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Lok Sabha Election 2019: हिमाचल के दो पूर्व सैनिकों में कांटे की टक्कर

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): पिछली बार मोदी लहर के अलावा धूमल का जलवा भी चला था। इस बार जयराम ठाकुर का कितना जादू चलेगा यह महत्त्वपूर्ण है। 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर व धूमल के जलवे के कारण भाजपा सांसद वीरेंद्र कश्यप को 38 लाख 5 हजार 973 मत मिले थे।

Author May 17, 2019 1:26 AM
अमित शाह के साथ जयराम ठाकुर

ओमप्रकाश ठाकुर

Lok Sabha Election 2019: राष्ट्रवाद, सेना और मोदी के नाम पर हो रही राजनीति के बीच शिमला संसदीय हलके में भाजपा और कांग्रेस के टिकट पर पूर्व फौजी कड़े मुकाबले में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी कर्नल धनीराम शांडिल थलसेना से तो भाजपा उम्मीदवार सुरेश कश्यप वायुसेना से सेवानिवृत हुए हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार होने से भाजपा उम्मीदवार सुरेश कश्यप का पलड़ा भारी नजर आ रहा है लेकिन राजनीतिक अनुभव व कांग्रेस के गढ़ होने के हिसाब से कांग्रेस उम्मीदवार कर्नल धनीराम शांडिल कहीं भी पीछे नजर नहीं आ रहे हंै। इस बार शिमला हलके में भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल नहीं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर काम कर रहे हैं।

पिछली बार मोदी लहर के अलावा धूमल का जलवा भी चला था। इस बार जयराम ठाकुर का कितना जादू चलेगा यह महत्त्वपूर्ण है। 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर व धूमल के जलवे के कारण भाजपा सांसद वीरेंद्र कश्यप को 38 लाख 5 हजार 973 मत मिले थे जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लाल ब्राक्टा को 30 लाख 1 हजार 786 मत मिले थे। वे वीरभद्र सिंह के वफादार होने के बावजूद हार गए थे। शिमला के 17 विधानसभा हलकों में से भाजपा के आठ ही विधायक हैं जबकि कांग्रेस को एकवामपंथी विधायक समेत नौ विधायकों का आसरा है। जिला शिमला के सात विधानसभा हलके शिमला संसदीय हलके में हैं व तीन पर भाजपा व तीन पर कांग्रेस का कब्जा है। एक सीट वामपंथी विधायक के कब्जे में है।

जिला शिमला में पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रचार समिति के अध्यक्ष वीरभद्र सिंह का दबदबा है। वे 2017 के विधानसभा चुनावों में जिला सोलन के अर्की हलके से जीते थे। जिला सोलन में कांग्रेस के कब्जे में तीन सीटें है। कांग्रेस उम्मीदवार धनीराम शांडिल सोलन हलके से ही कांग्रेस विधायक है। उन्हें अर्की से वीरभद्र सिंह व सोलन में खुद के विधायक होने का फायदा मिलेगा। 2014 के चुनाव में भाजपा सांसद वीरेंद्र कश्यप को जिला सिरमौर से बहुत ज्यादा बढ़त मिली थी। इस बार भाजपा उम्मीदवार सुरेश कश्यप जिला सिरमौर के पच्छाद हलके से विधायक हैं।

जिला सिरमौर में पांवटा, नाहन और पच्छाद से अगर पिछली लोकसभा चुनावों की तरह ही बढ़त मिली तो सुरेश कश्यप को राहत होगी। पिछले चुनावों में अकेले पांवटा हलके से ही भाजपा को 17 हजार मतों की बढ़त मिल गई थी जबकि नाहन से 9 हजार से ज्यादा मतों की बढ़त थी। लेकिन इस बार स्थितियां बदली हुई हैं। 2014 की तरह मोदी लहर नजर नहीं आ रही है। जिला सिरमौर के गिरि पार में हाटी समुदाय भाजपा की केंद्र सरकार से खफा है।

वीरेंद्र कश्यप के कामकाज से भी ज्यादा लोग प्रभावित नहीं है। इसलिए उनका टिकट काटकर सुरेश कश्यप को देना पड़ा। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी इस बार मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस कुछ मुखर हुई है, जबकि पिछली बार केंद्र की यूपीए सरकार और हिमाचल में वीरभद्र का भ्रष्टाचार हर किसी के जुबान पर था व धूमल व उनकी टीम बेहद आक्रामक थी। लेकिन इस बार जयराम ठाकुर और उनकी टीम हमलावर नहीं है। केवल राष्टÑीय मसलों पर ही ध्यान दिया जा रहा है।

इसके बावजूद प्रदेश में भाजपा सरकार होने से सुरेश कश्यप को कुछ लाभ है। ऐसे में दोनों उम्मीदवारों में कड़ा मुकाबला है। पिछली बार कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लाल ब्राक्टा का रोहड़ू के अलावा बाकी कहीं भी दखल नहीं था। इस बार ऐसी स्थिति भाजपा के सुरेश कश्यप की है। वे पच्छाद से दूसरी बार विधायक बन कर जीते हैं। जबकि कांग्रेस के कर्नल धनीराम शांडिल दो बार सांसद रहे हैं। पहली बार वे 1999 में भाजपा-हिविकां गठबंधन के उम्मीदवार थे व सांसद बने थे। इसके बाद सुखराम की हिविकां का जब कांग्रेस में विलय हुआ तो वे कांग्रेस के टिकट पर 2004 में दोबारा लोकसभा का चुनाव जीत गए। इसके बाद वह 2012 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह सरकार में मंत्री भी रहे।

दोनों ही उम्मीदवार उच्च शिक्षित
खास बात यह है कि कर्नल धनीराम शांडिल पीएचडी है तो सुरेश कश्यप एमफिल हैं। उन्होंने तीन विषयों में एमए कर रखा है।

कुल मतदाता- 12 लाख 59 हजार85
महिला मतदाता -6 लाख 4 हजार 822
पुरुष मतदाता – 6 लाख 54 हजार 248
तृतीय लिंग मतदाता -15
मतदान केंद्र -2006
पिछली बार का मतदान
फीसद 55.73 फीसद

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