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…इन धर्मस्थलों से गुजरता है छत्तीसगढ़ की सत्ता का रास्ता! भाजपा-कांग्रेस सभी ने ली शरण

भाषणों में विकास के दावे करने वाले राजनीतिक दल चुनाव आते-आते धर्म की शरण में चले ही जाते हैं।

Author November 18, 2018 4:40 PM
छत्तीसगढ़ विधानसभा, डोंगरगढ़ मंदिर और गिरौदपुरी धाम (सौजन्यः सोशल मीडिया)

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में दूसरे और अंतिम चरण के मतदान में अब सिर्फ दो दिन बचे हैं। भाजपा यहां चौथी बार सरकार बनाने की जुगत में है तो कांग्रेस डेढ़ दशक का सूखा खत्म करने के रास्ते ढूंढ रही है। ऐसे में यह धर्म की राजनीति की जद में गुजरात, कर्नाटक और पूर्वोत्तर के बाद अब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी आ गए हैं। बात छत्तीसगढ़ की करें तो 90 सीटों वाले इस प्रदेश में करीब चार दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां अलग-अलग धर्मस्थलों का खासा प्रभाव देखने को मिलता है। ऐसे में अगर यह कहा जाए कि रायपुर की कुर्सी का रास्ता मंदिरों से जाता है तो यह गलत नहीं होगा।

चुनाव आए तो ‘धम्मं शरणं गच्छामि’
तमाम पार्टियां भले ही विकास की राजनीति करने का दावा करती हों लेकिन चुनाव आते ही धर्म के आगे नतमस्तक होते नजर आते हैं। छत्तीसगढ़ में पिछले करीब पांच महीनों में तमाम दिग्गज नेता चाहे वो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हों या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी या स्थानीय प्रत्याशी सभी मंदिरों, आश्रमों, मजारों और दरबारों के खूब चक्कर लगा रहे हैं। इसके लिए बाकायदा राज्य और केंद्र स्तर पर धर्मस्थलों को चिन्हित करने, उनका रूट तय करने और वहां के प्रमुखों से मुलाकात के कार्यक्रम भी तय किए गए।

…इन धर्मस्थलों पर रहा नेताओं का फोकस
– गुरु घासीदास का गिरौदपुरी धामः 26 सीटों पर सीधा असर
– कबीर पंथ का दामाखेड़ा धामः 11 सीटों पर असर
– बम्लेश्वरी देवी का डोंगरगढ़ मंदिरः सात सीटों पर असर
– सिंधी समाज का शद्दाणी दरबारः चार सीटों पर असर
– भोरमदेव धामः दो सीटों पर असर

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