 में सदर विधानसभा सीट से सपा की साइकिल पर सवार होकर हाजी अफजाल अहमद ने चुनाव लड़ा था और जीतने के बाद विधानसभा पहुंचे थे। पर 2002 के विधानसभा चुनाव में पार्टी में गुटबाजी के कारण आला कमान ने उनका टिकट काटकर जावेद अंसारी को टिकट दे दिया जिसका नुकसान आखिरकार पार्टी को सीट गंवाने के रूप में हुआ। इस सीट पर पहली बार भाजपा का कमल खिला और सुरेंद्र प्रताप सिंह विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे।

2007 में मड़ियाहूं विधानसभा सीट पर पार्टी आलाकमान ने निवर्तमान विधायक श्रद्धा यादव का टिकट काटकर कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव का पुत्र लकी यादव को अपना प्रत्याशी बनाया तो श्रद्धा यादव ने बगावत कर निर्दलीय ही मड़ियाहूं से चुनाव मैदान में उतर गई यहां भी पार्टी को इसका खमियाजा भुगतना पड़ा और बसपा के केके सचान मात्र कुछ वोटों से श्रद्धा यादव को हराकर विधानसभा पहुंचे।  इस बार भी समाजवादी पार्टी ने जिस तरह से कलेक्ट्रेट कमर्चारी रह चुके निवर्तमान विधायक गुलाब सरोज का टिकट काटकर संजय सरोज को अचानक टिकट देने की घोषणा की है उससे पूरे विधानसभा क्षेत्र में हड़कम्प मचा हुआ है। लोगों में इस बात की चर्चा है कि कहीं पार्टी की अंतकर्लह के कारण इस सीट पर भी पुराना इतिहास दोहरा न जाए और सपा को यह सीट गंवाकर इसका खमियाजा भुगतना पड़े।

 

 

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