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UP चुनाव 2017: वाराणसी के इस गांव में खुले में शौच जाती हैं महिलाएं, लोगों को आस- कौन देगा टॉयलेट और गैस

UP Chunav 2017: गांव के पास ही सरकार ने वाराणसी के गंदगी को साफ करने के लिए एक कचरे के ढेर की स्थापना की है

Author March 1, 2017 10:12 AM
नम देवी हर सुबह 5.30 बजे निकलती हैं ताकी वह खुले में जाकर शौच कर सकें। (Express Photo by Sheela Bhatt)

उत्तर प्रदेश का एक उल्लेखनीय पहलू यह है कि 21वीं सदी में भी यहां के हजारों गावों में बिना प्लास्टर और पेंट के घर मिल जाते हैं। गांव प्रधान और चुनिंदा सवर्ण-जाति वाले परिवारों के अलावा लाखों परिवारों के मकान सिर्फ मिट्टी जैसी ईंटों से बने हैं। इसी से आप यहां के विकास और समृद्धि का अंदाजा लगा सकते हैं। इसी प्रकार का एक घर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के करसदा गांव में भी मिला। यहां एक बच्चे की मां पूनम देवी रहती हैं। वह मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाती हैं और धूल व कार्बन डाइआक्साइड से जूझती है। उनके गांव के पास ही सरकार ने वाराणसी के गंदगी को साफ करने के लिए एक कचरे के ढेर की स्थापना की है और यह एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना है।

पूनम देवी हर सुबह 5.30 बजे निकलती हैं ताकी वह खुले में जाकर शौच कर सकें। उन्होंने बताया कि उनकी तरफ के करीब 250 पुरुष और महिलाएं खुले में शौच करते हैं। कई बार तो ऐसा भी होता है कि वह और उनकी पड़ोसन दिन के उजाले में खेत जाती हैं। वह कुएं के पानी का इस्तेमाल करती हैं। सदियों से, गांव में उनके वाले हिस्से में घरों में पाइपलाइन से पानी नहीं आया है। उनकी रसोई में बिजली नहीं है क्योंकि पति इतना खर्च नहीं उठा सकते। पति अपनी दो बहनों की शादी के लिए पैसा इक्ट्ठा कर रहे हैं।

यह सब करसदा गांव की हालत है, जो वाराणसी के जिला मुख्यालय से मात्र 30 मिनट की दूरी पर स्थित है। जब इंडियन एक्सप्रेस ने उनसे पूछा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की योजना के तहत उज्जवला गैस किट क्यों नहीं ली तो उन्होंने बताया कि गांव के स्थानीय अधिकारी यह फैसला करते हैं कि किसे मिलनी चाहिए किसे नहीं। कॉलेज में दो साल तक पढ़ाई करने वाली पूनम समेत पूरे गांव को राज्य और केंद्र सरकार की स्कीमों की जानकारी तो होती है, लेकिन इसका फायदा उन तक पहुंचता नहीं है।

जैसे-जैसे विधानसभा और लोकसभा चुनाव खत्म होते हैं, नेताओं को पता लग जाता है कि कि उन्हें किसने वोट दिया और किसने नहीं। गावों वालों के मुताबिक, सिर्फ उन्हीं को सरकारी स्कीम का लाभ मिलता है जिन्होंने जीतने वाले उम्मीदवार को वोट दिए थे। सिर्फ यहीं नहीं, राज्य के कई इलाकों में इस तरह के आरोप लगाए गए हैं और लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां इस तरह के काम में शामिल रही हैं। कुछ ऐसा ही राज्य सरकार की लेपटॉप स्कीम समेत, केंद्र की उज्जवला स्कीम और कई अन्य योजनाओं में देखने को मिला है। सिर्फ दो तरह के लोगों को लाभ दिया जाता है- एक वो जिनके वोट से जीत हुई, और एक वो जिनके वोट अगले चुनाव में चाहिए।

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