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UP Election 2022: यूपी विधानसभा चुनावों में इन महिला नेताओं पर होगी पूरे देश की नजर

बीजेपी ने रायबरेली से अदिति सिंह को टिकट दिया है तो वहीं पर कांग्रेस ने उन्नाव सदर से उन्नाव रेप पीड़िता की मां आशा सिंह को टिकट दिया है।

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कांग्रेस ने यूपी चुनाव में 40% महिला उम्मीदवारों को उतारने का फैसला किया है।

उत्तर प्रदेश के चुनाव में महिलाओं की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण होगी। कांग्रेस ने पहले ही वादा किया था कि वह 40% टिकट महिलाओं को देगी। वहीं बीजेपी ने भी अभी तक अपनी सूची में 15% महिलाओं को टिकट दिया है। चुनाव आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव के लिए 52 लाख 80 हजार नए मतदाताओं के नाम जुड़े हैं। जिसमें 23 लाख 92 हजार पुरुष हैं और 28 लाख 86 हजार महिला मतदाता है। आंकड़ों से साफ जाहिर है कि यूपी में लिंगानुपात भी 2017 की अपेक्षा बढ़ा है। आने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव में कुछ महिला नेताओं पर भी प्रदेश और देश की नजर होगी। लोग जानने को इच्छुक है कि इन महिला नेताओं का राजनीतिक भविष्य कैसा होगा?

आइए जानते हैं कुछ महिला नेताओं के बारे में जो इस बार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी।

अदिति सिंह, विधायक रायबरेली सदर: अदिति सिंह पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की बेटी है और रायबरेली सदर से 2017 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गई थी। अखिलेश सिंह रायबरेली के काफी बड़े नेता थे और उन्होंने पांच बार रायबरेली सीट से जीत प्राप्त की। अखिलेश सिंह ने तीन बार कांग्रेस के टिकट पर ,एक बार निर्दलीय और एक बार पीस पार्टी के टिकट पर रायबरेली से जीत प्राप्त की थी। दिसंबर 2021 में अदिति सिंह ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया और 3 दिन पहले ही उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया है। अदिति सिंह को बीजेपी ने रायबरेली सदर से उम्मीदवार बनाया है।

आराधना मिश्रा, रामपुर खास : आराधना मिश्रा रामपुर खास से विधायक हैं और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी है। प्रमोद तिवारी 1980 से 2012 तक लगातार 9 बार रामपुर खास से विधायक चुने गए। 2017 में उन्होंने अपनी बेटी को कांग्रेस के टिकट पर लड़वाया और आराधना मिश्रा ने शानदार जीत प्राप्त की। आराधना मिश्रा ने बीजेपी प्रत्याशी को 16 हजार से अधिक वोटों से हराया। इस बार भी आराधना मिश्रा रामपुर खास से संभावित कांग्रेस उम्मीदवार हैं।

मृगांका सिंह, कैराना से बीजेपी प्रत्याशी: मृगांका सिंह कैराना से बीजेपी की उम्मीदवार हैं और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे स्वर्गीय हुकुम सिंह की बेटी हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी मृगांका सिंह ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि तब समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नाहिद हसन ने उन्हें 21000 से अधिक वोटों से हराया था। इस बार भी मृगांका के सामने नाहिद हसन हैं। नाहिद हसन के जेल में होने के कारण यह सीट चर्चा का विषय बनी हुई है।

इकरा हसन, नाहिद हसन की बहन: इकरा हसन ने कैराना सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन भरा है। यहां से समाजवादी पार्टी ने नाहिद हसन को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन नाहिद गैंगस्टर एक्ट के मामले में जेल में बंद है। इकरा नाहिद हसन की बहन है। उन्होंने इसलिए पर्चा भरा है कि अगर नाहिद की उम्मीदवारी निरस्त होती है ,उस स्थिति में वो वहां से समाजवादी पार्टी रालोद गठबंधन की ओर से उम्मीदवार होंगी।

बेबी रानी मौर्य, आगरा ग्रामीण से बीजेपी प्रत्याशी: बेबी रानी मौर्य आगरा ग्रामीण से बीजेपी की प्रत्याशी हैं और वर्तमान में बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। सितंबर 2021 में उन्होंने उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया। 2007 में भी आगरा की एत्मादपुर सीट से उन्होंने चुनाव लड़ा था ,लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वह राष्ट्रीय महिला आयोग की भी सदस्य रह चुकी हैं। 1995 में बेबी रानी मौर्य बीजेपी के टिकट पर आगरा की मेयर भी रह चुकी है।

अपर्णा यादव, मुलायम सिंह यादव की बहू: अपर्णा यादव मुलायम सिंह यादव की बहू है और कुछ दिनों पहले इन्होंने भी भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। अपर्णा यादव ने 2017 का विधानसभा चुनाव भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ कैंट से लड़ा था। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी वह बीजेपी के टिकट पर लखनऊ कैंट से उम्मीदवार हो सकती हैं। हालांकि अभी तक उनकी उम्मीदवारी की घोषणा नहीं हुई है। जब अपर्णा यादव ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की उस समय समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा।

निदा अहमद, संभल: कांग्रेस ने संभल से पत्रकार निदा अहमद को चुनावी मैदान में उतारा है। निदा अहमद पत्रकार रह चुकी हैं और प्रतिष्ठित संस्थानों में काम कर चुकी हैं। निदा ने अपने करियर की शुरुआत क्राइम रिपोर्टिंग से किया था। वह इंडिया टुडे ग्रुप में हिंदी एंकर रह चुकी हैं।

रिया शाक्य, बिधूना: रिया शाक्य को बीजेपी ने औरैया जिले की बिधूना सीट से उम्मीदवार बनाया है। रिया शाक्य बागी बीजेपी विधायक विनय शाक्य की बेटी हैं और विनय शाक्य समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। रिया शाक्य तब सुर्खियों में आई थी जब उन्होंने अपने चाचा पर आरोप लगाया था कि उनके पिता को वह समाजवादी पार्टी में शामिल कराने के लिए लेकर गए हैं। उनके पिता का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। हालांकि उनके दावों को पुलिस ने खारिज कर दिया था। समाजवादी पार्टी भी बिधूना से विनय शाक्य को टिकट दे सकती है। अगर ऐसा हुआ तो यहां पर पिता और पुत्री के बीच में राजनीतिक लड़ाई होगी।

आशा सिंह, उन्नाव सदर: आशा सिंह उन्नाव सदर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। आशा सिंह उन्नाव रेप पीड़िता की मां है। आशा सिंह के खिलाफ समाजवादी पार्टी और बसपा ने उम्मीदवार नहीं उतारा है। अभी तक बीजेपी ने भी उन्नाव सदर से किसी को टिकट नहीं दिया है। आशा सिंह को टिकट देने पर कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सिंह सेंगर ने प्रियंका गांधी की तीखी आलोचना की थी।

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