scorecardresearch

UP Elections 2022: इस बार गैर यादव उम्‍मीदवारों पर अखिलेश यादव ने क्यों लगाया दांव? इन आंकड़ों में छिपा है पूरी गणित

समाजवादी पार्टी ने 18 यादवों को टिकट दिया है जबकि 31 मुसलमानों को टिकट दिया है। अखिलेश यादव करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। शिवपाल यादव का भी नाम लिस्ट में है।

Akhilesh Yadav, up election 2022, politics, samajwadi party
अखिलेश यादव करहल विधानसभा सीट से उम्मीदवार हैं। (image source: @samajwadiparty)

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 24 जनवरी को अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की। पार्टी ने अब तक 159 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें पहले, दूसरे और तीसरे चरण के प्रत्याशियों के नाम हैं। पार्टी ने अपनी पहली सूची के जरिए सभी जातियों को साधने की कोशिश की है। सपा की सूची में कुछ चौकाने वाले नाम भी हैं। पार्टी का गैर यादव ओबीसी की तरफ झुकाव भी लोगों को आश्चर्य-चकित कर रहा है।

समाजवादी पार्टी ने बीएसपी, बीजेपी और कांग्रेस से आए प्रत्याशियों को भी टिकट दिया है और जातीय समीकरण साधने की भी कोशिश की है। पार्टी ने जो सूची जारी की उसमें सबसे पहला नाम सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का है और वह करहल विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार होंगे। समाजवादी पार्टी ने अपनी पहली सूची में 31 मुस्लिम उम्मीदवारों को भी टिकट दिया है, जिसमें आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम खान का भी नाम है।

ओबीसी उम्मीदवारों को 66 टिकट: सपा ने अपनी पहली लिस्ट में 66 टिकट ओबीसी समाज के उम्मीदवारों को दिया है, इसमें 18 उम्मीदवार यादव समुदाय से आते हैं। जबकि 48 उम्मीदवार गैर यादव ओबीसी समाज से आते हैं। सूची से साफ है कि समाजवादी पार्टी गैर यादव ओबीसी समाज को साधने का प्रयास कर रही है और सपा को भी बखूबी पता है कि अगर बहुमत पाना है तो गैर यादव ओबीसी समाज में अपनी पैठ बनानी पड़ेगी। गैर यादव ओबीसी में 7 कुर्मी उम्मीदवारों को भी समाजवादी पार्टी ने मैदान में उतारा है। जबकि निषाद समाज के 4 उम्मीदवारों को भी पार्टी ने टिकट दिया है। समाजवादी पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद को भी चुनावी मैदान में उतारा है। उन्हें फतेहपुर जिले की अयाहशाह सीट से उम्मीदवार बनाया है।

गैर यादव ओबीसी नेताओं को सपा में शामिल करवाया: अखिलेश यादव पिछले कई महीनों से गैर यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए काम कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने कई ओबीसी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करवाया। अंबेडकर नगर से ओबीसी नेता राम अचल राजभर और लाल जी वर्मा को समाजवादी पार्टी में शामिल कराया गया। तो वहीं बस्ती जिले के बड़े कुर्मी नेता राम प्रसाद चौधरी को समाजवादी पार्टी ने अपने पाले में लिया। बता दें कि लालजी वर्मा ,राम अचल राजभर और राम प्रसाद चौधरी तीनों ही मायावती के काफी करीबी नेता थे और मायावती को गैर यादव ओबीसी वोट दिलाने में काफी अहम रोल निभाते थे।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य को भी अपने साथ लिया ताकि मौर्य समाज सपा के साथ आए। इसके बाद अखिलेश यादव ने बीजेपी में बड़ी सेंध लगाते हुए स्वामी प्रसाद मौर्या को भी अपने पाले में लिया। अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ भी गठबंधन किया हुआ है। बता दें कि ओमप्रकाश राजभर भी खुद को पिछड़ों का नेता बताते हैं और राजभर समुदाय से आते हैं। राजभर समाज ओबीसी की श्रेणी में आता है।

अखिलेश यादव ने निषाद समाज को लुभाने के लिए जुलाई 2021 में निषाद समुदाय के बड़े नेता मनोहर लाल की मूर्ति का अनावरण उन्नाव में किया था। मनोहर लाल को निषाद, मल्लाह, बिंद और लोध जातियों को एकजुट करने के लिए भी जाना जाता है। मुलायम सिंह यादव की सरकार में मनोहर लाल मंत्री भी थे। मनोहर लाल के बेटे दीपक कुमार भी समाजवादी पार्टी से सांसद और विधायक रहे थे। दीपक कुमार के निधन के बाद मनोहर लाल के बड़े बेटे राजकुमार सपा में हैं और राजनीति कर रहे हैं।

कुल मिलाकर अगर हम देखे तो समाजवादी पार्टी ने कुर्मी, निषाद, राजभर और मौर्य मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। यह सभी जातियां नॉन यादव ओबीसी में आती हैं। कुर्मी, निषाद, राजभर और मौर्य मतदाताओं की संख्या उत्तर प्रदेश में करीब 12-13 फ़ीसदी है। समाजवादी पार्टी के पास पहले से ही यादव समाज का अधिकांश वोट है। बता दें कि प्रदेश में यादव मतदाता करीब 9 फीसदी हैं। अगर हम निषाद, कुर्मी, राजभर, मौर्य और यादव समाज के वोट को जोड़ दें तो ये करीब 21-22 फ़ीसदी होता है और ये आंकड़ा कुल ओबीसी वोट का करीब 50% है। समाजवादी पार्टी की कोशिश यही है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में ओबीसी वोटों का अधिकांश हिस्सा उनके पक्ष में जाए। ओबीसी समाज में यादव वोट सपा के पास पहले से ही है इसलिए वो गैर यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने का प्रयास कर रहे हैं।

32 दलित, 11 ब्राह्मण उम्मीदवार : समाजवादी पार्टी ने दलितों को भी साधने की कोशिश की है। समाजवादी पार्टी ने अपनी पहली लिस्ट में 32 दलित उम्मीदवारों का नाम घोषित किया है, जबकि 11 ब्राह्मण उम्मीदवारों का नाम भी घोषित किया है। सपा की पहली लिस्ट में 9 उम्मीदवार वैश्य और कायस्थ समाज से आते हैं ,जबकि 8 उम्मीदवार ठाकुर हैं। वही 2 सिख उम्मीदवारों को भी समाजवादी पार्टी ने मैदान में उतारा है।

41% ओबीसी, 20% दलित और 19% मुस्लिम उम्मीदवार: अगर हम समाजवादी पार्टी की पहली लिस्ट पर नजर डाले तो 41% उम्मीदवार ओबीसी समाज से आते हैं। जबकि 20% उम्मीदवार दलित समुदाय से आते हैं। वहीं पर समाजवादी पार्टी ने 19% मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। समाजवादी पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि हिस्सेदारी के हिसाब से उन्होंने उम्मीदवारों का ऐलान किया है।

बीजेपी से आए विधायकों को टिकट: समाजवादी पार्टी ने बीजेपी से आए विधायकों को भी टिकट दिया है। कानपुर के बिल्हौर एससी सीट से विधायक भगवती सागर को सपा ने कानपुर नगर की घाटमपुर एससी सीट से उम्मीदवार बनाया है। तो वहीं पर बांदा की तिंदवारी सीट से विधायक बृजेश प्रजापति को पार्टी ने तिंदवारी से ही उम्मीदवार घोषित किया है।

समाजवादी पार्टी ने अभी सिर्फ यादव समुदाय के 18 उम्मीदवारों को ही टिकट दिया है और इससे सभी लोग आश्चर्यचकित हैं। समाजवादी पार्टी को यादवों की पार्टी कहा जाता है और माना जाता है कि यह पार्टी यादवों को सबसे अधिक टिकट देती है। लेकिन इस बार समाजवादी पार्टी बदली बदली सी नजर आ रही है और पूरे ओबीसी समाज को साधने का प्रयास कर रही है। ऐसा माना जाता है कि उत्तर प्रदेश में 42 फ़ीसदी आबादी हिन्दू ओबीसी समाज की है। इसी को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा की है।

पढें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (Upassemblyelections2022 News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट