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उत्तर प्रदेश चुनाव: चुनावी पटल से पूरी तरह गायब वरुण गांधी

अखिलेश-राहुल की जोड़ी के खिलाफ उन्हें भाजपा की ओर से सबसे ज्यादा भीड़ खींचने लायक चेहरा माना गया लेकिन हाशिये पर डाले जाने से रूठे वरुण ने पूरी तरह किनारा कर रखा है।

Author सुल्तानपुर | February 20, 2017 4:40 AM
भाजपा सांसद वरुण गांधी। (फाइल फोटो)

हाल तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जाने वाले सुल्तानपुर के सांसद वरुण गांधी 2017 के प्रदेश के चुनावी परिदृश्य से पूरी तरह से अदृश्य हैं। उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र में भी उनका अब तक कोई दौरा नहीं हुआ है। पार्टी ने उन्हें अपने स्टार प्रचारकों की पहली सूची में जगह नहीं दी थी। दूसरी सूची में उनका नाम आया लेकिन फिर भी उनकी कोई गतिविधि नहीं है। अखिलेश-राहुल की जोड़ी के खिलाफ उन्हें भाजपा की ओर से सबसे ज्यादा भीड़ खींचने लायक चेहरा माना गया लेकिन हाशिये पर डाले जाने से रूठे वरुण ने पूरी तरह किनारा कर रखा है। 2014 में पार्टी में नरेंद्र मोदी के अच्छे दिनों की आमद के साथ वरुण के लिए पार्टी में खराब दिन शुरू हो गए। इस चुनाव में वरुण ने मोदी की प्रदेश की रैलियों से दूरी बनाए रखी। सुल्तानपुर के अपने चुनाव अभियान में भी उन्होंने मोदी के नाम से परहेज किया। अगस्त 2014 में अमित शाह ने उन्हें अपनी टीम में जगह नहीं दी। महामंत्री पद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी से छुट्टी के बाद वरुण ने उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ा दी। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, खीरी, धौरहरा, सीतापुर, लखनऊ, फतेहपुर सीकरी, आगरा के दौरों में उन्होंने आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी।

लखीमपुर, बहराइच के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में घर और फसले गंवाने वाले किसानों की भी मदद की। वरुण के इन दौरों से आमतौर पर पार्टी और उसके पदाधिकारी दूर रहे और स्थानीय सांसद अपना एतराज भी दर्ज कराते रहे। वरुण के इन दौरों में वरुण यूथ ब्रिगेड उन्हें उत्तर प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश करती रही। सोशल मीडिया पर भी अभियान चला। सर्वेक्षणों में उन्हें सूबे में पार्टी का सबसे लोकप्रिय और भीड़ खेंचू चेहरा बताया गया। पार्टी की इलाहाबाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के मौके पर वरुण समर्थकों ने उन्हें भावी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने का जोरदार प्रचार अभियान चलाया। नेतृत्व की टेढ़ी नजर के बाद यह अभियान थम गया।
उम्मीद की जा रही थी कि चुनाव के मौके पर वरुण की सक्रिय दिखेंगे लेकिन चुनाव के दौरान वरुण कहीं नजर नहीं आ रहे। उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र के टिकट वितरण में उनकी नहीं चली। उन्होंने तीन लोकसभा चुनाव के अंतराल पर भारी बहुमत से सुल्तानपुर संसदीय सीट पर जीत दर्ज की थी। इस क्षेत्र की पांचों सीटों पर भाजपा प्रत्याशी अपना दावा ठोंक रहे हैं। दिलचस्प है कि न सांसद वरुण को उनकी सुध है और न उनको वरुण की मदद का इंतजार।

 

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