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जानिए क्यों मेरठ में अमित शाह की पदयात्रा के लिए भीड़ नहीं जुटा पाई भाजपा?

पदयात्रा रद्द करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने युवा व्यवसायी अभिषेक की हत्या के बाद उपजे जनाक्रोश को भुनाने की कोशिश की लेकिन उन्हें यहां भी मायूसी हाथ लगी।

Amit Shah, Bhupinder Singh Hooda, Robert Vadra, Amit Shah vs Hooda, Amit Shah Robert Vadra, Amit Shah Jind, Amit Shah News, Amit Shah latest newsभाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। (फोटो-PTI)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की पदयात्रा थी लेकिन ऐन वक्त पर उसे रद्द कर दिया गया। आधिकारिक रूप से बताया गया कि गुटखा व्यवसायी के बेटे और युवा व्यवसायी अभिषेक की हत्या से दुखी भाजपा अध्यक्ष ने पदयात्रा रद्द कर दी है। मेरठ के दिल्ली गेट से शारदा रोड चौराहे होते हुए घंटाघर तक अमित शाह को पदयात्रा करनी थी। शहर में व्यापारियों, जाट समुदाय के लोगों और किसानों के बीच हवा बनानी थी लगे हाथ हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण भी करना था मगर ऐसा हो न सका। भाजपा इसके पीछे चाहे जो तर्क गढ़े लेकिन पार्टी अध्यक्ष की पदयात्रा रद्द होने के पीछे की वजह कुछ और है।

दरअसल, केन्द्र में भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार के काम-काज से व्यापारियों में नाराजगी है, इसलिए वे लोग शाह की पदयात्रा में नहीं जमा हो सके। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले मेरठ में जाट वोटरों का रुझान भी इस बार के चुनावों में भाजपा से विमुख है, इसलिए उनका भी जमघट शाह के पक्ष में नहीं लग पाया। इससे भी बड़ी बात यह कि अगले ही दिन यानी शनिवार को मेरठ में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा थी। इलाके के 18 विधान सभाओं के भाजपा उम्मीदवारों को टारगेट दिया गया था कि पीएम मोदी की जनसभा में कम से कम 10-10 हजार लोगों की भीड़ जुटानी है। ऐसे में ये लोग पशोपेश में थे कि अगर भीड़ शुक्रवार को जुटा दी तो शनिवार का शो यानी पीएम मोदी की जनसभा फ्लॉप हो जाएगी। लिहाजा, कुल मिलाकर शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की पदयात्रा के लिए बहुत कम लोग जमा हुए।

आनन-फानन में पदयात्रा रद्द करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने युवा व्यवसायी अभिषेक की हत्या के बाद उपजे जनाक्रोश को भुनाने की कोशिश की लेकिन उन्हें यहां भी मायूसी हाथ लगी। अभिषेक के परिजनों ने अमित शाह से मिलने से इनकार कर दिया। हालांकि, काफी मशक्कत के बाद भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने अपने मोबाइल पर व्यापारी सुशील वर्मा के चाचा राकेश से अमित शाह की बात कराई। पीड़ित परिवार इस बात से नाराज था कि शहर के एमएलए, एमपी और मेयर सभी भाजपा के हैं लेकिन उनलोगों ने कुछ नहीं किया। पीड़ित परिवार ने साफ तौर पर कह दिया कि उन्हें नेताओं से मतलब नहीं है। हालांकि, बाद में अमित शाह ने ब्रम्हपुरी इलाके में अभिषेक के घर पहुंचकर उनके परिजनों को ढांढ़स बंधाया।

मेरठ के मिजाज को समझते हुए तब अमित शाह ने पार्टी सांसदों को संसद में अभिषेक की हत्या का मामला उठाने को कहा। संसद में मुद्दा भी उठा और अखबारों की सुर्खियां भी बनीं। खैर, किसी तरह, जैसे-तैसे अमित शाह ने चार-पांच सौ लोगों के बीच ही 15 मिनट का भाषण देकर कार्यक्रम की औपचारिकता पूरी कर ली मगर वो अंदरखाने नाराज लगे। सूत्र बताते हैं कि भाजपा और संघ के लोगों को जिस अंदाज में अमित शाह ने हड़काया है उससे जाहिर होता है कि मेरठ जैसे मजबूत किले में भी भाजपा की जमीन खिसकती नजर आ रही है।

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