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यूपी विधानसभा चुनाव में मथुरा की बड़ी अहमियत, भाजपा के लिए मुश्किल हो सकती है इस सीट पर जीत!

मथुरा में बड़ी आबादी मुसलामानों की भी है। मथुरा में करीब 15 से 17 फीसदी मुसलमान हैं। अधिकांश मुस्लिम मतदाता मानते हैं कि बीजेपी की सरकार में विकास के कोई काम नहीं हुए हैं और महामारी की मार यहां के पर्यटन पर भी पड़ी है।

मथुरा में घर घर जाकर प्रचार करते गृह मंत्री अमित शाह (फोटो: ट्विटर/ अमित शाह)

इस बार के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में मथुरा की अहमियत काफी बढ़ गई है। भाजपा अयोध्या और वाराणसी के बाद इसे हिंदुत्व के नए किले के रूप में पेश करने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को अमित शाह ने मथुरा में जनसंपर्क अभियान किया। हालांकि पिछले बार के विधानसभा चुनाव में मथुरा जिले में प्रचंड जीत दर्ज करने वाली भाजपा को इस बार काफी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं मथुरा विधानसभा सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार को विपक्षी पार्टियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।

भगवान कृष्ण का जन्मस्थान मथुरा में ही है। बीते दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अयोध्या और काशी के बाद मथुरा में भी कायाकल्प करने की बात कही है। योगी आदित्यनाथ पांच साल के कार्यकाल में 18 बार मथुरा आ चुके हैं। मंदिर परिसर में ही  शाही ईदगाह मस्जिद है जिसे मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। यहां भी अयोध्या की तरह ही मस्जिद को हटाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।

यहां के लोगों के मंदिर का विकास काफी भावुक मुद्दा है। इसलिए कई लोगों का मानना है कि भाजपा सरकार आने की वजह से ही यहां मरम्मत कार्य हो रहा है। भाजपा के मौजूदा विधायक श्रीकांत शर्मा ने  एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि यह सरकार सनातन धर्म वालों की है इसलिए मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है जबकि दूसरे दल के लोग इस ओर ध्यान नहीं देते थे।

हालांकि मथुरा में बड़ी आबादी मुसलामानों की भी है। मथुरा में करीब 15 से 17 फीसदी मुसलमान हैं। अधिकांश मुस्लिम मतदाता मानते हैं कि बीजेपी की सरकार में विकास के कोई काम नहीं हुए हैं और महामारी की मार यहां के पर्यटन पर भी पड़ी है। हालिया दिनों में मथुरा में बढ़ी भाजपा नेताओं की गतिविधियों को लेकर मथुरा के पूर्व विधायक प्रदीप माथुर का मानना है कि बीजेपी के लिए कृष्ण जन्मभूमि केवल बहाना है। भाजपा नेता आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं और इस सरकार ने विकास कार्य नहीं किया है।

बता दें कि पिछले बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा के श्रीकांत शर्मा ने कांग्रेस के प्रदीप माथुर को एक लाख के अंतर से हराया था। इस बार के चुनाव में भाजपा ने फिर से श्रीकांत शर्मा को ही मैदान में उतारा है और कांग्रेस ने प्रदीप माथुर का टिकट बरक़रार रखा है। रालोद गठबंधन ने इस बार देवेन्द्र अग्रवाल को टिकट दिया है।  

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