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उत्तर प्रदेश विधानसभा: मोदी-अखिलेश-राहुल की रैलियों के बाद भी कानपुर में चुनावी सरगर्मी तेज़ नहीं

बहुजन समाज पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में कानपुर से एक भी सीट नहीं मिली थी।
Author कानपुर | February 9, 2017 22:10 pm
विजय शंखनाद रैली को संबोधित करते पीएम नरेंद्र मोदी। (PTI File Photo)

शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की दस विधानसभाओं में मतदान को केवल 10 दिन बचे हैं लेकिन शहर में अभी तक चुनावी सरगर्मी तेज होती नहीं दिख रही है जैसी पिछले चुनावों में दिखती थी। हालांकि, चुनाव की घोषणा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी रैलियां कर चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी के अनुसार इस सप्ताह आखिरी में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, मंत्री राजनाथ सिंह, उमा भारती सहित कई नेताओं के आने का कार्यक्रम हैं, इसके बाद शहर में चुनावी माहौल बनेगा। उन्होंने दावा किया कि उनके सभी प्रत्याशी चुनाव जीतेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों की जनता तारीफ कर रही है और प्रदेश की सपा बसपा सरकार से ऊब गयी है। वह कहते है कि अभी हमारा घर घर जाकर मतदाताओं से मिलने का कार्यक्रम चल रहा है और हमें अपार समर्थन मिल रहा है।

बहुजन समाज पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में शहर से एक भी सीट नहीं मिली थी लेकिन इस बार उसके नेता शहर की तो नहीं लेकिन ग्रामीण इलाके की सीटों के प्रति उम्मीद जता रहे है। इसलिये बसपा सुप्रीमो मायावती की चुनाव रैली आखिरी दिनों में शहर के ग्रामीण इलाकों में रखी गयी। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री ने कहा कि चार दिन पहले कांग्रेस आलाकमान को पत्र लिखकर प्रियंका गांधी और नवजोत सिंह सिद्धू समेत करीब एक दर्जन स्टार प्रचारकों का कार्यक्रम मांगा था लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। इसलिये हम जवाब का इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस को शहर की तीन विधानसभा सीटें किदवईनगर, गोविंदनगर और कैंट सीट मिली हैं जिन पर प्रत्याशी चुनाव प्रचार कर रहे है।

कांग्रेस के एक बड़े नेता मानते है कि सपा से गठबंधन की देरी का नुकसान होगा, क्योंकि आखिरी समय तक यहीं फैसला नहीं हो पाया था कि किस सीट से कौन प्रत्याशी लड़ेगा। इसलिये महाराजपुर सीट पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ पायी है और वहां से कांग्रेस के राजारामपाल और सपा की अरुणा कोरी दोनों गठबंधन होने के बावजूद आमने सामने है। कांग्रेस को उम्मीद है कि उसकी पुरानी सीट किदवईनगर उसे वापस मिलेगी, क्योंकि वहां से पिछले विधायक अजय कपूर ही मैदान में है। अजय का मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार महेश त्रिवेदी से है। बाकी दो अन्य सीटों से कांग्रेस की राह आसान नहीं दिखती है।

दूसरी ओर, जिला प्रशासन मतदान का प्रतिशत इस बार कैसे 70 प्रतिशत के पार पहुंचाया जाये, इसके लिये रोजाना चुनाव जागरुकता रैलियां और कार्यक्रम कर रहा है। इसमें अनेक स्वंयसेवी संगठन भी भाग ले रहे हैं। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य इस बार कानपुर में 70 प्रतिशत से अधिक मतदान कराने का है। इसलिये हम मतदाताओं को विभिन्न माध्यमों से जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।’ समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष फजल महमूद इस चुनाव में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि उन्होंने स्वयं शहर की आर्य नगर सीट से टिकट मांगा था लेकिन उन्हें टिकट न मिला। वह पांच फरवरी को शहर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रैली में ही सक्रिय दिखे थे।

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