scorecardresearch

यूपी चुनावः अपराधियों को टिकट देने पर छिड़ी सियासत, भाजपा में सबसे ज्यादा दागी विधायक!

पिछले चुनाव 2017 में सबसे ज्यादा 38 फीसदी दागी उम्मीदवार बसपा में थे। उसके बाद 37 फीसदी समाजवादी पार्टी और 36 फीसदी भाजपा में थे। इसके अलावा 32 फीसदी कांग्रेस और 20 फीसदी राष्ट्रीय लोकदल ने ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया था।

UP chunav 2022, tainted candidates
सभी दल दावा कर रहे हैं कि वे साफ-सुथरे हैं, लेकिन सभी दलों में दागी उम्मीदवार टिकट पाने की लाइन में हैं। (फाइल तस्वीर)

यूपी चुनाव की बिसात बिछ गई है। सियासी मोहरे दौड़ने लगे हैं, लेकिन जो मुद्दा सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है, वह दागी विधायक का मुद्दा है। खास बात यह है कि दागी विधायक सभी दलों में है और कोई भी दल खुद को बिल्कुल साफ-सुथरा नहीं कह सकता है। सभी दलों को सत्ता पाने के लिए दागी उम्मीदवारों की जरूरत पड़ रही है।

हर चुनाव में वे दावा करते हैं कि वे साफ राजनीति करने और जनता की सेवा करने के लिए मैदान में उतर रहे हैं, लेकिन जब चुनावों के दौरान टिकट देने की बात आती है तो वे दागी और अपराधी पेशेवर लोगों को उम्मीदवार बनाने में नहीं चूकते हैं। किसी में कम किसी में ज्यादा, लेकिन सभी दलों में ऐसे उम्मीदवारों की भरमार है। फिलहाल इसको लेकर सियासत तेज हो गई है।

पिछले चुनाव 2017 में सबसे ज्यादा 38 फीसदी दागी उम्मीदवार बसपा में थे। उसके बाद 37 फीसदी समाजवादी पार्टी और 36 फीसदी भाजपा में थे। इसके अलावा 32 फीसदी कांग्रेस और 20 फीसदी राष्ट्रीय लोकदल ने ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया था। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार 45 विधायक ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक केस इतने बड़े हैं, जिन पर चुनाव लड़ने के भी संकट है। इनमें भाजपा के 32 विधायक, समाजवादी पार्टी के 5 विधायक, बहुजन समाज पार्टी और अपना दल के 3-3 विधायक और कांग्रेस के एक विधायक शामिल है। इन पर आपराधिक मामले लंबित रहने के औसत समय 13 साल है।

इनमें सबसे ऊपर मड़िहान विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रमा शंकर सिंह हैं। दूसरे नंबर पर मऊ से बहुजन समाज पार्टी के विधायक मुख्तार अंसारी और तीसरे स्थान पर धामपुर से भाजपा के विधायक अशोक कुमार राना है।

इस बार चुनाव आयोग सख्ती दिखाते हुए आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। जो भी दल किसी भी आपराधिक छवि वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बनाता है तो उसके आपराधिक इतिहास का पूरा विवरण उसके उम्मीदवार चयन के 48 घंटे के भीतर या नामांकन दाखिल करने की पहली तारीख से पहले बताना होगा।

इसके साथ ही उसका प्रिंट और सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार कराना होगा। इसके साथ ही प्रारूप C-8 में प्रत्याशी चयन के 72 घंटे के भीतर अनुपालन रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजनी होगी। ऐसा नहीं करने पर उसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का सामना करना पड़ेगा। उसे यह भी बताना होगा कि उसे आपराधिक छवि के व्यक्ति को उम्मीदवार क्यों बनानी पड़ी।

पढें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (Upassemblyelections2022 News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.