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UP elections 2017: प्रणव रॉय का आंकलन- यूपी चुनावों में बीजेपी के जीतने के 55 से 65 प्रतिशत चांस, दिए ये तर्क

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अब अंतिम चरण में है और आठ मार्च को सातवें चरण के लिए 40 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।

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उत्‍तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव अब अंतिम चरण में है और आठ मार्च को सातवें चरण के लिए 40 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। आखिरी चरण के लिए सभी दलों ने अपनी ताकत झोंक रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में डेरा जमाए हुए हैं और वहां रोड शो कर रहे हैं। सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए सीएम अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने रोड शो किया। बसपा सुप्रीमो मायावती रैलियों में जुटी हुई हैं। कांग्रेस के साथ मिलकर सपा दोबारा से सत्‍ता में वापसी करना चाहती है। वहीं भाजपा 15 तो बसपा 5 साल का सूखा समाप्‍त करना चाहती है। सपा ‘काम बोलता है’ नारे के साथ मैदान में हैं। वहीं भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए नोटबंदी के फैसले के बाद यह पहली बड़ी चुनौती है। साथ ही उसके सामने 2014 के लोकसभा में 80 में से 71 सीटें जीतने के प्रदर्शन को दोहराने का दबाव होगा।

एनडीटीवी के सह संस्‍थापक प्रणव रॉय ने यूपी चुनावों के छठे चरण के मतदान के बाद वरिष्‍ठ पत्रकार शेखर गुप्‍ता, राहुल श्रीवास्‍तव, दोराब सुपारीवाला और कमाल खान से चर्चा से निष्‍कर्ष निकाला है कि सूबे में भाजपा मजबूत है। विधानसभा चुनावों में उसके जीतने के सबसे ज्‍यादा अवसर हैं। उन्‍होंने राज्‍य के जातिगत समीकरणों, चुनावी मुद्दों, पुराने नतीजों के आधार पर अनुमान लगाया है कि भाजपा के यूपी चुनाव जीतने की 55-65 प्रतिशत संभावना है। सपा-कांग्रेस 30-40 प्रतिशत के साथ दूसरे स्‍थान पर हैं। वहीं बसपा के जीतने की संभावना केवल 5-10 प्रतिशत के बीच है।

उनके अनुसार, यूपी चुनावों में जो पार्टी/गठबंधन 35 प्रतिशत वोट ले जाएगा वह आसानी से सरकार बना लेगा। इसके अनुसार जिस पार्टी/गठबंधन को 35 प्रतिशत वोट मिल जाएंगे वह 200 से ज्‍यादा सीटें जीत लेंगी। उनके अनुसार भाजपा को 2014 लोकसभा चुनाव में 42 प्रतिशत वोट मिले थे अगर उसके मत प्रतिशत में कमी होती है तो भी भगवा दल के लिए चिंता की बात नहीं है। वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन को तीन साल पहले केवल 29 प्रतिशत वोट मिले थे उसे 2017 को फतह करने के लिए 6 प्रतिशत वोट बढ़ाने होंगे। वहीं बसपा को 15 प्रतिशत वोट ज्‍यादा लेने होंगे।

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प्रणव रॉय ने हालांकि अपने निष्‍कर्ष में कहा कि अगर हालात साल 2012 विधानसभा चुनावों की तरह रहे तो फिर सपा-कांग्रेस 352 सीट जीत सकता। लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव वाले रहे तो वह 85 सीट पर सिमट सकता है। वहीं भाजपा अगर लोकसभा चुनाव वाले मोमेंटम को बनाए रखता है तो उसे 310 सीट मिल सकती है। बता दें कि पांच साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में सपा को 226 सीट मिली थी। उन्‍होंने यह भी साफ किया यूपी पड़ोसी राज्‍य बिहार की तरह नहीं है जहां महागठबंधन ने भाजपा को परास्‍त कर दिया था। वहां पर महागठबंधन का कुल वोट प्रतिशत 47 प्रतिशत था। अगर यूपी में सपा-कांग्रेस को मिलने वाले वोटों को मिलाया जाए तो यह आंकड़ा 36 प्रतिशत ही होता है।

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