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UAE में भारतीय ईसाई बने सद्भावना की मिसाल, कर्मचारियों के लिए बनवाई मस्जिद, 800 को करा रहे इफ्तार

जब दुनिया भर के देश अतिवाद के कारण आए दिन होने वाली हिंसा से जूझ रहे हैं, ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात में मस्जिद बनाने और रमजान के पावन महीने में करीब 800 कर्मियों को इफ्तार कराने वाले एक भारतीय ईसाई धार्मिक सद्भावना की मिसाल पेश कर रहे हैं।

Author Updated: May 9, 2019 5:44 PM
रमजान के पावन महीने में करीब 800 कर्मियों को इफ्तार कराने वाले एक भारतीय ईसाई धार्मिक सद्भावना की मिसाल पेश कर रहे हैं। केरल के कायमकुल के रहने वाले साजी चेरियन (49) ने फुजैरा में मुस्लिम कर्मियों के लिए पिछले साल एक मस्जिद बनवाई थी।

जब दुनिया भर के देश अतिवाद के कारण आए दिन होने वाली हिंसा से जूझ रहे हैं, ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात में मस्जिद बनाने और रमजान के पावन महीने में करीब 800 कर्मियों को इफ्तार कराने वाले एक भारतीय ईसाई धार्मिक सद्भावना की मिसाल पेश कर रहे हैं। केरल के कायमकुल के रहने वाले साजी चेरियन (49) ने फुजैरा में मुस्लिम कर्मियों के लिए पिछले साल एक मस्जिद बनवाई थी। उन्होंने यह मस्जिद र्किमयों के उस आवासीय स्थल पर बनवाई है जो उन्होंने 53 कंपनियों को किराए पर दिया है।

चेरियन ने देखा कि कर्मी नमाज पढ़ने के लिए निकटवर्ती मस्जिद में जाते हैं जिसके लिए उन्हें अपनी कमाई टैक्सी किराए पर खर्च करनी पड़ती है। यह देखने के बाद उन्होंने मरियम उम्म ईसा मस्जिद का निर्माण करवाया।  ‘गल्फ न्यूज’ ने बताया कि कुछ सौ दिरहम के साथ 2003 में यूएई पहुंचे चेरियन कई कंपनियों के र्किमयों एवं अधिकारियों समेत करीब 800 लोगों को इफ्तार कराते हैं।

समाचार पत्र ने चेरियन के हवाले से कहा, ‘‘मस्जिद पिछले साल रमजान की 17वीं रात को खुली थी। इसलिए, मैं केवल शेष दिनों के लिए ही इफ्तार करवा पाया था। इस साल से, मैं हर रोज ऐसा करूंगा।’ मस्जिद में बुधवार को इफ्तार करने वाले पाकिस्तानी बस चालक अब्दुल कायूम (63) ने कहा, ‘‘दुनिया को चेरियन जैसे लोगों की आवश्यकता है। यदि दुनिया में उनके जैसे लोग नहीं होंगे, तो दुनिया खत्म हो जाएगी। हम उनके लिए दुआ करते हैं।’’ एक कंपनी में भारतीय सहायक प्रबंधक वजास अब्दुल वाहिद ने कहा कि इलाके में 50 से अधिक कंपनियों के कर्मी रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वरिष्ठ कर्मी एवं श्रमिक अलग अलग आवास में रहते हैं, लेकिन हम जब यहां आते हैं, तब हम बराबर होते हैं। हम साथ नमाज पढ़ते हैं और इफ्तार करते हैं।’’

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