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उत्तर प्रदेश चुनाव: छठे-सातवें चरण के चुनाव प्रचार से दूर रहेंगी प्रियंका गांधी

चौथे-पांचवें चरण के चुनाव वाले इलाकों के लिए उन्होंने रायबरेली में एक जनसभा को संबोधित किया था।

Author नई दिल्ली | March 1, 2017 1:23 AM
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ( File Photo)

कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में शुमार प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार नहीं करेंगी। चौथे-पांचवें चरण के चुनाव वाले इलाकों के लिए उन्होंने रायबरेली में एक जनसभा को संबोधित किया था। आगे छठे-सातवें चरण के चुनाव वाले इलाकों के लिए वे प्रचार में नहीं निकलेंगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को कहा कि प्रियंका अब और जनसभाएं नहीं करेंगी क्योंकि उनके पास समय की कमी है। हालांकि, बताया जा रहा है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश (जहां छठे-सातवें चरण में चुनाव होने हैं) की विधानसभा के लिए उनकी जनसभाओं की मांग ही नहीं आई। अधिकांश सीटें समाजवादी पार्टी के पास हैं और सपा के उम्मीदवार अखिलेश यादव, डिंपल यादव और लालू प्रसाद की जनसभाओं की मांग ज्यादा कर रहे हैं।

प्रियंका गांधी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को अस्तित्व में लाने में अहम भूमिका निभाई थी। गठबंधन में जो सीटें कांग्रेस को मिलीं, वहां से उम्मीदवारों ने प्रियंका गांधी की जनसभाओं की मांग अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेजी। मांग के आधार पर प्रियंका गांधी के नाम को 40 स्टार प्रचारकों की सूची में शुमार किया गया। लेकिन रायबरेली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ उनकी साझा जनसभा के बाद बाकी जगह उनका कार्यक्रम नहीं बनाया गया। यहां तक कि अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल के साथ उनकी साझा जनसभाएं कई जगह होनी थीं, लेकिन यह तैयारी भी परवान नहीं चढ़ पाई। एआइसीसी के एक महासचिव के अनुसार, गठबंधन के बावजूद दोनों पार्टियों के कई उम्मीदवारों ने अपनी सीट छोड़ने से मना कर दिया। कम से कम 26 सीटों पर कांग्रेस और सपा के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। मामला ठंडा करने के लिए दोनों पार्टियों ने दोस्ताना मुकाबले का फार्मूला दिया। लेकिन कार्यकर्ताओं के स्तर पर तालमेल नहीं बन पाने और बगावत की स्थिति के मद्देनजर कांग्रेस और सपा- दोनों ही पार्टियों के शीर्ष नेताओं को कदम पीछे खींचने पड़े।
रायबरेली में जनसभा करने के बावजूद प्रियंका गांधी ने अमेठी में कदम नहीं रखे। अमेठी की सीट पर ही तितरफा खींचतान है। एक तो अमेठी के नेता और उत्तर प्रदेश चुनाव अभियान समिति के प्रभारी संजय सिंह की पूर्व पत्नी गरिमा सिंह (भाजपा) और मौजूदा पत्नी अमिता सिंह (कांग्रेस) आमने-सामने हैं। सपा ने यहां से राज्य के निवर्तमान मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को खड़ा कर दिया है। इन हालात में कांग्रेस और सपा- दोनों के ही नेताओं के लिए असमंजस की स्थिति रही। अमेठी से कांग्रेस के  स्थानीय नेता किशोरी लाल का तर्क है कि उत्तर प्रदेश में अभी प्रियंका गांधी को मुख्य तौर पर इस्तेमाल करने से पार्टी बचना चाहती हैं। कांग्रेस और सपा- दोनों ही पार्टियां अखिलेश और राहुल को सामने रखकर मैदान में हैं।

उधर, पूर्वांचल में सपा के उम्मीदवारों के बीच अखिलेश यादव और बिहार के नेता लालू प्रसाद की मांग ज्यादा है। पूर्वांचल में जटिल जातीय समीकरण बड़ी वजह है। बताया जा रहा है कि यहां के उम्मीदवार मानते हैं कि अखिलेश की जनसभा के बाद एसपी के वोट कांग्रेस के पाले में ट्रांसफर होने में मदद मिलेगी। अधिकांश सीटों पर अखिलेश के कार्यक्रमों की फरमाइश आ चुकी है। कांग्रेस प्रत्याशियों में राहुल-अखिलेश की संयुक्त रैली के साथ ही अखिलेश के सभा की मांग ज्यादा है। कांग्रेस के उम्मीदवारों में उत्तर प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद के मुकाबले राज बब्बर की ज्यादा मांग है। हर उम्मीदवार अपने यहां कम से कम एक रैली राज बब्बर की जरूर चाह रहा है। भीड़जुटाऊ नेता होने की वजह से प्रत्याशी राज बब्बर का कार्यक्रम मांग रहे हैं। बब्बर के अलावा नगमा की भी मांग है। पूर्वांचल में ठाकुर वोटों को अपने पाले में करने के लिए संजय सिंह के कार्यक्रमों की मांग है।

 

 

 

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