ताज़ा खबर
 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: छावनी क्षेत्र की छह सीटों पर रहा है भाजपा का दबदबा, लेकिन इस बार सपा-बसपा से कड़ी टक्कर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: 2012 के विधानसभा चुनाव हुए तो भाजपा का गढ समझी जाने वाली लखनऊ छावनी सीट कांग्रेस की झोली में चली गयी।

Author लखनऊ | March 3, 2017 4:57 PM
एक चुनावी रैली को संबोधित करतीं बसपा सुप्रीमो मायावती। (पीटीआई फोटो)

उत्तर प्रदेश के छावनी क्षेत्रों में स्थित छह विधानसभा सीटों पर इस बार दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद है। देश के छावनी क्षेत्रों में कुल 13 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से छह उत्तर प्रदेश में हैं और राजनीतिक दल इन सीटों पर जीत दर्ज करने को बेताब हैं। राजधानी लखनऊ के अलावा उत्तर प्रदेश के पांच अन्य जिलों में छावनी क्षेत्र की विधानसभा सीटें हैं। ये मेरठ, कानपुर, आगरा, बरेली और वाराणसी हैं। अगर 1991 से अब तक के चुनावी नतीजों की बात करें तो छावनी क्षेत्रों में भाजपा को लेकर मतदाताओं में ज्यादा उत्साह रहता है, लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से भाजपा को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। मायावती की पार्टी ने आगरा और बरेली छावनी क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। शेष छावनी क्षेत्रों की विधानसभा सीटों पर भाजपा काबिज हुई। सीमांकन के बाद जब 2012 के विधानसभा चुनाव हुए तो भाजपा का गढ समझी जाने वाली लखनऊ छावनी सीट कांग्रेस की झोली में चली गयी। कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी ने तीन बार के विधायक भाजपा के सुरेश चंद्र तिवारी को शिकस्त दी थी।

आगरा छावनी सीट (अनुसूचित जाति) पर बसपा ने हैट्रिक लगायी जबकि बरेली छावनी में भाजपा पहली बार चुनाव जीती। मेरठ और वाराणसी छावनी क्षेत्रों में हालांकि भाजपा का दमदार प्रदर्शन जारी रहा और लगातार छठी बार उसने जीत दर्ज की जबकि कानपुर छावनी में वह पांचवी बार जीती। इस बार लखनऊ छावनी सीट काफी चर्चा में है, जहां से सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव सपा की उम्मीदवार हैं जबकि वर्तमान विधायक रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस का दामन छोड़ इस बार यहां से भाजपा के टिकट पर प्रत्याशी हैं। वाराणसी छावनी विधानसभा सीट पर आठ मार्च को मतदान होना है। वर्तमान विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव के बेटे सौरभ श्रीवास्तव भाजपा के टिकट पर प्रत्याशी हैं। उनका मुकाबला भाकपा के अजय मुखर्जी, कांग्रेस के अनिल श्रीवास्तव और बसपा के रिजवान अहमद से है। बीस अन्य उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं।

छावनी क्षेत्र की अन्य विधानसभा सीटों की बात करें तो उत्तराखंड में देहरादून छावनी, पंजाब में जालंधर छावनी, आंध्र प्रदेश में सिकंदराबाद छावनी (अनुसूचित जाति), हरियाणा में अंबाला छावनी, मध्य प्रदेश में जबलपुर छावनी, महाराष्ट्र में पुणे छावनी तथा दिल्ली छावनी हैं। सेना की मध्य कमान का मुख्यालय लखनऊ में 1862 में बना था। मेरठ छावनी को 1803 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने बसाया था। आजादी की पहली लड़ाई 1857 में मेरठ छावनी के काली पलटन से शुरू हुई थी औरे वहां तैनात भारतीय सैनिकों ने बगावत की थी। आगरा छावनी 1805 में बसी थी जबकि बरेली, कानपुर और वाराणसी छावनियां 1811 में बसायी गईं।

उत्तर प्रदेश चुनाव 2017: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने रायबरेली में किए पीएम मोदी पर हमले

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App