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उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव: हापुड़ सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला, कांग्रेस-बसपा में कड़ी टक्कर

भाजपा के विजयपाल आढ़ती भी देहात क्षेत्र के किसानों तथा दलितों में मजबूत पकड़ होने के कारण गजराज सिंह के देहात वोटों में सेंध लगा सकते हैं।

Author हापुड़ | Updated: February 1, 2017 6:47 PM
UP Assembly Polls 2017, Hapur Seat BSP, Hapur Seat Congress, Hapur Seat BJP, Gajraj Singh News, Gajraj Singh latest Newsभारतीय जनता पार्टी का झंडा।

उत्तरप्रदेश की हापुड़ विधानसभा सीट पर वर्तमान विधायक और उत्तरप्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष गजराज सिंह के लिए इस बार राह आसान नहीं है और उन्हें त्रिकोणीय मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस के गजराज सिंह वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के धर्मपाल सिंह को लगभग 22 हजार मतों से पराजित कर चौथी बार विधायक बने थे। इस बार उन्हें 11 फरवरी को होने वाले मतदान को अपने पक्ष में करने के लिए काफी मेहनत करनी होगी। भाजपा प्रत्याशी विजयपाल आढ़ती हापुड़ विधानसभा सीट से पहली बार किस्मत आजमा रहे हैं। हापुड़ मंडी में आलू की आढ़त चलाने वाले विजयपाल देहात क्षेत्र में खासी पकड़ रखते हैं।

परंपरागत दलित वोटों के बल पर चुनावी मैदान में उतरे बहुजन समाज पार्टी के श्रीपाल सिंह ने भी राजनीति में नया होने के बावजूद आम जनता में पैठ मजबूत की है। त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी हापुड़ विधानसभा सुरक्षित सीट पर इस बार मुकाबला भाजपा, बसपा तथा कांग्रेस के बीच है। सपा से कांग्रेस के गठबंधन के बाद हालांकि गजराज सिंह की स्थिति काफी दृढ़ मानी जा रही थी लेकिन सपा कार्यकर्ताओं की चुनावी प्रचार प्रसार से बेरूखी तथा कांग्रेस के विरोध में पड़ने वाले सपा के मुस्लिम वोटों का झुकाव बसपा की ओर होने तथा सवर्ण मतों का झुकाव भाजपा की ओर होने के कारण गजराज सिंह की राह मुश्किल दिखलाई पड़ रही है।

भाजपा के विजयपाल आढ़ती भी देहात क्षेत्र के किसानों तथा दलितों में मजबूत पकड़ होने के कारण गजराज सिंह के देहात वोटों में सेंध लगा सकते हैं। अपनी व्यावहारिक शैली के कारण आम जनता में तेजी के साथ अपनी पहचान बनाने वाले बसपा प्रत्याशी श्रीपाल को नगरीय क्षेत्र में मजबूत माना जा रहा है। वह देहात क्षेत्र से भी वोट बटोर कर गजराज सिंह तथा विजयपाल आढ़ती के समक्ष चुनौती खड़ी कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो सपा-कांग्रेस गठबंधन से भी कांग्रेस को नफा कम नुकसान ज्यादा होगा क्योंकि सपा के पास यहां मजबूत वोट बैंक नहीं है। इस बार जाट समुदाय के वोट भी रालोद प्रत्याशी की ओर जा सकते हैं।

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