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केसीआर ने जताई उपप्रधानमंत्री बनने की ख्वाहिश, डीएमके चीफ से मुलाकात के बाद बदल रहा है राजनीतिक सीन

तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने सोमवार को डीएमके चीफ एमके स्टालिन से मुलाकात के बाद रिजनल पार्टियों को बड़ा हक मांगने की बात कही है। राव ने उपप्रधानमंत्री पद मांगने की ओर इशारा किया है।

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन और टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर), (फोटो सोर्स: PTI)

तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव देश में अगली सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मगर इस दौरान बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और संभावनाओं के मद्देनज़र उनकी नज़रें उपप्रधानमंत्री पद पर टिकी हैं। लोकसभा चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान केसीआर ने देश के कई क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकात की। वे एनडीए तथा यूपीए के इतर तीसरा मोर्चा बनाने की जुगत में लगे हुए हैं। एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने ऐसे कई संकेत दिए हैं कि वह उप-प्रधानमंत्री बनने के लिए उत्सुक हैं। सूत्र के अनुसार, “केसीआर ने कहा कि क्षेत्रीय दलों को एक साथ आना होगा और सत्ता में बड़े हिस्सेदारी की मांग करनी चाहिए। सिर्फ कैबिनेट बर्थ (मंत्रालय) ही नहीं, बल्कि उससे ऊपर का कुछ मिलना चाहिए। उन्हें नीतिगत फैसलों और यहां तक कि राज्यपालों की नियुक्ति करने में भी भागीदारी मिलनी चाहिए।”

एक त्रिशंकु संसद के मामले में सरकार के गठन में किसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी, इसका पता तो लोकसभा चुनाव का रिजल्ट जारी होने के बाद ही चलेगा। सूत्रों ने बताया कि राव की डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के साथ बैठक एक अलग विकल्प के मद्देनजर हुई है। फिलहाल स्टालिन तमिलनाडु में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं। केसीआर को भाजपा का नजदीकी माना जाता है। वजह ये है कि उन्होंने इससे पहले संसद में वोटिंग के दौरान भाजपा का समर्थन किया था। हालांकि, कांग्रेस के साथ उन्होंने कभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बातचीत नहीं की है। सूत्रों के अनुसार, सोमवार की बैठक में, स्टालिन ने राव को कांग्रेस को समर्थन करने को कहा। हालांकि, राव ने न तो इस पर सहमति जताई और न हीं इसे खारिज किया। बता दें कि स्टालिन दो बार प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी के नाम पर सहमति जताई है।

राव उम्मीद कर रहे हैं कि कांग्रेस के साथ गठबंधन भी अधिक सही होगा, खासकर यदि वह एक क्षेत्रीय समूह के प्रमुख के रूप में पर्याप्त संख्या में सीटें ला सकते है। केसीआर इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिन्नरई विजयन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास पहुंच चुके हैं। उन्हें आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगनमोहन रेड्डी ने भी समर्थन देने का वादा किया है। सूत्र बताते हैं कि यदि केसीआर को तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदश में समर्थन मिल जाता है तो उनके पास काफी संख्या में सीटें हो जाएगी और तब वे राष्ट्रीय राजनीति में उच्च पद पर आसीन होने की महत्वकांक्षा रखने वाली ममता बनर्जी और मायावती से ज्यादा सीटें ला सकते हैं।

तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं। तेलंगाना में पिछली बार राव ने 17 सीटें जीती थी। उनके पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 25 सीटें है। केरल में 20 सीटें और कर्नाटक में 28 सीटें है। ये कुल 129 सीट है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 80 और बंगाल में 42 सीट है।

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