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उत्तर प्रदेश चुनाव: सुल्तानपुर की चार सीटों पर भाजपा का कब्जा

जिले की पांच में चार सीटें भाजपा ने जीत ली हैं। सपा जिसका 2012 के चुनाव में पांचों सीटों पर कब्जा था, इकलौती इसौली सीट पर सिमट गई है।

Author सुल्तानपुर | March 13, 2017 1:37 AM
जीत के बाद लखनऊ में जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता। ( Photo Source: PTI)

जिले की पांच में चार सीटें भाजपा ने जीत ली हैं। सपा जिसका 2012 के चुनाव में पांचों सीटों पर कब्जा था, इकलौती इसौली सीट पर सिमट गई है। सपा के लिए इससे भी खराब बात यह भी रही कि हारी सीटों पर उसके निवर्तमान विधायक तीसरे स्थान पर खिसक गए। शहर सीट भाजपा के सूर्यभान सिंह ने सबसे लंबे फासले 32393 वोटों से जीती। सिंह इसके पहले 1989 में जनता दल से सदर सीट और 1996 में शहर से भाजपा के विधायक रह चुके हैं। पिछले दो बार से सपा के टिकट पर चुनाव जीत रहे अनूप संडा 53238 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। दूसरे स्थान पर रहे बसपा के मुजीब अहमद को 54393 मत प्राप्त हुए। सदर सीट भाजपा के सीता राम वर्मा के पक्ष में गई। चुनाव के कुछ पहले स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए वर्मा जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्मा ने यह सीट 18773 मतों के अंतर से जीती। बसपा के राज प्रसाद उपाध्याय 50177 मत पाकर दूसरे और सपा के निवर्तमान विधायक अरुण वर्मा 49692 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। मुलायम परिवार की कलह में अरुण वर्मा पहले विधायक थे जिन्होंने अखिलेश यादव के पक्ष में शपथपत्र दिया था। पांचवें चरण की इस सीट से अखिलेश यादव ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। पहले जयसिंहपुर नाम से जाने जानी वाली इस सीट के साथ यह संयोग जुड़ा है कि यहां से जो जीतता है, उस पार्टी की सरकार बनती है। भाजपा की जीत ने उस सिलसिले को बनाए रखा है।

कादीपुर की सुरक्षित सीट भी भाजपा की झोली में गई। यहां उसके टिकट पर जीते राजेश गौतम ने 87353 मत प्राप्त करके बसपा के भगेलू राम को 26604 मतों के फासले से हराया। गौतम ने पिछला चुनाव इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था लेकिन तब वह मुकाबले से बाहर थे। गौतम के दिवंगत पिता स्वर्गीय जय राज गौतम कांग्रेस की सरकारों में मंत्री थे। सपा के निवर्तमान विधायक राम चंद्र चौधरी के स्थान पर उनके पुत्र कांग्रेस के निशान पर सपा गठबंधन के उम्मीदवार थे। उन्हें सिर्फ 32042 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। बसपा के भगेलू राम को 60749 वोट प्राप्त हुए।  लम्भुआ में भाजपा के देव मणि दुबे ने 2007 की मायावती सरकार में मंत्री रहे बसपा के विनोद सिंह को 12897 वोटों से शिकस्त दी। दुबे रेलवे के महाप्रबंधक की बड़ी नौकरी छोड़ कर कुछ महीने पहले ही राजनीति के मैदान में आए हैं। दुबे को 78627 और विनोद सिंह को 65724 वोट प्राप्त हुए। सपा के निवर्तमान विधायक संतोष पांडे 47633 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहें। इसौली में सपा के अबरार अहमद दूसरी बार जीते। उन्होंने जिले की अन्य सीटों की तुलना में कम 4079 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

अबरार अहमद को 51054 और दूसरे स्थान पर राहे भाजपा के ओम प्रकाश पांडे बजरंगी को 46975 वोट हासिल हुए। रालोद के यश भद्र सिंह मोनू 42690 वोट पाकर तीसरे और बसपा के शैलेंद्र त्रिपाठी 24655 पाकर चौथे स्थान पर रहे। सपा टिकट पर जीती जिला पंचायत अध्यक्ष उषा सिंह के पति शिव कुमार सिंह एमबीसीआइ के उम्मीदवार थे उन्हें 11431 वोट मिले। इस सीट पर वोटों के जबरदस्त बंटवारे ने सपा उम्मीदवार अबरार अहमद की राह आसान की। दो चुनावों के अंतराल पर विधानसभा चुनाव में सुल्तानपुर में कमल खिला हैं। पार्टी को आखिरी बार 2002 में शहर की इकलौती सीट पर जीत मिली थी। उसके पहले 1996 में शहर, लम्भुआ और कादीपुर में तीन सीटों पर पार्टी का कब्जा था। 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में पार्टी किसी सीट पर मुकाबले में नहीं थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर की लोकसभा सीट पर पार्टी उम्मीदवार वरुण गांधी की जीत के बाद पार्टी का हौसला बढ़ा। दिलचस्प यह रहा कि पार्टी में हाशिए पर पहुंचे सांसद वरुण गांधी विधानसभा चुनाव के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र से पूरी तरह दूर रहे।

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