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अखिलेश के लिए मुश्किलें न खड़ी कर दे मुलायम का बयान, BSP खिली बांछें

मुलायम सिंह ने सोमवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर अखिलेश यादव को मुसलिम विरोधी ठहरा कर नए विवाद को जन्म दे दिया है

Author लखनऊ | January 18, 2017 03:54 am
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर मुसलिम विरोधी होने का आरोप लगा कर मुलायम सिंह यादव ने उनके लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्टÑीय अध्यक्ष के बयान से उनकी धुर विरोधी बहुजन समाज पार्टी की बांछें खिल गई हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने की हर कोशिश में जुटी मायावती पहले ही 97 मुसलमानों को अपना उम्मीदवार बना कर सपा के पारंपरिक कहे जाने वाले इस वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश में हैं।

मुलायम सिंह ने सोमवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर अखिलेश यादव को मुसलिम विरोधी ठहरा कर नए विवाद को जन्म दे दिया है। राजनीति के महारथी माने जाने वाले मुलामय सिंह यादव ने सोमवार को कहा था कि मुसलमानों के प्रति अखिलेश यादव का रवैया नकारात्मक है। मैंने हमेशा मुसलमानों के हितों का ध्यान रखा। एक मुसलिम को उत्तर प्रदेश का पुलिस महानिदेशक बनाने का जब मैंने फैसला किया तो अखिलेश ने मुझसे 15 दिनों तक बात नहीं की थी। वे किसी मुसलिम को इस पद पर नहीं चाहते थे। इससे उनके मुसलिम विरोधी होने का संदेश गया। मुलायम सिंह के इस बयान ने पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पेशानी पर बल पैदा कर दिया है। जबकि समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ मुसलिम नेता, नेताजी के इस बयान से असहमति जता चुके हैं।
मुलायम के बयान पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता बुक्कल नवाब कहते हैं, अखिलेश यादव यह संदेश देने में कामयाब हो चुके हैं कि वे ही उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतों को रोक पाने में सक्षम हैं। यही वजह है कि वे कांग्रेस के अलावा राष्टÑीय लोकदल के साथ गठबंधन का मन बना चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुसलमान पहले भी अखिलेश यादव के साथ थे और अब भी वे मुख्यमंत्री के साथ ही खड़े हैं। ऐसा इस लिए है क्योंकि वे उत्तर प्रदेश का विकास होता देख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की 147 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुसलिम मतदाता हार जीत का अंतर तय करने की कुव्वत रखता है। इस सच से बसपा की राष्टÑीय अध्यक्ष मायावती बखूबी वाकिफ हैं। यही वजह है कि वे बीते दस बरसों से लगातार समाजवादी पार्टी के इस पारंपरिक वोट बैंक पर काबिज होने की लगातार कोशिश कर रही हैं। वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा ने 61 मुसलमानों को अपना उम्मीदवार बनाया था। जबकि 2012 में यह संख्या बढ़ कर 85 हो गई थी। इस बार के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 97 मुसलमानों को टिकट दिए हैं।मुलायम के बयान पर वरिष्ठ राजनीति विश्लेषक हरि जोशी कहते हैं, उत्तर प्रदेश का मुसलमान इस मर्तबा भ्रमित है। वह यह तय नहीं कर पा रहा है कि आखिर जाए तो किसके साथ जाए? इसीलिए इस बार का विधानसभा चुनाव अधिक दिलचस्प होगा क्योंकि इस बार मुसलमान उसी को वोट देगा जो उसकी विधानसभा सीट पर सांप्रदायिक ताकतों को रोकने का संदेश दे पाने में कामयाब होगा। यह इस बात का संकेत है कि इस बार प्रत्येक विधानसभा सीट पर मुसलमान किसी एक राजनीतिक दल को वोट न देकर उसे वोट देगा जो भाजपा को हरा पाने की स्थिति में होगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजेश पाठक कहते हैं, समाजवादी पार्टी के अपसी द्वंद्व ने यह सिद्ध कर दिया कि अखिलेश यादव प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज कायम रख पाने में कामयाब नहीं हुए। राज्य में हुए कई दंगे इस बात की नजीर भी हैं। ऐसे में सरकार उसी की बनेगी जो प्रदेश को अपराध मुक्त कर विकास के रास्ते पर ले जा पाने में समर्थ हो। उधर समाजवादी पार्टी से गठबंधन की आस लगाए बैठी कांग्रेस मुलायम के बयान पर अखिलेश के साथ खड़ी नजर आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मारूफ खान कहते हैं, पिता-पुत्र के विवाद में बहुत सी बातें निकलीं। इन बातों का निष्कर्ष विवाद के पटाक्षेप के बाद ही निकाला जा सकता है।

 

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