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Election Results 2017

यूपी चुनाव नतीजे 2017: ये हैं यूपी के ”अमित शाह”, की थी तीन कमजोरियों की पहचान, भाजपा को जिताने के लिए लगा दी जान

सुनील बंसल अमित शाह के चुनाव प्रबंधन से जुड़ी बातों को अपनी डायरी में दर्ज करते रहते हैं। 

सुनील बंसल बीजेपी के संगठन सचिव (उत्तर प्रदेश) हैं। वो इससे पहले एबीवीपी से जुड़े थे। ( तस्वीर- सुनील बंसल के फेसबुक पेज से)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आज साफ हो जाएंगे। लेकिन शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलता दिख रहा है। इस कामयाबी में यूपी के ”अमित शाह” का भी काफी योगदान है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा के लिए जी जान लगाई है वहीं इस कामयाबी में यूपी के ”अमित शाह” का भी काफी रोल है। चुनाव आयोग के मुताबिक, बीजेपी 274 सीटों पर आगे चल रही है। हम जिस शख्स की बात कर रहे हैं उनका नाम सुनील बंसल है। उन्हें चुनावी रणनीति में महारत की वजह से यूपी का “अमित शाह” कहा जाने लगा है।

पिछले साल जब पीएम मोदी की वाराणसी में सभा के दौरान सार्वजनिक रूप से लंच करने की तस्वीर वायरल हुई तो कम ही लोगों का ध्यान तस्वीर में मौजूद बंसल पर गया। लेकिन उस तस्वीर में पीएम मोदी से उनकी करीबी पार्टी में उनके प्रभाव का सच्चा प्रतिबिंब थी। बंसल भाजपा के संगठन सचिव (यूपी) बनाए जाने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पदाधिकारी थे। साल 2014 के लोक सभा चुनाव के दौरान यूपी में बंसल अमित शाह के नेतृत्व वाली टीम का हिस्सा थे। बंसल ने एनडीटीवी को बताया कि उन्होंने अमित शाह की चुनाव प्रबंधन से जुड़ी बातों को अपनी डायरी में दर्ज करते रहते हैं। बंसल के अनुसार जब उन्होंने यूपी में पार्टी का प्रचार शुरू किया तो उन्हें तीन कमजोरियों की पहचान की। बंसल के अनुसार पार्टी की पहली कमजोरी थी कि उसकी गरीब ग्रामीणों तक पहुंच नहीं थी। बंसल ने दिशा में काफी काम करने का दावा किया। पार्टी की दूसरी कमजोरी थी कि यूपी के सभी 1.40 लाख मतदान केंद्रों (बूथ) पर पार्टी की पहुंच नहीं थी। बंसल ने दावा किया था कि उन्होंने प्रदेश के हर बूथ पर पार्टी के 10-12 कार्यकर्ता नियुक्त किए। इसके साथ ही लखनऊ स्थित कॉल सेंटर से पूरे प्रदेश की मॉनिटरिंग की जाती थी।

Sunil Bansal, PM Narendra Modi, Keshav Prasad Maurya सुनील बंसल (भूरे जैकेट में) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के संग लंच करते हुए। (तस्वीर-पीटीआई)

बंसल ने बताया था कि पार्टी की तीसरी कमजोरी थी भाजपा के अगड़ी जातियों की पार्टी होने की छवि। बंसल ने दावा किया था कि उन्होंने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल की। उन्होंने एनडीटीवी से कहा था कि उनके आने से पहले यूपी में 10 प्रतिशत कार्यकर्ता पिछड़ा और अनुसूचित वर्ग के थे लेकिन अब ये आंकड़ा 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

दूसरी पार्टियों के नेताओं को चुनाव से पहले शामिल कराकर टिकट देने पर बंसल ने कहा था कि ये एक रणनीति के तहत किया गया था। बंसल ने बताया था कि दूसरी पार्टी से आए जिन 80 नेताओं को भाजपा ने टिकट दिया है उनमें से 67 ऐसे हैं जहां पार्टी को कभी जीत नहीं मिली है।

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ऐसा नहीं है कि बंसल केवल जमीनी राजनीति की निगरानी करते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी चुनाव पर फोकस बीजेपी की सोशल मीडिया टीम भी उन्हें ही रिपोर्ट करती रही। इस टीम में 10 से ज्यादा लोग काम करते थे। इन लोगों का काम यूपी बीजेपी के आधिकारिक फेसबुक और ट्विटर पेज चलाने के अलावा सोशल मीडिया पर पार्टी के खिलाफ जा सकने वाली चीजों पर भी नजर रखता था।

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