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UP Elections 2022: उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल बना चुनावी अखाड़ा, क्या इस बार ‘ब्राह्मण’ दिलाएंगे सत्ता की चाबी?

योगी सरकार से ब्राह्मणों की नाराजगी की खबरों के बाद सभी राजनीतिक दल ब्राह्मणों को साधने का प्रयास करने लगे।

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उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की ब्राह्मण सियासत ।

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज चुका है। सभी पार्टियां विभिन्न जातियों को साधने में लगी हुई हैं। वर्तमान में अगर देखे तो उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय को लेकर सभी पार्टियां एक्टिव दिखाई दे रही है। सभी पार्टियां ब्राह्मण समुदाय को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि विकास दुबे कांड में खुशी दुबे की गिरफ्तारी के बाद से ही ब्राह्मण समुदाय प्रदेश की योगी सरकार से नाराज है। विपक्ष भी लगातार ऐसा आरोप लगाता आ रहा है कि योगी सरकार ब्राह्मणों को प्रताड़ित कर रही है।

ब्राह्मणों को रिझाने और अपने पाले में करने के लिए बसपा ने जुलाई 2021 में ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया था और यह आयोजन राज्य के सभी 18 मंडलों में आयोजित किया था। aबसपा का उद्देश्य ब्राह्मणों को अधिक संख्या में अपनी पार्टी से जोड़ना है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने ये जिम्मेदारी पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले सतीश चंद्र मिश्रा को दी है। 2007 के चुनाव में मायावती ने कुछ ब्राह्मण मतों को अपनी ओर करने में कामयाबी हासिल की थी।

समाजवादी पार्टी ने भी ब्राह्मणों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए कई कार्यक्रम किए। अखिलेश यादव ने भगवान परशुराम की मूर्ति का भी अनावरण किया। पूर्वांचल के ब्राह्मण नेता और बाहुबली हरिशंकर तिवारी के परिवार को भी समाजवादी पार्टी में शामिल कराया। अंबेडकर नगर से बसपा नेता राकेश पांडे को भी समाजवादी पार्टी में शामिल कराया। बीजेपी ने भी प्रबुद्ध सम्मेलन का आयोजन किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। मुख्यमंत्री योगी ने सपा शासनकाल के दौरान ब्राह्मणों की हत्या को लेकर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा था।

यूपी में ब्राह्मण समुदाय क्यों हैं महत्वपूर्ण?: उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी कुल आबादी की लगभग 13-14 फीसदी है और करीब 11 जिले ऐसे हैं जहां पर इनकी आबादी 18 फ़ीसदी से भी अधिक है। उत्तर प्रदेश के करीब 18 जिलों में ब्राह्मण समुदाय का राजनीति पर सीधा प्रभाव है। मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तो वहीं पूर्वांचल में गोंडा, बस्ती, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर, संत कबीर नगर , गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, भदोही, बनारस, बलिया समेत अन्य जिलों में ब्राह्मण अधिक संख्या में रहते हैं। लखनऊ ,कानपुर और शाहजहांपुर में भी ब्राह्मण अच्छी संख्या में रहते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इन जिलों की 85% से अधिक सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी और बीजेपी ने विधानसभा में 300 से ऊपर की संख्या पार की थी।

मायावती ने 2007 में दिया था सबसे ज्यादा टिकट: 2007 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने जब ब्राह्मणों को पार्टी से जोड़ने का फैसला किया, उस समय बीएसपी ने 86 टिकट ब्राह्मणों को दिए थे। बीएसपी के टिकट पर 41 ब्राह्मण उम्मीदवार विधानसभा में पहुंचे थे और प्रदेश में बीएसपी की सरकार बनी थी। 2012 में जब समाजवादी पार्टी सत्ता में आई तब 21 ब्राह्मण विधायक समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे। वहीं पर 2017 में 46 ब्राह्मण विधायक बीजेपी के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे और बीजेपी की प्रदेश में भारी बहुमत के साथ सरकार बनी।

ब्राह्मण लॉबी बनाने में सक्रिय: पिछले साल जैसे ही उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण उत्पीड़न की शिकायत होना शुरू हुई, विपक्षी दलों ने बीजेपी पर प्रहार करना शुरू कर दिया। ब्राह्मणों को रिझाने के लिए समाजवादी पार्टी और बीएसपी ने भगवान परशुराम की मूर्ति लगाने का भी ऐलान कर दिया था। बीजेपी को भी लगा कि ब्राह्मण उनसे छिटक सकता है तब बीजेपी भी ब्राह्मणों की रिझाने की कोशिश में जुट गई। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उत्तर प्रदेश के बड़े ब्राह्मण नेताओं के साथ मीटिंग की और उनसे ब्राह्मणों की नाराजगी के बारे में रिपोर्ट ली।

बीजेपी में उत्तर प्रदेश में बड़े ब्राह्मण चेहरों की कमी?: एक समय उत्तर प्रदेश बीजेपी में ब्राम्हण चेहरों की कोई कमी नहीं थी। लेकिन वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश बीजेपी में ब्राह्मण चेहरे की कमी साफ तौर पर दिखाई दे रही है। कलराज मिश्रा जो कि अब राज्यपाल बन चुके हैं, शिव प्रताप शुक्ला को पिछली सरकार में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री तो बनाया गया लेकिन अब वह भी हाशिए पर हैं। लक्ष्मीकांत बाजपेई जो 2014 में जब केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी तब वह यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे लेकिन 2017 के बाद से वह भी हाशिए पर थे।

हालांकि विधानसभा चुनाव 2022 के पहले उन्हें ज्वाइनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया। बीजेपी ने दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री तो बनाया लेकिन पार्टी की उम्मीदों पर वह भी खरे नहीं उतर पाए।आने वाले चुनाव में ब्राह्मण किस पार्टी को वोट करेंगे यह तो 10 मार्च के बाद ही पता चलेगा। लेकिन सभी पार्टियों ने ब्राह्मणों को अपनी तरफ आकर्षित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

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