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बेनतीजा बैठकों से टूट की कगार पर समाजवादी पार्टी

मुलायम सिंह यादव किसी भी हाल में अखिलेश यादव की उन शर्तों को मानने को तैयार नहीं जिसमें बाहरी अंकल का पार्टी से निष्कासन भी शामिल है।

Samajwadi Party Split, Samajwadi Party Row, Samajwadi Party Crisis, Mulayam Akhilesh MeetSP UP Election Candidates List: अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव। (फाइल फोटो)

चार महीनों से समाजवादी पार्टी में लगातार चल रहे अन्तरद्वंद्व और उसे दूर करने के लिए हुई सैकड़ों बैठकें बेनतीजा रहीं। इन बेनतीजा बैठकों ने समाजवादी पार्टी को इस कदर उलझा कर रख दिया कि अब वो टूट की कगार पर है। मुलायम सिंह यादव पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल का अधिकार जताने चुनाव आयोग तक पहुंच चुके हैं। जबकि प्रो. राम गोपाल यादव असली समाजवादी पार्टी का अधिकार जताने चुनाव आयोग पहुंच कर लौट चुके हैं। दिल्ली से लौटने के बाद मुलायम-अखिलेश की तीन घंटे की मैराथन बैठक एक मर्तबा फिर बेनतीजा है और साइकिल चुनाव चिन्ह की पार्टी दो फाड़ होने के मुहाने पर। उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी अपने गठन के पच्चीसवें बरस की जवानी में टूटने की कगार पर पहुंच चुकी है।

मुलायम सिंह यादव किसी भी हाल में अखिलेश यादव की उन शर्तों को मानने को तैयार नहीं जिसमें बाहरी अंकल का पार्टी से निष्कासन भी शामिल है। समाजवादी पार्टी के उच्च पदस्त सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को हुई पिता-पुत्र की तीन घंटे चली लम्बी बैठक में अखिलेश यादव अपना पार्टी अध्यक्ष का खिताब उतारने को तैयार हो गये थे। लेकिन मुलायम सिंह यादव अमर सिंह को समाजवादी पार्टी से निकालने और शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने को किसी भी हाल में तैयार नहीं हुए। दोनों तरफ से एक दूसरे को समघने की पुरजोर कोशिशें हुर्इं लेकिन दिल्ली से दो घंटे बाद मुलायम सिंह यादव के आवास पर शिवपाल यादव के पहुंचते ही बैठक बेनतीजा खत्म हो गई।

उधर समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य और मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव के बेहद करीबी मो. आजम खां ने अब तक पिता-पुत्र के बीच सुलह की उम्मीद नहीं छोड़ी है। वे इस उम्मीद को आकार देने के लिए दिल्ली पहुंचे थे लेकिन उनकी मुलायम सिंह यादव से इस बाबत कोई मुलाकात होती, उसके पहले ही नेताजी लखनऊ के लिए उड़ चले। समाजवादी पार्टी को टूटने से बचाने की जीतोड़ कोशिश में जुटे आजम खां ने अखिलेश और राम गोपाल यादव की पार्टी से बर्खास्तगी पर मुलायम सिंह यादव से सुलह की कोशिशें की थीं। जिसमें वे पूरी तरह कामयाब भी हुए और दोनों का सपा से निष्कासन वापस कर लिया गया। समाजवादी पार्टी के उच्च पदस्त सूत्र बताते हैं कि अखिलेश की बर्खास्तगी वापस कराने के लिए मो. आजम खां ने मुलायम सिंह यादव से कहा, मेरे पास कई लोग आये और उन्होंने मुझसे कहा कि पिता यदि अपने बेटे की बात नहीं सुनेगा तो किसकी बात सुनेगा।

आजम खां के इस वक्तव्य का जवाब मुलायम सिंह यादव ने जिस अंदाज में दिया, उससे उनके तेवर का इल्म हो जाता है। आजम खां के इस जवाब पर नेताजी बोले, मेरे पास भी सैकड़ों लोग आये थे। उन्होंने मुझसे दूसरी बात कही। उन्होंने कहा कि यदि बेटा अपने पिता की बात नहीं मानेंगा तो भला किसकी बात मानेंगा। मुलायम सिंह यादव का यह वो जवाब है जिसकी तासीर बेहद तीखी है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में दो फाड़ अब तय माने जा रहे हैं। चुनाव आयोग की दहलीज तक पहुंच चुके परिवार के इस विवाद में हारेगा कौन और जीत किसकी होगी? इसका कोई खास महत्व नहीं। महत्व सिर्फ इस बात का है कि अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की दो विचारधारायें सियासत करेंगी। पहली विचारधारा थोड़ी बूढ़ी होगी और दूसरी जवान।

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