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“साइकिल” की जंग में चुनाव आयोग में कांग्रेसी कपिल सिब्बल बने अखिलेश यादव के वकील

समाजवादी पार्टी में चल रहे 'दंगल' में अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है।

रामगोपाल यादव और कपिल सिब्बल। PTI Photo by Subhav Shukla

समाजवादी पार्टी में इस वक्त घमासान चल रहा है। सपा प्रमुख मुलायाम सिंह यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस वक्त चुनाव आयोग में यह साबित करने के लिए जुटे हुए हैं कि उनका गुट ‘असली’ समाजवादी पार्टी है। मुलायम और अखिलेश दोनों ही लोगों के गुट चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ को लेकर अपना दावा ठोंक रहे हैं। ऐसे में अखिलेश गुट ने सीनियर वकील कपिल सिब्बल को अपना पक्ष रखने के लिए रखा है। वहीं उनके सामने हैं सीनियर वकील मोहन पराशरन। मोहन भारत के सॉलिसिटर जनरल हैं वहीं कपिल सिब्बल कांग्रेसी नेता होने के साथ-साथ मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।

समाजवादी पार्टी में चल रहे ‘दंगल’ में अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। उसे फैसला करना है कि चुनाव चिन्ह साइकिल का क्या करना है। दरअसल, दोनों ही पक्ष साइकिल पर अपना दावा ठोंक रहे हैं। अखिलेश का कहना है कि उनका पास समाजवादी पार्टी के ज्यादा विधायकों और नेताओं का समर्थन है वहीं मुलायम का कहना है कि पार्टी के संविधान के मुताबिक, अब भी वही पार्टी के प्रमुख हैं और सारे बड़े फैसला लेना का हक उन्हीं कहा है। यह लड़ाई ज्यादा उस दिन बढ़ी जब अखिलेश गुट ने मुलायम के मना करने के बावजूद पार्टी का अधिवेशन बुलाया और कई बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी। जिसमें शिवापल यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने के अलावा अमर सिंह को पार्टी से निष्काषित करने का फैसला शामिल था।

इसके अलावा अखिलेश गुट ने कहा था कि अखिलेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे और मुलायम मार्गदर्शक मंडल में रहेंगे। हालांकि, बाद में मुलायम सिंह यादव ने फिर से प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सारे फैसलों को असंवैधानिक बताकर अपने भाई और अखिलेश के समर्थक रामगोपाल को फिर से पार्टी से निकाल दिया था।

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