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भाजपा, गठबंधन व कांग्रेस के बीच तिकोना मुकाबला

शाहजहांपुर में वैसे तो सभी दल भितरघात का शिकार हैं लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा सबसे ज्यादा भितरघातियों से घिरी है। भाजपा उम्मीदवार को केवल मोदी मैजिक का ही सहारा है वहीं गठबंधन उम्मीदवार अमर चन्द्र जौहर बसपा व सपा वोटरों की बदौलत चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश कर रहे हैं।

Author Published on: April 26, 2019 2:33 AM
मतदान के बाद स्याही लगाता कर्मचारी। फोटो सोर्स- जनसत्ता

हेमंत डे

शाहजहांपुर लोकसभा की सीरत और सूरत में इतने सालों में कोई खास तब्दीली नहीं आई है। कहने को यहां कई छोटे-बड़े कारखाने हैं। बेरोजगारी काफी है। कभी यहां एशिया की सबसे बड़ी आयुध वस्त्र निर्माणी में 10 हजार से ऊपर कर्मचारी सैनिकों की वर्दियां सीने का कार्य करते थे, आज मात्र डेढ़ से दो हजार कर्मी ही यहां रह गए हैं। यह निर्माणी बंद होने की कगार पर है। दो सरकारी व पांच प्राइवेट चीनी मिलें, एक बिजली कारखाना (रिलायंस), कृभको खाद फैक्ट्री, एक पेपर मिल, एक प्लाईवुड फैक्ट्री समेत तमाम आटा, चावल मिलें स्थापित हैं। जहां अधिकांशत: निविदा आधारित व ठेकेदार कम्पनियों के जरिये एक मासिक वेतन पर ही युवाओं, मजदूरों से कार्य लिया जा रहा है। ढाई दशक पहले यहां कालीन का एक बड़ा कारोबार था लेकिन अब सिर्फ नाम ही रह गया है।

आश्चर्य तो यह कि कभी पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रहे कुंवर जितेंद्र प्रसाद समेत सियासत के बड़े खिलाड़ी बाबू सत्यपाल सिंह यादव के अतिरिक्त केंद्र और राज्य में कई मंत्री भी इस धरती की देन रहे, मगर विकास को दिशा और दशा पर ज्यादा नहीं कर पाए। बता दें कि वर्तमान में यहां के छह विधानसभा क्षेत्र में मात्र एक पर सपा काबिज है। बाकी पांच पर भाजपा का परचम लहरा रहा है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी समेत कुल 14 उम्मीदवार मतदाताओं को रिझाने में दिन रात लगे हैं। शाहजहांपुर में नहरों में टेल तक पानी न पहुंचना, जलालाबाद क्षेत्र में हर वर्ष बाढ़ का कहर, शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार की समस्या मालूम नहीं इस बार मुद्दे का रूप लेगी या फिर मतदाता अपने वोट को धर्म और जाति को सामने रखकर मतदान करेगा?

शाहजहांपुर में वैसे तो सभी दल भितरघात का शिकार हैं लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा सबसे ज्यादा भितरघातियों से घिरी है। भाजपा उम्मीदवार को केवल मोदी मैजिक का ही सहारा है वहीं गठबंधन उम्मीदवार अमर चन्द्र जौहर बसपा व सपा वोटरों की बदौलत चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस उम्मीदवार बह्मस्वरूप सागर धीरे-धीरे मुकाबले में आए हैं। न्हें स्थानीय कांग्रेस नेताओं का बिलकुल सहयोग नहीं मिल रहा है। यहां के कांग्रसी नेता धौहरारा में जितिन प्रसाद को चुनाव लड़ा रहे हैं।

विकास से अछूता
बहरहाल गन्ना, गेहूं, धान और आलू की उपज में प्रदेश का अग्रणी यह जनपद आज भी विकास से अछूता है। शाहजहांपुर लोकसभा की आरक्षित सीट पर चुनावी संग्राम के कारण उम्मीदवार चुस्त तो मतदाता सुस्त नजर आ रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय नेताओं में यहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बसपा प्रमुख मायावती की जनसभाएं भी हो चुकी हैं, जिनमें कोई खासी भीड़ नहीं जुट सकी। लहरविहीन इस चुनाव में यहां यह कह पाना मुश्किल है कि कौन पार्टी या प्रत्याशी कामयाब होगा? वैसे कुछ दिन पूर्व तक सियासी खेमों में सीधा मुकाबला भाजपा और गठबंधन उम्मीदवार से होने की चर्चा थी, किन्तु कांग्रेस प्रत्याशी ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।
मतदाता
21 लाख 12 हजार 800 मतदाताओं वाले इस लोकसभा क्षेत्र में 11 लाख 56 हजार पुरुष, 9 लाख 55 हजार महिला मतदाता समेत 25 हजार से अधिक 18 व 19 वर्षीय युवक-युवतियां मतदाता हैं। जबकि बीते 2014 के चुनाव में मतदाताओं की संख्या 19 लाख 50 हजार 335 थी। वहीं जिले में 100 साल से ऊपर के 634 मतदाता मत का प्रयोग करेंगे।

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