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डिंपल यादव ने जहां भी किया प्रचार, रफ्तार से दौड़ी साइकिल, पढ़ें कौन-कौन सीटों पर साबित हुईं गेम चेंजर

उन्होंने पांच सीटों पर प्रचार किया। इनमें से तीन तो केवल कौशाम्बी जिले की हैं। इन तीनों सीटों पर सपा के प्रत्याशी जीत गए। एक सीट पर तो खुद राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रत्याशी थे, लेकिन वहां भी समाजवादी पार्टी मैदान में अपने झंडे गाड़ने में सफल रही।

डिंपल यादव ने जहां भी किया प्रचार, रफ्तार से दौड़ी साइकिल, पढ़ें कौन-कौन सीटों पर साबित हुईं गेम चेंजर
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव कौशाम्बी के सिराथू की एक सभा में लोगों का अभिवादन करते हुए। (फोटो- पीटीआई)

हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी अपनी उम्मीदों के मुताबिक सीटें जीत नहीं सकी। चुनाव से पहले पार्टी खुद को बहुमत में आने के दावे कर रही थी। उसका मानना था कि इस बार जनता समाजवादी पार्टी की सरकार को सत्ता में ले आएगी और भाजपा को विपक्ष में भेजेगी, लेकिन हुआ इसका उलटा और भाजपा की सत्ता बरकरार रही। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से जिन नेताओं ने प्रचार का जिम्मा संभाला, उसमें अखिलेश यादव की पत्नी और पार्टी की वरिष्ठ नेता तथा कन्नौज की सांसद डिंपल यादव भी शामिल रहीं।

डिंपल यादव ने जहां-जहां और जिन-जिन सीटों पर प्रचार किया, वहां के एक प्रत्याशी को छोड़कर हर जगह पार्टी को जीत मिली। उन्होंने पांच सीटों पर प्रचार किया। इनमें से तीन तो केवल कौशाम्बी जिले की हैं। इन तीनों सीटों पर सपा के प्रत्याशी जीत गए। एक सीट पर तो खुद राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रत्याशी थे, लेकिन वहां भी समाजवादी पार्टी मैदान में अपने झंडे गाड़ने में सफल रही। यह सीट थी सिराथू और यहां समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी पल्लवी पटेल ने केशव प्रसाद मौर्य को 7337 वोटों से पराजित कर दिया।

इसके बाद सांसद डिंपल यादव ने कौशाम्बी जिले के ही चायल सीट पर अपनी पार्टी की प्रत्याशी पूजा पाल के लिए सभा को संबोधित किया। डिंपल का जादू यहां भी चला और पूजा पाल ने अपना दल के नागेंद्र पाल को 13209 वोटों से पटकनी दी। पूजा पाल पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी हैं और वह इससे पहले बहुजन समाज पार्टी की ओर से कई बार विधायक बन चुकी हैं।

कौशाम्बी जिले में डिंपल की तीसरी सभा मंझनपुर में थी। मंझनपुर जिले का मुख्यालय भी है। यहां से पार्टी के प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज चुनाव मैदान में थे। वे सपा में आने से पहले बहुजन समाज पार्टी से विधायक रहे हैं।

इंद्रजीत सरोज के खिलाफ भाजपा के लाल बहादुर थे। वे मजबूत प्रत्याशी थे। लेकिन डिंपल की सभा के बाद इंद्रजीत सिंह सरोज की स्थिति मजबूत हो गई और चुनाव में इंद्रजीत ने लाल बहादुर को 23878 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया।

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