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कौन हैं वो चेहरे जिन्‍होंने पार्टी के भीतर बगावत को दबाकर कराई यूपी में सीएम योगी की वापसी

UP Election 2022: धर्मेंद्र प्रधान, सुनील बंसल और अनुराग ठाकुर ने उत्तर प्रदेश में भाजपा की सत्ता में वापसी के लिए पर्दे के पीछे काम किया। इसके अलावा ने बूथ स्तर पर मैनेजमेंट के लिए एक अन्य टीम काम कर रही थी।

UP Election 2022 | BJP | Yogi Adityanath
उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा को मिली जीत के बाद लखनऊ में पार्टी मुख्यालय में सीएम योगी। (फोटो- एएनआइ)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल करके सत्ता में वापसी की। हालांकि, राह आसान नहीं थी। कोरोना संकट और किसान आंदोलन से पार्टी के खिलाफ माहौल बनता दिखाई दे रहा था। सीएम योगी के खिलाफ पार्टी में बगावती सुर भी देखने को मिले। केशव प्रसाद मौर्य जैसे नेता अपने बयान से परेशानी खड़ी कर रहे थे। जब पार्टी में उठापटक देखने को मिल रही थी तब पर्दे के पीछे से पार्टी के तीन नेता सीएम योगी की वापसी पटकथा लिख रहे थे। पार्टी आलाकमान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और महामंत्री संगठन सुनील बंसल को चुनाव प्रबंधन और मैनेजमेंट के लिए मैदान में उतारा। इन्होंने पार्टी को एकजुट दिखाने से लेकर तमाम छोटे- बड़े मुद्दों को निपटाया और एक बार फिर भाजपा ने यूपी करिश्माई प्रदर्शन किया।

धर्मेंद्र प्रधान- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूपी में भाजपा का चुनाव प्रभारी बनाए जाने के बाद यहा डेरा डाल दिया था। केंद्र और राज्य सरकार के साथ समंव्य करके उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि राज्य में कोई भी रणनीति आसानी से लागू हो और एक बार फिर सरकार बन सके। वह इससे पहले त्रिपुरा, कर्नाटक, झारखंड़ और बिहार जैसे राज्यों में यह जिम्मेदारी निभाई थी, लेकिन यूपी का चैंलेज काफी अलग था। यूपी में उन्होंने पर्दे के पीछे से छोटे-छोटे समीकरणों के साधा। योगी सरकार से नाराज बताए जा रहे ब्राह्मण समेत अन्य समुदाय के लोगों से उन्होंने संपर्क किया और उनकी नाराजगी दूर की। ग्राउंड पर काम कर रही टीम को उन्होंने हर तरह से मदद मुहैया कराई।

सुनील बंसल- भाजपा के महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल ने न सिर्फ 2022 बल्कि 2014, 2017 और 2019 में भी यूपी में भाजपा के शानदार प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई। टिकट बांटवारे से लेकर किसी को कोई जिम्मेदारी सौंपने तक का फैसला लेने से पहले सुनील बंसल से चर्चा जरूर की गई। कोई भी फैसला उन्हें बगैर बताए नहीं लिया गया। सूत्रों के अनुसार बंसल ने उम्मीदवारों की रिपोर्ट कार्ड तैयार की। इसके अलावा वे बागी नेताओं और पार्टी के खिलाफ काम करने वालों पर नजर रख रहे थे। उन्होंने आरएसएस और पार्टी के बीच कोआर्डिनेशन की भी भूमिका निभाई।

अनुराग ठाकुर- अनुराग ठाकुर को भाजपा ने यूपी चुनाव का सह-प्रभारी बनाया था। केंद्रीय खेल मंत्री ने विपक्ष को घेरने के लिए रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने विपक्ष खासकर अखिलेश यादव के खिलाफ काफी अक्रामक तेवर दिखाया और भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया। सोशल मीडिया कैंपेन की मॉनिटरिंग भी की। उन्होंने राज्य का खूब दौरा किया। कार्यकर्ताओं और मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाई।

बूथ स्तर पर काम कर रही थी एक टीम- इन तीनों के अलावा एक टीम जमीन पर काम कर रही थी। इस टीम के लोग चुनाव और बूथ मैनेजमेंट जैसे काम कर रहे थे। इनमें महासचिव जेपीएस राठौड़, गोंड़ा से सासंद कीर्तिवर्धन सिंह, अरुणकांत द्विवेदी, अशोक द्विवेदी, गोविंद शुक्ला और अनूप गुप्ता जैसे लोग शामिल थे। इन लोगों के जिम्मे चुनाव संबंधित डेटा से लेकर धुआंधार रैलियों के प्रबंधन करने जैसे काम थे।

जब आई थी केशव-योगी में खटपट की खबर- 2017 में पार्टी और उसके सहयोगियों ने 325 सीट पर जीत हासिल की थी। भाजपा को अकेले 312 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। ऐसे में 2022 के चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने न सिर्फ पार्टी को सत्ता में वापस लाने बल्कि पिछली बार की तरह शानदार जीत हासिल करने की भी चुनौती थी। चुनाव से कुछ महीने पहले योगी और डिप्टी सीएम केशव में सबकुछ ठीक न होने की बात सामने आई थी। केशव प्रसाद मौर्य ने यह इस और बल दे दिया था कि अगला सीएम कौन होगा यह केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा।

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