UP Assembly Elections 2017: Stepping into Mukhtar Ansari shoes is son Abbas ansari challenge - यूपी चुनाव 2017: घोसी में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास की परीक्षा, 77 से नहीं जीता है कोई मुस्लिम, 2012 में पिता की भी हुई थी हार - Jansatta
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UP Assembly Elections 2017: घोसी में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास की परीक्षा, 77 से नहीं जीता है कोई मुस्लिम, 2012 में पिता की भी हुई थी हार

मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास मौजूदा सपा विधायक सुधाकर सिंह और भाजपा के फागु चौहान के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

Author March 2, 2017 8:21 AM
घोसी में चुनाव प्रचार करते अब्बास अंसारी। ( Photo Source: Indian Express)

गैंगस्टर से बसपा उम्मीदवार बने मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचार करने की मंजूरी नहीं दी गई। मुख्तार परिवार पर अब जिस सीट से वे चुनाव लड़ रहे हैं, वहां के अलावा उनके बेटे और विधायक भाई के लिए मुस्लिम वोटों को बसपा के खेमे में करने की जिम्मेदारी आ गई है। मुख्तार की मऊ में पकड़ है, जहां से वे चार बार जीते हैं। इस सीट से साल 1969 से मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतता आया है। उनके 25 साल के बेटे अब्बास घोसी से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां से कोई भी मुस्लिम उम्मीदवार साल 1977 से चुनाव नहीं जीता है। मुख्तार के बड़े भाई सिबगातुल्लाह मोहम्मदाबाद से चुनाव लड रहे हैं, जो कि इनका पैतृक घर है। यहां से उनके भाई दो बार विधायक रह चुके हैं। एक बार इनके दूसरे भाई अफजल भी यहां से जीत चुके हैं।

बेटा अब्बास मौजूदा सपा विधायक सुधाकर सिंह और भाजपा के फागु चौहान के खिलाफ मैदान में हैं। चौहान तीन बार विधायक रह चुके हैं, वे एक बार बसपा और एक बार भाजपा के टिकट पर भी चुनाव जीत चुके हैं। चार लाख मतदाताओं वाले घोसी क्षेत्र में 75 हजार मुस्लिम और 70 हजार दलित वोट हैं। इसके अलावा 60 हजार वोट राजभर जाति, 45 हजार चौहान जाति और 70 हजार वोट ऊंची जाति के हैं। इसके अलावा ओबीसी जैसे यादव और मल्लाह वोट यहां कम हैं।

जहां भाजपा हिंदू वोटों को अपनी ओर करने की उम्मीद कर रही हैं, वहीं अब्बास के ऊंची जाति और ओबीसी वोट सपा, बसपा और भाजपा में बंट रहे हैं। सपा उम्मीदवार क्षत्रिय है और भाजपा उम्मीदवार लोनिया जाति का ओबीसी है। भाजपा राजभर जाति से भी सपोर्ट की उम्मीद कर रही है। भाजपा को ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का सहयोग प्राप्त है।

अब्बास को उम्मीद है कि उसे मुस्लिम और दलितों के अलावा दूसरे समूहों की भी सपोर्ट मिलेगी, क्योंकि उनका परिवार क्षेत्र में ‘सामंतवाद’ से लड़ता रहा है।’ उनका कहना है, ‘हम लोगों को हर जाति से 15 से 20 फीसदी वोट मिलेगा। हम लोग सामंतवाद के खिलाफ लोगों का समर्थन करते रहे हैं। हम लोग गरीब लोगों की बड़े लोगों के खिलाफ लडाई में साथ देते रहे हैं।’ मुख्तार ने साल 2012 में खुद इस सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव हार गए। वे सिंह और चौहान के बाद तीसरे नंबर पर रहे थे।

मुख्तार के बेटे ने अपने पिता की तस्वीर बैनर और पोस्टर पर लगा रखी है। अब्बास को कहना है कि वे अपने पिता को मिस कर रहे हैं। अब्बास कहते हैं, ‘यह पहली बार हुआ है कि चुनाव आयोग किसी उम्मीदवार की पैरोल को रद्द करने के लिए कोर्ट पहुंचा है। यह पहली बार है भाजपा, सपा और सीबीआई के वकील उनकी रिहाई के लिए एकजुट हो गए।’

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