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उत्तर प्रदेश चुनाव: बुनियादी दिक्कतों से दो-चार देवरिया में तिकोना मुकाबला

रुद्रपुर राप्ती व गोर्रा नदियों से घिरा दोआबा क्षेत्र हैं। हर साल बाढ़ से ये पूरा इलाका तबाह होता रहता है।

Author देवरिया | February 28, 2017 5:03 AM
उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में त्रिशंकु नतीजे आ सकते हैं।

श्रीचंद्र गोरे

विधानसभा क्षेत्र रुद्रपुर एवं बरहज सरयु नदी के किनारे बसे हैं। रुद्रपुर राप्ती व गोर्रा नदियों से घिरा दोआबा क्षेत्र हैं। हर साल बाढ़ से ये पूरा इलाका तबाह होता रहता है। सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र भी गण्डक व घाघरा नदियों की बाढ़ से विकास नहीं कर सका है। इन इलाकों में ज्यादातर जमीन बंजर है। घटिया निर्माण, सड़के, नहरें बेमरम्मत पड़ी हैं। देवरिया के पूर्वी व दक्षिणी ये इलाके खराब हालत में हंै। फिर भी वर्तमान चुनाव में ये मुद्दे मुखर नहीं हैं। साढ़े तीन लाख की आबादी वाले तीनों क्षेत्रों के लोग तमाम बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बरहज, सलेमपुर और रुद्रपुर के उम्मीदवारों में वर्तमान में साफ तौर पर त्रिकोणीय संघर्ष दिख रहा है। सपा-कांग्रेस गठबंधन एवं भाजपा तथा बसपा में कौन आगे है, यह साफ तौर से कहा नहीं जा सकता है। रुद्रपुर में कांग्रेस के विधायक अखिलेश प्रताप सिंह दुबारा मैदान में है।

ये क्षेत्र से दो बार 1991-1996 में विधायक चुने जा चुके हैं। भाजपा के जयप्रकाष निषाद से मुकाबला करना पड़ रहा है। पर बसपा के चंद्रिका प्रसाद निषाद से भाजपा के जयप्रकाश निषाद से डर भी लगा है। 2012 के चुनाव में सपा के नेता मुक्तिनाथ यादव को 7437 मतों से हराकर अखिलेश प्रताप सिंह चुनाव जीते थे। फलस्वरूप कांग्रेस ने इन्हे उत्तर प्रदेश मेंं पार्टी प्रवक्ता बना दिया। यहां से 2007 के चुनाव में बसपा के टिकट से सुरेश तिवारी जीते थे। वे भाजपा के टिकट पर बरहज से उम्मीदवार हैं। यहां सपा के पीडी तिवारी से कांटे की लड़ाई है। बसपा के प्रत्याशी मुरली मनोहर जायसवाल के पिता एवं पूर्व बसपा विधायक रामप्रसाद का गत 18 फरवरी को मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। मतदान की तारीख निकट आने पर स्थितियां तेजी से इधर-उधर होते दिख रहीं हंै, लेकिन मतदाता मौन है। उनके मूड को उम्मीदवार पहचानने में लगे हैं।

 

 

 

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