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सत्ता के वास्ते ‘यूपी बेहाल’ का नारा बिसराया कांग्रेस ने

उत्तर प्रदेश में महागठबंधन को आकार लेते देख कांग्रेस ने अपने ‘यूपी बेहाल’ के बहुचर्चित नारे से किनारा कर लिया है।

congress, sad, rahul gandhi, sonia gandhi, punjab election, aap , bjp, पंजाब चुनाव, कांग्रेस, राहुल गांधी, सोनिया गांधीबरनाला परिवार कल यहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके निवास पर मिला था।

दीपक रस्तोगी

उत्तर प्रदेश में महागठबंधन को आकार लेते देख कांग्रेस ने अपने ‘यूपी बेहाल’ के बहुचर्चित नारे से किनारा कर लिया है। अब ‘धर्मनिरपेक्षता’ के आजमाए हुए एजंडे को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की कवायद चल रही है। राष्ट्रीय लोकदल के साथ सीटों का स्वरूप तय करने में कांग्रेस और सपा दोनों ही पार्टियों के नेता अपने स्तर पर जुटे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और जनता दल (एकी) के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है। जद (एकी) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हामी का पेच फंस रहा है। इसके लिए जद (एकी) के केंद्रीय नेता शरद यादव और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव उनको मनाने में जुटे हैं।

कांग्रेस के महासचिव गुलाम नबी आजाद ने इस सवाल पर आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया जताने से मना कर दिया कि उत्तर प्रदेश में कुछ महीने पहले लगाए गए ‘27 साल और यूपी बेहाल’ के नारे का अब क्या होगा? उन्होंने कहा कि नई परिस्थितियों में धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट किया जा रहा है। अब यह सवाल प्रासंगिक नहीं है।इस नारे को लेकर कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य भर में किसान यात्राएं और खाट सभाएं की थीं। उन यात्राओं में मिले फीडबैक के आधार पर पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच कई दौर की वार्ता कराई। गुलाम नबी आजाद समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को उम्मीद है कि मैदान में उतरने पर मतदाता नई परिस्थितियों को लेकर संवाद करेंगे।

उधर, महागठबंधन के स्वरूप पर चल रही कवायद में कांग्रेस और सपा नेताओं के साथ राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव और जनता दल (एकी) के शरद यादव भी शामिल हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हामी भरवाने की खातिर दोनों उनसे बात कर रहे हैं। लालू यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि वे उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के लिए प्रचार करेंगे। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी प्रचार में उतरेंगी। कांग्रेस के नेता वामपंथी नेताओं के भी साथ आने की उम्मीद जता रहे हैं। हालांकि, माकपा समेत वामो ने कोई फैसला नहीं किया है।

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के अनुसार, कांग्रेस और सपा का तालमेल धर्मनिरपेक्षता के एजंडे पर किया जा रहा है। दोनों पार्टियों का मानना है कि अल्पसंख्यक आबादी को संदेश देने में अब तक कामयाब रहे हैं कि सांप्रदायिकता के खिलाफ सपा-कांग्रेस की अगुवाई वाला गठबंधन जरूरी है। राष्ट्रीय लोकदल के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों का पेच फंस रहा है, जिसको लेकर बातचीत जारी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन का एक गणित यह भी है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को 29.29 फीसद वोट मिले थे। जिन सीटों पर कांग्रेस लड़ी थी, वहां उसे 13 फीसद वोट मिले थे। इस हिसाब से दोनों पार्टियों का गठबंधन 42 फीसद वोटों की उम्मीद कर रहा है। उत्तर प्रदेश में करीब 20 फीसद मुसलिम मतदाता हैं, जो 403 सीटों में से 125 सीटों पर नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं।

 

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