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उत्तर प्रदेश चुनाव: बाहुबलियों के बच्चे लिखेंगे नई इबारत

उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में पैठ बना चुके बाहुबलियों में से अधिकांश इस बार भी धमक दिखा रहे हैं।

Author नई दिल्ली | February 20, 2017 4:28 AM
उत्‍तर प्रदेश में पहले चरण के तहत 73 सीटों पर मतदान हो चुका है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों में पैठ बना चुके बाहुबलियों में से अधिकांश इस बार भी धमक दिखा रहे हैं। कई बाहुबलियों ने अपनी राजनीतिक विरासत अगली पीढ़ी को सौंपनी शुरू की है। दोनों ही तरह के उम्मीदवारों की जीत के दावे-प्रतिदावे किए जा रहे हैं। बाहुबलियों की नई पीढ़ी वाले उम्मीदवार अपने इलाकों में युवा मतदाताओं को भी साधने में जुट गए हैं। उनके पिता की छवि का जो लाभ मिलना है, वह तो उनका सुरक्षित बैंक माना जा रहा है।  पहले ऐसे ही उम्मीदवारों की बात। बाहुबल से राजनीति संग कदमताल करने वाले कम से कम पांच ऐसे नेता हैं, जिन्होंने इस बार के विधानसभा चुनाव में अपनी अगली पीढ़ी को लगाम सौंपी है। ऐसे उम्मीदवारों में सबसे कम उम्र के 25 वर्षीय शशांक शेखर सिंह उर्फ सन्नी हैं, जो सपा के एमएलसी रहे अजीत सिंह के बेटे हैं। अजीत सिंह की सिंतबर 2004 में लखनऊ-उन्नाव हाईवे पर हत्या कर दी गई थी। 2004 के पहले अजीत सिंह भाजपा के एमएलसी होते थे। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले थे। वे उन्नाव की भगवंतनगर विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी हैं और विरासत के दाग धोने की कोशिश में हैं। दून स्कूल से पढ़े सन्नी के पास लखनऊ की एमिटी यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री है। वे कई कारोबार के मालिक हैं। वे कहते हैं, ‘मैं यहां से जीतकर लोगों को बुनियादी सुविधाएं दूंगा।’

इसी तरह रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं 29 साल की अदिति सिंह। उनके पिता अखिलेश सिंह यहां से पांच बार के विधायक रहे हैं। तीन बार कांग्रेस और एक-एक बार पीस पार्टी एवं बतौर निर्दलीय। उनके खिलाफ आठ आपराधिक मामले हैं। उनका नाम एमएलसी अजीत सिंह की हत्या से जोड़ा गया था। हालांकि, यह केस रफा-दफा हो गया। अदिति ने मसूरी के प्रतिष्ठित स्कूल से पढ़ाई की है और अमेरिका से एमबीए कर लौटी हैं। लौटने के बाद उन्होंने अपने पिता के विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक कार्य शुरू किए। वे कहती हैं, राजनीति में युवा और शिक्षित लोगों के आने से समूची प्रणाली का स्तर ऊंचा उठेगा। गोंडा से भाजपा के टिकट पर लड़ रहे 27 साल के प्रतीक भूषण सिंह के पिता बृज भूषण शरण सिंह को गोंडा, बलरामपुर और बहराइच का बाहुबली माना जाता है। वे कैसरगंज क्षेत्र से भाजपा के सांसद हैं। प्रतीक दावा करते हैं कि उनके पिता ने हमेशा आम लोगों के हित में काम किया है और मीडिया ने हमेशा उनकी छवि खराब की है। प्रतीक आरएसएस के सदस्य रहे हैं। दिल्ली और लखनऊ में पढ़ाई करने के बाद उन्होंने आॅस्ट्रेलिया से प्रबंधन में डिप्लोमा किया हुआ है।

28 साल के अब्बास अंसारी बाहुबली-राजनीतिक मुख्तार अंसारी के पुत्र हैं। घोसी विधानसभा सीट से लड़ रहे हैं। उनके पिता और उनके चाचा सिबगातुल्ला अंसारी भी बसपा के टिकट पर मऊ सदर और मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से मैदान में हैं। मुख्तार के खिलाफ 15 आपराधिक मामले हैं। नवंबर 2005 में भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में भी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अपराध की दुनिया शार्प शूटर कहे जाने वाले मुख्तार के बेटे खेल में यह हुनर हासिल कर चुके हैं। वे दो बार निशानेबाजी में राष्ट्रीय चैंपियन रह चुके हैं और अब राजनीति में भाग्य आजमा रहे हैं।मुठभेड़ में मारे गए डकैत सरगना शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ के बेटे 37 साल के वीर सिंह को सपा ने कर्बी(चित्रकूट) सीट से टिकट दिया है। वे यहीं से मौजूदा विधायक हैं। ददुआ के खिलाफ 180 से ज्यादा आपराधिक मामले थे। 2007 में उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने ददुआ को मार गिराया था। वीर सिंह कहते हैं, मैं अपने पिता के सपने पूरे करने के लिए यहां से चुनाव लड़ रहा हूं।

 

 

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