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यूपी चुनावः इस बार कई ‘दिग्गजों’ को कर दिया गया दरकिनार, पार्टियों ने इन बड़े नेताओं को नहीं दिया टिकट

UP Assembly Election 2022: इस बार यूपी चुनाव में कई ऐसे दिग्गज हैं जिन्हें पार्टियों ने दरकिनार कर दिया है। ऐसे में कई बाहुबलियों के सामने राजनीतिक संकट खड़ा नजर आ रहा है।

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कई दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य पर गहरा संकट नजर आ रहा है(फोटो सोर्स: Social Media/फेसबुक/ट्विटर)।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव आगमी 10 फरवरी से शुरू होंगे। सात चरणों में होने वाले इन चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे। बता दें कि इस बीच राजनीतिक पार्टियों की तरफ से टिकट पाने वाले उम्मीदवारों की सूची जारी की जा रही है। इस विधानसभा चुनाव में कई दिग्गज ऐसे भी हैं जिन्हें पार्टियों ने दरकिनार कर दिया है। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य पर गहरा संकट नजर आ रहा है।

कादिर राणा: इसमें बड़ा नाम मुजफ्फरनगर से 2009 में बसपा सांसद रहे कादिर राणा का है। कादिर राणा यूपी पश्चिम की राजनीति में बड़ा मुस्लिम चेहरा माने जाते हैं। पूर्व सांसद कादिर राणा पिछले तीन दशक से राजनीति कर रहे हैं। लेकिन इस बार उनकी राजनीति पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। दरअसल राणा ने बसपा छोड़ सपा का दामन थाम तो लिया लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव में उनका टिकट अभी तक फाइनल नहीं हुआ है।

बता दें कि राणा ने सभासद से सांसद तक का राजनीति सफर तय किया। वो सपा से एमएलसी रहे, आरएलडी से विधायक और बसपा से सांसद रह चुके हैं। मुजफ्फरनगर में मुस्लिम समीकरण के दम पर उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान हासिल की। यूपी के 2022 विधानसभा चुनाव में यूपी पश्चिम में सपा और रालोद का गठबंधन है। लेकिन ना तो राणा को किसी भी सीट से प्रत्याशी नहीं बनाया है और ना ही उनके परिवार से भी किसी सदस्य को टिकट दिया गया है।

हाजी याकूब: मेरठ में हाजी याकूब एक बड़ा चेहरा हैं। उनकी पहचान मुस्लिम नेता के तौर पर है। उनका सियासी रुतबा इसी से आंका जा सकता है कि वो निर्दलीय विधायक भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें मुलायम सिंह यादव की सरकार में मंत्री पद भी मिला था। बीते 2019 के लोकसभा चुनाव में याकूब कुरैशी मेरठ सीट पर कम अंतर से हार गए थे।

इस बार यूपी विधानसभा चुनाव में हाजी याकूब के बेटे इमरान कुरैशी को बसपा ने मेरठ की दक्षिण सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि चुनावी घोषणा होने से एक दिन पहले ही उनका टिकट कट गया। वहीं आरएलडी ने अपनी सभी सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। ऐसे में अब उनके राजनीतिक करियर पर संकट खड़ा हो गया है।

गुड्डू पंडित: बुलंदशहर के बाहुबली नेता कहे जाने वाले भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित भी इस बार सियासी संकट से जूझ रहे हैं। गुड्डू पंडित को न तो कहीं से टिकट मिला और न ही उनके भाई मुकेश शर्मा को प्रत्याशी बनाया गया। बता दें कि गुड्डू पंडित ने दिल्ली में हाल ही में सपा की सदस्यता ग्रहण की थी। सपा और बसपा से विधायक रहने वाले गुड्डू पंडित बुलंदशहर की सियासत में दिग्गज माने जाते हैं। लेकिन इस बार उन्हें किसी भी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं बनाया है।

इमरान मसूद: पिछले 20 सालों से सहारनपुर जिले और पश्चिमी यूपी की मुस्लिम सियासत का बड़ा चेहरा इमरान मसूद को इस बार किसी पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। इस वजह से वो टिकट की भागम भाग में लगे हुए हैं। ऐसे में अपना सियासी भविष्य को बचाए रखने को लेकर उनके सामने चुनौती खड़ी हो गई है।

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