ताज़ा खबर
 
title-bar

दिलचस्प मुकाबले में तीन महारथी आमने-सामने

यों तो मधेपुरा से कुल 13 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। मगर मुख्य मुकाबला महागठबंधन के राजद उम्मीदवार शरद यादव, राजग के जद(एकी) प्रत्याशी दिनेश चंद्र यादव और वर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के बीच है।

Author April 22, 2019 2:49 AM
लोकसभा चुनाव 2019 (प्रतीकात्मक चित्र) फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

गिरधारी लाल जोशी

मधेपुरा लोकसभा सीट पर तीन दिग्गजों के चुनाव मैदान में उतर जाने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां के बारे में एक पुरानी कहावत भी है कि ‘रोम पोप का, मधेपुरा गोप का।’ यह एक हद तक आज भी सही है। यहां से अब तक हुए चुनाव में ज्यादातर यादव बिरादरी से ही जीतकर संसद पहुंचे है। और हारा भी यादव ही है। इस बार भी इतिहास इसको दोहराएगा। यहां मुद्दों से ज्यादा जात-पात हावी है। यहां चुनाव 23 अप्रैल को तीसरे चरण में है। कुल 18 लाख 84 हजार 216 मतदाता वोट डालेंगे।

यों तो मधेपुरा से कुल 13 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। मगर मुख्य मुकाबला महागठबंधन के राजद उम्मीदवार शरद यादव, राजग के जद(एकी) प्रत्याशी दिनेश चंद्र यादव और वर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के बीच है। ये बतौर निर्दर्लीय चुनाव लड़ रहे हैं। 2014 का चुनाव राजद टिकट पर लड़े और जीते थे। इस दफा राजद ने इनको पार्टी से निकाल दिया। वे गांव-गांव घूम कर प्रचार कर रहे हैं और कहते हैं जब याद करबो, तब हाजिर रहबो। यह एक हद तक सही भी है। महेशी के प्रमोद यादव कहते हैं कि ये लोगों के दुख-सुख में खड़े रहते हैं।

आलमनगर के सुनील अग्रवाल कहते हैं मधेपुरा राजद का किला है। इसे ध्वस्त करना मुश्किल है। खुद लालूप्रसाद 1998 और 2004 में चुनाव यहां से जीत चुके हैं। 2004 में इन्होंने यह सीट छोड़ दी थी, तो उपचुनाव हुआ। और राजद टिकट पर राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव जीते। 2014 में भी बतौर राजद प्रत्याशी फिर से जीते।  अबकी शरद यादव राजद की लालटेन छाप से लड़ रहे हैं। वैसे शरद यादव आठवीं दफा यहां से किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें चार दफा 1991 व 1996 में जनता दल से और 1999 और 2009 में जद(एकी) की टिकट पर लड़कर कामयाबी पाई थी। 1998, 2004 और 2014 में वे राजद से शिकस्त खा गए थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से तालमेल बिगड़ जाने से इन्हें अबकी राजद की लालटेन थामने मजबूर होना पड़ा है।

इससे पहले 1967 और 1977 में बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल एक दफा एसएसपी और दूसरी दफा भारतीय लोकदल से जीते थे। 1971 और 1980 में राजेंद्र प्रसाद यादव को पहले कांग्रेस से और फिर कांग्रेस(यू) से विजय मिली थी। 1984 में कांग्रेस के महावीर प्रसाद यादव जीते।
2008 में सीमांकन के बाद सहरसा जिले का बहुत बड़ा भाग मधेपुरा में जोड़ा गया। फिर भी हार-जीत का फैसला एक ही जाति के बीच से हो रहा है। यहां से अबकी जद (एकी) ने दिनेश चंद्र यादव को उम्मीदवार बनाया है। वे नीतीश सरकार में काबीना मंत्री हैं।
मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा इलाके हैं। आलमनगर, मधेपुरा, सहरसा, बिहारीगंज, सोनवर्षा और महेशी। इनमें तीन पर राजद और तीन पर जद (एकी) का कब्जा है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App