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उत्तर प्रदेश चुनाव छठा चरण: भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत, रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने में जुटा आरएसएस

छठे चरण की 49 सीटों पर 4 मार्च को मतदान होना है।

Author लखनऊ | February 28, 2017 5:37 PM
राष्ट्रीय स्वयंसेवर संघ के कार्यकर्ता दैनिक शिविर के दौरान। (Express file photo by Amit Mehra)

दशकों से समस्याओं से जूझ रहा उत्तर प्रदेश का पूर्वी कोना भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। यहां छठे चरण की 49 सीटों पर 4 मार्च को मतदान होना है। इनमें से सिर्फ सात सीटें ही वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जीत पाने में कामयाब हो सकी थी। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस इलाके में ताबड़तोड़ सभाएं कर जनता से संवाद बनाने की लगातार कोशिश में हैं। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में किसी एक दिन उनके प्रवास का भी कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बात को बखूबी जानते हैं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो चरणों में होने वाला मतदान उन्हें उत्तर प्रदेश की सलतनत तक पहुंचाने की कुव्वत रखता है। इसी लिए पार्टी आलाकमान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3, 4 व पांच मार्च को चुनावी सभाएं आयोजित की हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि आठ मार्च को प्रदेश के अंतिम चरण के मतदान के पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वाराणसी में एक दिवसीय प्रवास का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जायेगी। फिलहाल उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक सांसदों ने इस वक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में डेरा डाल रखा है। उनके जिम्मे जनसम्पर्क का काम दिया गया है। इस बीच कई केन्द्रीय मंत्रियों के भी वाराणसी में प्रवास की बात कही जा रही है। इनमें देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह का नाम प्रमुख है। उनके साथ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी वाराणसी में डेरा डाले हुए हैं।

सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी किले को भारतीय जनता पार्टी की फतह में बदलने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी बेहद गोपनीय तरीके से पूर्वांचल के गावों में लगातार सम्पर्क कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि आरएसएस को पार्टी का टिकट न मिलने पर असंतुष्ट प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को समझाने का काम भी दिया गया है। अब तक आरएसएस ने ऐसे दो दर्जन से अधिक असंतुष्ट टिकटार्थियों को समझाने में बहुत हद तक कामयाबी हासिल कर ली है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में छठवें चरण की 49 में से 27 सीटें जीत कर समाजवादी पार्टी ने इस इलाके में बड़ी बढ़त हासिल की थी। इस बढ़त को इस विधानसभा चुनाव में भी कायम रखने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने गठबन्धन के साथी राहुल गांधी के साथ रोड शो कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने गोरखपुर में रोड शो कर भारतीय जनता पार्टी को विकास के मसले पर घेरने की पुरजोर कोशिश की है। सूत्र बताते हैं कि इन दोनों नेताओं की अभी कई सभाएं और रोड शो पूर्वी उत्तर प्रदेश में होने बांकी हैं। सपा के अलावा बहुजन समाज पार्टी ने छठवें चरण की नौ सीटों पर कब्जा कर इस इलाके में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री रहते हुए अलग पूर्वांचल राज्य की मांग करने वाली बहुजन समाज पार्टी की राष्टÑीय अध्यक्ष मायावती अपने इसी कार्ड को पुन: यहां खेलने की पूरी कोशिश में हैं। कांग्रेस के पास अभी यहां सिर्फ चार सीटें ही हैं। ऐसे में उसके पास पाने की संभावनाएं अधिक हैं।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि पांच चरणों के चुनाव के बाद पूर्वांचल में होने जा रहे अंतिम दो चरणों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जन-जन से संवाद की अलग रणनीति तैयार की है। इस काम को अंजाम देने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी नेताओं को पूर्वी उत्तर प्रदेश में बुलाया गया है। बहुजन समाज पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए बृजेश पाठक लगातार पूर्वी उत्तर प्रदेश में सघन जनसम्पर्क अभियान में जुटे हैं। उनके अलावा सौ से अधिक नेताओं को पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में जनता के बीच जाकर केन्द्र सरकार की उपलब्धियों और प्रदेश की सपा सरकार की नाकामियों से उन्हें अवगत कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि छठे चरण में पूरी ताकत झोंकने के बाद भारतीय जनता पार्टी अपने सात विधायकों के पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़े में कुछ इजाफा कर पाने में कामयाब हो पाती है, अथवा नहीं। ऐसा इस लिए क्योंकि विधायकों का आंकड़ा ही उसे उत्तर प्रदेश की सत्ता के दरवाजे तक ले जा पाने में कामयाब हो पाएगा।

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