north india winning is necessary for victory for up - Jansatta
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यूपी की सियासी कमान के लिए पूर्वांचल फतह जरूरी

दशकों से समस्याओं से जूझ रहा उत्तर प्रदेश का पूर्वी कोना भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। यहां छठे चरण की 49 सीटों पर 4 मार्च को मतदान होना है।

Author लखनऊ | March 2, 2017 4:53 AM
प्रतीकात्म तस्वीर।

दशकों से समस्याओं से जूझ रहा उत्तर प्रदेश का पूर्वी कोना भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। यहां छठे चरण की 49 सीटों पर 4 मार्च को मतदान होना है। इनमें सिर्फ 7 सीटें 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत पाने में कामयाब हो सकी थी।  पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बात को बखूबी जानते हैं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो चरणों में होने वाला मतदान उन्हें उत्तर प्रदेश की ‘सल्तनत’ तक पहुंचाने की कुव्वत रखता है। इसलिए पार्टी आलाकमान ने प्रधानमंत्री मोदी की पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3, 4 व 5 मार्च को चुनावी सभाएं आयोजित की हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि 8 मार्च को प्रदेश के अंतिम चरण के मतदान के पहले प्रधानमंत्री का वाराणसी में एक दिवसीय प्रवास का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। फिलहाल उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक सांसदों ने इस वक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में डेरा डाल रखा है। उनके जिम्मे जनसंपर्क का काम दिया गया है। इस बीच कई केंद्रीय मंत्रियों के भी वाराणसी में प्रवास की बात कही जा रही है। इनमें देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह का नाम प्रमुख है। उनके साथ पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष अमित शाह भी वाराणसी में जमे हुए हैं।

सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी किले को भाजपा की ‘फतह’ में बदलने के लिए राष्टÑीय स्वयं सेवक संघ भी बेहद गोपनीय तरीके से पूर्वांचल के गांवों में लगातार संपर्क कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी का टिकट न मिलने पर असंतुष्ट नेताओं और उनके समर्थकों को समझाने का काम भी आरएसएस को दिया गया है। अब तक आरएसएस ने ऐसे दो दर्जन से अधिक असंतुष्ट टिकटार्थियों को समझाने में बहुत हद तक कामयाबी हासिल कर ली है।
उत्तर प्रदेश में 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में छठवें चरण की 49 में से 27 सीटें जीत कर समाजवादी पार्टी ने इस इलाके में बड़ी बढ़त हासिल की थी। इस बढ़त को इस विधानसभा चुनाव में भी कायम रखने के लिए सपा के राष्टÑीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने गठबंधन के साथी राहुल गांधी के साथ रोड शो कर रहे हैं। सपा के अलावा बसपा ने छठवें चरण की नौ सीटों पर कब्जा कर इस इलाके में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री रहते हुए अलग पूर्वांचल राज्य की मांग करने वाली बसपा की राष्टÑीय अध्यक्ष मायावती अपने इसी कार्ड को पुन: यहां खेलने की पूरी कोशिश में हैं। कांग्रेस के पास अभी यहां सिर्फ चार सीटें ही हैं। ऐसे में उसके पास पाने की संभावनाएं अधिक हैं।

भाजपा के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि पांच चरणों के चुनाव के बाद पूर्वांचल में होने जा रहे अंतिम दो चरणों के लिए पार्टी ने जन-जन से संवाद की अलग रणनीति तैयार की है। इस काम को अंजाम देने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी नेताओं को पूर्वी उत्तर प्रदेश में बुलाया गया है। बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए बृजेश पाठक लगातार पूर्वी उत्तर प्रदेश में सघन जनसम्पर्क अभियान में जुटे हैं। उनके अलावा सौ से अधिक नेताओं को पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में जनता के बीच जाकर केंद्र सरकार की उपलब्धियों और प्रदेश की सपा सरकार की नाकामियों से उन्हें अवगत कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि छठे चरण में पूरी ताकत झोंकने के बाद भाजपा अपने 7 विधायकों के पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़े में कुछ इजाफा कर पाने में कामयाब हो पाती है, अथवा नहीं।

 

 

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