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UP Election 2022: अब तक बीजेपी के 195 उम्मीदवारों में 60% पिछड़े और दलितों को टिकट, जानें क्या हैं मायने

बीजेपी ने अभी तक 17% विधायकों के टिकट काटे हैं और कई नए चेहरों को मौका दिया है। योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर शहर और केशव मौर्य को सिराथू से मैदान में उतारा गया है।

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बीजेपी ने आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में 60% टिकट पिछड़े दलितों को दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और सभी पार्टियों ने लगभग चौथे चरण तक के टिकट भी फाइनल कर दिए हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश चुनाव 7 चरणों में हो रहा है और 10 मार्च को नतीजे आएंगे। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश चुनाव में पहले ,दूसरे ,तीसरे और चौथे चरण के लिए 195 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। साथ ही बीजेपी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सीट की भी घोषणा कर दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की गोरखपुर शहर सीट से लड़ेंगे जबकि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी की सिराथू सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

17% विधायकों के टिकट काटे गए: पहले ,दूसरे ,तीसरे और चौथे चरण में कुल 231 सीटों पर चुनाव होंगे और बीजेपी ने 195 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने अभी तक अपने 32 विधायकों के टिकट काटे हैं और नए चेहरों को मौका दिया है। बीजेपी ने जातीय समीकरण का भी काफी ध्यान रखा है और पिछड़ों को टिकट बंटवारे में सबसे अधिक तरजीह दी गई है। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारण बीजेपी ने ज्यादा टिकट नहीं काटे हैं। हालांकि अभी तक की सूची में 17% विधायकों के टिकट काटे जा चुके हैं।

पिछड़ों को तरजीह : बीजेपी ने टिकट बंटवारे में जातीय समीकरण का काफी ध्यान रखा है और पिछड़े समाज और दलित समाज को टिकट बंटवारे में तरजीह दी गई है। भाजपा की ओर से जारी सूची में अब तक 115 टिकट पिछड़े और दलित समाज के उम्मीदवारों को मिला है। 77 टिकट ओबीसी समाज के लोगों को जबकि 38 टिकट एससी समाज के लोगों को बीजेपी ने दिया है। इस तरह अगर हम देखें तो 59% टिकट बीजेपी ने पिछड़े और दलित समाज के उम्मीदवारों को दिया है। वहीं बीजेपी ने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों पर भी भरोसा जताते हुए 80 टिकट सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को बांटे हैं। इस तरह अगर हम देखें तो 41% टिकट बीजेपी ने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को दिए हैं। वहीं पहली लिस्ट में ही बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में जाटों को साधने के लिए 16 जाट उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

14% महिलाओं को टिकट: बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की सूची है महिलाओं का भी ध्यान रखा है। बीजेपी ने 26 महिलाओं को भी टिकट दिया है। यानी बीजेपी ने कुल 14% टिकट महिलाओं को दिया है।

कानपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर को टिकट: बीजेपी ने अपनी लिस्ट में कानपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर असीम अरुण को भी टिकट दिया है। असीम अरुण को बीजेपी ने कन्नौज एससी सीट से बीजेपी का उम्मीदवार बनाया है। कुछ दिन पहले ही असीम अरुण ने वीआरएस लेकर राजनीति में प्रवेश किया है।

चर्चित उम्मीदवारों के भी टिकट कटे: बीजेपी ने अब तक 32 विधायकों के टिकट काटे हैं ,इसमें कुछ चर्चित नाम भी हैं। बरेली कैंट से बीजेपी ने राजेश अग्रवाल को टिकट नहीं दिया तो वहीं पर बरेली के बिथरी चैनपुर से चर्चित विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल का भी टिकट बीजेपी ने काटा है। अमरोहा से विधायक संगीता चौहान को भी बीजेपी ने इस बार टिकट नहीं दिया तो ही फतेहाबाद से जितेंद्र वर्मा का भी टिकट काट दिया। गोरखपुर शहर से बीजेपी ने 4 बार के विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल का टिकट काटा है। हालांकि उनकी जगह पर पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को उतारने का फैसला किया है।

दलबदलुओं को भी टिकट: भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सूची में पाला बदलने वाले विधायकों को भी स्थान दिया है। समाजवादी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए विधानसभा उपाध्यक्ष नितिन अग्रवाल को बीजेपी ने हरदोई से उम्मीदवार बनाया है। रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह को बीजेपी ने रायबरेली सदर से टिकट दिया है। रायबरेली के हरचंदपुर से कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए विधायक राकेश सिंह को बीजेपी ने टिकट दिया है। तो वहीं मुलायम सिंह यादव के समधी हरिओम यादव को सिरसागंज से टिकट दिया है। बीएसपी में बीजेपी से आए अनिल सिंह को बीजेपी ने उन्नाव के पुरवा से टिकट दिया है। हाथरस की सादाबाद सीट से विधायक रामवीर उपाध्याय ने कुछ दिन पहले ही बीजेपी की सदस्यता ली है। पार्टी ने उन्हें भी सादाबाद से टिकट दिया है।

बीजेपी की ओर से अभी तक जारी हुई सूची में करीब 60% टिकट पिछड़े और दलितों को मिला है। इससे बीजेपी ने एक संदेश देने की कोशिश की है कि भारतीय जनता पार्टी पिछड़ों के साथ है। पिछले कुछ हफ्तों में पिछड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारण बीजेपी को नुकसान का डर सता रहा था। हालांकि अब बीजेपी ने पिछड़ों को अधिक संख्या में टिकट देकर डैमेज कंट्रोल करने की पूरी कोशिश की है।

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