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टकरा रहे ‘रिश्ते’, परिवारों और राजपरिवार में खींचतान

लखनऊ में सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र से पति-पत्नी की भाजपा के टिकट की दावेदारी के बीच अब अमेठी से राजघराने की दो बहुओं की दावेदारी सत्तारूढ़ दल की परेशानी बढ़ा सकती है।

गरिमा सिंह, अमिता सिंह। फाइल फोटो।

लखनऊ में सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र से पति-पत्नी की भाजपा के टिकट की दावेदारी के बीच अब अमेठी से राजघराने की दो बहुओं की दावेदारी सत्तारूढ़ दल की परेशानी बढ़ा सकती है। 2017 के विधानसभा चुनाव में अमेठी में गरिमा सिंह (भाजपा) और अमिता सिंह (कांग्रेस) आमने-सामने थीं। इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी दूसरी पत्नी अमिता सिंह भी यहां से पार्टी के टिकट की दावेदार हैं।

नजदीकी लोगों के मुताबिक, संजय सिंह अमेठी विधानसभा से अमिता को भाजपा का टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत हैं, जबकि गरिमा अपना टिकट बचाने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं। संजय सिंह ने पहली पत्नी गरिमा सिंह को तलाक देकर 1995 में अमिता सिंह से शादी कर ली थी। अमिता सिंह 2002 में भाजपा तथा 2007 में कांग्रेस से अमेठी की विधायक चुनी गईं। वर्ष 2017 के चुनाव में अमेठी में गरिमा सिंह (भाजपा) और अमिता सिंह कांग्रेस की उम्मीदवार थीं। गरिमा सिंह ने 64,226 मत पाकर यह चुनाव जीत लिया था।

चुनावी टिकट को लेकर दावेदारी के लिए गाजीपुर जिले के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार में भी अनबन की खबरें हैं। मोहम्मदाबाद क्षेत्र के भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की 2005 में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी समेत कई अपराधियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ। उसके बाद हुए उपचुनाव में कृष्णानंद की पत्नी अलका राय विधायक चुनी गईं। 2017 में भी भाजपा के टिकट पर अलका राय ने मुख्तार के भाई सिबगतुल्ला अंसारी को पराजित किया था।

सूत्रों के अनुसार, इस सीट पर अलका राय अपने पुत्र पीयूष राय को टिकट दिलाना चाहती हैं जबकि कृष्­णानंद राय के भतीजे आनन्द राय भाजपा की यूपी इकाई के सह संपर्क प्रमुख नवीन श्रीवास्तव ने इस संदर्भ में कहा, टिकट मांगने का सबको हक है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता अनुशासित होते हैं और पार्टी जिसके नाम पर फैसला करेगी, उसके साथ सब लोग एकजुट होकर चुनाव प्रचार करेंगे। औरैया जिले के बिधूना विधानसभा क्षेत्र में तीसरे चरण में मतदान होगा जहां से पिता-पुत्री में मुकाबले के आसार साफ दिख रहे हैं।

हाल ही में बिधूना के भाजपा के विधायक विनय शाक्य ने पार्टी नेतृत्व पर पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए भाजपा से इस्तीफा देकर सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उनके इस कदम का उनकी पुत्री रिया शाक्­य ने विरोध किया। रिया ने पत्रकारों से कहा, ‘मेरी दादी और चाचा ने मेरे बीमार पिताजी को जबरन सपा की सदस्यता दिलवाई है।’ सोनभद्र जिले के घोरावल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक अनिल मौर्य हैं जबकि हाल ही में वाराणसी के शिवपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और अनिल के भाई उदयलाल मौर्य भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। अभी दोनों में से किसी की उम्मीदवारी घोषित नहीं हुई है, लेकिन चर्चा यही है कि उदयलाल मौर्य सपा से टिकट मिलने पर अपने विधायक भाई के खिलाफ भी किस्मत आजमा सकते हैं।

चौथे चरण में सीतापुर जिले में मतदान होना है जहां से पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रामलाल राही के पुत्र सुरेश राही हरगांव विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं और पार्टी ने उनको उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जबकि उनके बड़े भाई एवं पूर्व विधायक रमेश राही समाजवादी पार्टी से टिकट मांग रहे हैं। अभी दस जनवरी को सहारनपुर के प्रभावशाली मुसलिम नेता व पूर्व विधायक इमरान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने का फैसला सुनाया तो उसी दिन उनके भाई नोमान मसूद ने बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली और पार्टी ने उन्हें शनिवार को गंगोह से उम्मीदवार घोषित कर दिया।

आदित्यनाथ सरकार में महिला कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाति सिंह और उनके पति एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह के बीच भी ऐसी ही स्थिति है। स्वाति सिंह सरोजनी नगर विधानसभा क्षेत्र से 2017 में पहली बार चुनाव जीती थीं और इस बार भी भाजपा के टिकट की प्रबल दावेदार हैं जबकि उनके पति दयाशंकर ंिसह भी इस सीट से खुद के लिए टिकट चाहते हैं।

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