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उत्तर प्रदेश चुनाव: अपने क्षेत्र में मतदान खत्म होने के बाद थोड़ा आराम और काम, परिवार के साथ जनसम्पर्क में फिर जुटे नेता

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकान्त वाजपेयी कहते हैं, मतदान समाप्त होने के बाद भी दिनचर्या नहीं बदली।

उत्तर प्रदेश में चुनावी रैली को संबोधित करते सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। (PTI PHOTO)

उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र का महापर्व चल रहा है। इस महापर्व में जिन पांच चरणों में मतदान हुआ वहां के प्रत्याशी परिवार को समय देने के साथ ही जनता के बीच फिर पहुंचकर अपने कामों में जुट गये हैं। चाहे वह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकान्त वाजपेयी हों या कुण्डा से लगातार निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह। या इलाहाबाद शहर उत्तरी से कांग्रेस के विधायक अनुग्रह नारायण सिंह। सभी परिवार के साथ जनता के बीच फिर पहुंच गये हैं। जनसत्ता से इन सभी ने मतदान के बाद की दिनचर्या साझा की।भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकान्त वाजपेयी कहते हैं, मतदान समाप्त होने के बाद भी दिनचर्या नहीं बदली। आज भी रोज सुबह छह बजे स्रान और पूजन से निवृत्त हो जाता हूं। मतदान के पूर्व तक सघन जनसम्पर्क का कार्य लगातार जारी रहा। लेकिन अब नई जिम्मेदारियां मिल गई हैं। मेरठ शहर के लोगों ने मुझसे यहां की खास्ताहाल सफाई व्यवस्था का दर्द साझा कियाा तो मैं जुट गया इस नये काम को अंजाम तक पहुंचाने में। मेरठ शहर में तीन बड़े नाले हैं। ओडियन नाला, आबू नाला प्रथम व आबू नाला द्वितीय। इन तीनों नालों का गन्दा पानी काली नदी में जाकर मिलता है। मैंने मेरठ नगर निगम के अधिकारियों से इसकी सफाई के लिए बात की। उनके कार्यालय में अपने कार्यकर्ताओं और नागरिकों के साथ जाकर कई मर्तबा बात की। उसका परिणाम यह हुआ कि अब मेरठ के तीनों नालों की सफाई का काम शुरू हो चुका है। मेरा ध्येय अब इन तीनों नालों की सफाई और काली नदी की धारा को स्वच्छ करना है। हां इस बीच रोज दो से तीन घंटे का समय परिवार को भी देता जरूर हूं। उनके साथ भोजन करना और परिवार से जुड़ी तमाम बातें होती हैं।

प्रतापगढ़ की कुण्डा विधानसभा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह को रोज उनके बेंती हमल में लोग घेर लेते हैं। रघुराज कहते हैं, रोज सुबह का समय अपने क्षेत्र के लोगों के साथ बिताता हूं। शादी का मौसम है। इसलिए न्यौता निपटाना भी अहम जिम्मेदारी का हिस्सा है। पूरी कोशिश होती है कि ज्यादा से ज्यादा विवाह समारोहों में शामिल हूं। खास तौर पर कन्याओं के विवाह समारोह में जाने की मेरी हर संभव कोशिश होती है। परिवार को समय देना क्योंकि मेरी रोज की दिनचर्या है इसलिए उसमें कोई खास तब्दीली नहीं होती। हां इतना जरूर है कि चुनाव के बाद थोड़ा अधिक समय मिल जाता है उसका पूरा उपयोग बच्चों के साथ करना नहीं भूलता।

अब बात इलाहाबाद शहर उत्तरी के कांग्रेस विधायक अनुग्रह नारायण सिंह की। देश की दूसरी सबसे साक्षर विधानसभा के विधायक अनुग्रह अमूमन स्कूटर से ही अपने विधानसभा क्षेत्र में दिखाई दे जाते हैं। यदि स्कूटर न हुई तो पैदल ही उनकी यात्रा शुरू होती है। जनसत्ता से बात करते हुए अनुग्रह कहते हैं, शायद ही कोई दिन गुजरता हो जब कम से कम 14 घंटे का समय मैंने जनता को न दिया हो। शादी समारोह से लेकर शवयात्रा तक, सबमें शिरकत करना मेरी आदत में शुमार है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ का अध्यक्ष रहने के दौरान मैंने शिद्दत से यह महसूस किया कि मोटर से चलकर हम जनता से वो संवाद नहीं बना पाते जो पैदल चलकर या स्कूटर की सवारी से बनाया जा सकता है। यही वजह है कि कभी मोटर पर सवार होने के बारे में सोचा नहीं। शहर के बाहर यदि जाना हुआ तो सरकारी संसाधनों का उपयोग मैं आज भी करता हूं। शुरू से जनता के बीच रहना मेरे स्वभाव का हिस्सा रहा इस लिए उनसे दूर रह पाना इस जीवन में मेरे लिए संभव नहीं। मोटर पर जब मैं बैठता हूं तो खुद को बंधा हुआ महसूस करता हूं। इतनी तेज जिन्दगी मोटर के दोनों तरफ से गुजरती है कि न कुछ देखते बनता है और न समझते। यही वजह है मेरे मोटर पर सवार न होने की। इस वजह से मेरी विधानसभा के लोग मुझे जब चाहते हैं अपने साथ बुला ले जाते हैं।

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