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UP Election 2022: बाजी पलट सकती हैं ये 47 सीटें, पिछली बार इन पर हार-जीत का था 5000 से भी कम का अंतर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी दलों की नजरें उन सीटों पर रहेंगी जहां पिछली बार जीत हार का अंतर काफी कम वोटों का था।

यूपी चुनाव के लिए सभी दल पूरा जोर लगा रहे हैं। (सांकेतिक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज चुका है। पूरे देश की नजर खासकर उत्तर प्रदेश के चुनाव पर गड़ी है। यूपी का चुनाव 7 चरणों में होगा और 10 मार्च को नतीजे आएंगे। 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो तब बीजेपी को सबसे अधिक 312 सीटें मिली थीं, जबकि समाजवादी पार्टी महज 47 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं पर बसपा को 19 और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं।

पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना दल (एस) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया था। अपना दल (एस) को 9 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 4 सीटें मिली थीं। इस तरह बीजेपी गठबंधन को कुल 325 सीटों पर जीत हासिल हुई थी और प्रदेश में सरकार बनी थी। हालांकि इस बार स्थिति अलग है और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सपा के साथ गठबंधन में है।

47 सीटें साबित हो सकती हैं किंगमेकर: उत्तर प्रदेश के पिछले चुनाव को अगर हम देखें तो पाएंगे कि 47 विधानसभा क्षेत्र ऐसे थे जहां पर जीत-हार का अंतर 5000 वोटों से भी कम था। ये सीटें 2022 विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए और चुनाव की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। इन 47 सीटों में बीजेपी को 23, समाजवादी पार्टी को 13 और बीएसपी को 8 सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। वहीं अपना दल (एस), कांग्रेस और आरएलडी को भी 1-1 सीट मिली थी। 

8 सीटों पर जीत-हार का अंतर 1000 से भी कम था: इसी तरह, पिछले चुनाव में 8 सीटों पर जीत हार का अंतर 1000 वोटों से भी कम था। इनमें से डुमरियागंज, मीरापुर, रामपुर मनिहारान, मोहम्मदाबाद गोहाना (एससी) और श्रावस्ती सीट पर बीजेपी को जीत मिली थी। वहीं बीएसपी को मांट और मुबारकपुर और समाजवादी पार्टी को मोहनलालगंज सीट पर जीत मिली थी। 

वहीं 9 सीटों पर जीत हार का अंतर 1000 से 2000 वोटों के बीच था। इन सीटों में  भदोही, टांडा, महमूदाबाद और भरथना सीट पर बीजेपी को जीत मिली थी। वहीं दुद्धी सीट पर बीजेपी की सहयोगी अपना दल (एस) को जीत मिली थी। जबकि मटेरा, बांसडीह और ऊंचाहार सीट पर समाजवादी पार्टी और पट्टी सीट पर बीएसपी को जीत मिली थी। 

इसी तरह, 10 सीटों पर जीत हार का अंतर 2000 से 3000 वोटों के बीच था। इन सीटों में गैंसरी, कांठ, फरेंदा और बदलापुर सीट पर बीजेपी को जीत मिली थी। नजीबाबाद, अतरौलिया और कन्नौज सीट पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी। जबकि सिधौली , लालगंज और प्रतापपुर सीट पर बीएसपी को जीत मिली थी। 

12 सीटों पर जीत हार का अंतर 3000 से 4000 वोटों के बीच था। इन सीटों में मुरादाबाद नगर, आंवला, धौरहरा, महोली , पटियाली और बिधुना सीट पर बीजेपी  को जीत मिली थी। जंगीपुर, धौलाना पर एसपी को जीत मिली थी। दीदारगंज, चिल्लूपार सीट पर बीएसपी को जीत मिली थी। वहीं हरचंदपुर पर कांग्रेस और  छपरौली सीट पर आरएलडी को जीत मिली थी।

8 सीटों पर जीत हार का अंतर 4000 से 5000 वोटों के बीच था। इन सीटों में नकुर, मंझनपुर, शाहाबाद और गोरखपुर ग्रामीण सीट पर बीजेपी को जीत मिली थी। जबकि मछलीशहर, इसौली, सहसवान और सहारनपुर नगर सीट पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी।

पाला बदलने से बदली सियासी तस्वीर: इस बार कई विधायकों ने पाला भी बदल लिया है। जैसे नकूर सीट से विधायक धर्मपाल सिंह सैनी ने अब समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। वहीं धौरहरा सीट से विधायक बाला अवस्थी ने भी समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। आने वाले विधानसभा चुनाव में जब उत्तर प्रदेश के 15 करोड़ 93 लाख मतदाता अपना फैसला सुनाएंगे तो उनमें यह 47 सीटें भी काफी महत्वपूर्ण होगी।

जो भी दल इन 47 सीटों में अधिक सीटें जीतेंगे उनके लिए सरकार बनाना आसान हो सकता है। हालांकि इन 47 सीटों पर कौन जीतेगा इसका फैसला आने वाले 10 मार्च को ही पता चलेगा।

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