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उत्तर प्रदेश चुनाव: मुख्य दलों के लिए बस्ती मंडल बना ‘बागियों की बस्ती’

विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार भितरघातियों से खासे परेशान हैं।

Author बस्ती | February 20, 2017 4:46 AM
कांग्रेस और भाजपा।

विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार भितरघातियों से खासे परेशान हैं। बीते विधानसभा चुनाव में खाता खोलने में नाकाम भाजपा ने इस बार कामयाबी पाने के लिए सभी सीटों पर पार्टी के दावेदार नेताओं की अनदेखी कर दी। पार्टी ने बाहरी उम्मीदवारों पर दांव लगाया तो इससे असंतोष भड़क उठा। स्थानीय नेताओं की नाराजगी के बाद आलाकमान ने उम्मीदवारों को बदलने की बजाए उन्हें मनाने की कोशिश शुरू की। पार्टी के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर यहां आए पर इससे स्थानीय नेता और बिदक गए गए। इसका खामियाजा अब उम्मीदवारों को भुगतना पड़ रहा है।

भाजपा में भितरघात का सबसे दिलचस्प नजारा बस्ती विधानसभा सीट पर नजर आ रहा है। यहां टिकट वितरण से खफा नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राकेश श्रीवास्तव को चुनाव मैदान में उतार दिया है। इससे पार्टी के उम्मीदवार दयाराम चौधरी संकट में पड़ गए हैं। गौरतलब है कि इस सीट पर पार्टी के एक दर्जन से ज्यादा नेता टिकट के दावेदार थे। इसी तरह कप्तानगंज सीट के पार्टी उम्मीदवार चंद्र प्रकाश शुक्ल को बाहरी होने का दंश झेलना पड़ रहा है। नतीजतन, पार्टी नेताओं ने अपने को चुनाव प्रचार से दूर कर रखा है। शुक्ल को पार्टी सांसद हरीश द्विवेदी की अकड़ का भी शिकार होना पड़ रहा है। बीते महीने बस्ती और इलाहाबाद के बीच शुरू हुई नई ट्रेन संगम मनोहर एक्सप्रेस का बभनान में ठहराव न दिए जाने से खफा बभनान मंडल के भाजपा पदाधिकारियों ने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार का प्रचार शुरू कर दिया। हर्रैया सीट से पार्टी उम्मीदवार अजय सिंह को पार्टी नेता और कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे हैं और वह चुनाव में कोई भी गुल खिला सकते हैं। बस्ती के बाद हर्रैया सीट पर ही पार्टी टिकट के सबसे ज्यादा दावेदार थे और इन दोनों सीटों पर पार्टी की जीत पक्की मानी जा रही थी।

रुधौली सीट पर पिछली बार कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीते संजय जायसवाल को चुनाव मैदान में उतारने से पार्टी नेता और कार्यकर्ता नेतृत्व को सबक सिखाने में खुलेआम लगे हैं। इससे पार्टी अनुशासन की मर्यादा तार-तार हो रही है। जिले की एकमात्र महादेवा सुरक्षित सीट पर भाजपा उम्मीदवार रवि शंकर को भी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे हैं। दलित पार्टी नेताओं ने सोनकर के खिलाफ जहां मुहिम छेड़ रखी है वहीं पार्टी नेता गोवर्धन पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं।
कमोवेश यही हालत कांग्रेस पार्टी की भी है। पार्टी को कप्तानगंज और रुधौली सीटें समझौते के तहत मिली हैं पर इनमें से कप्तानगंज सीट पर समाजवादी पार्टी से टिकट की लाइन में लगे कृष्ण किंकर सिंह और रुदौली सीट से बसपा की टिकट की लाइन में लगे सईद अहमद को चुनाव मैदान में उतार देने से कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता खुलेआम बगावत पर आमादा हैं।

 

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